डेहटी की बेटी बनी SDM: समरीन फातिमा ने BPSC में लहराया परचम, अररिया का बढ़ाया मान

बिहार के अररिया जिले के छोटे से गांव डेहटी की बेटी समरीन फातिमा ने बड़ा इतिहास रच दिया है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में शानदार सफलता हासिल करते हुए उनका चयन अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) पद पर हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है और समरीन आज हजारों युवाओं, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं।

गांव की बेटी ने प्रशासनिक सेवा में बनाई पहचान

साधारण परिवार से आने वाली समरीन फातिमा ने अपनी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी समरीन ने साबित कर दिया कि सीमित संसाधन भी बड़े सपनों की राह नहीं रोक सकते।

69वीं BPSC में मिली असफलता, 70वीं में बनीं SDM

डेहटी की बेटी बनी SDM: समरीन फातिमा ने BPSC में लहराया परचम, अररिया का बढ़ाया मान

समरीन ने बताया कि उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना सिमुलतला आवासीय विद्यालय में पढ़ाई के दौरान ही देख लिया था। 69वीं BPSC में वह इंटरव्यू तक पहुंचीं, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत जारी रखी। आखिरकार 70वीं BPSC में उन्होंने सफलता का परचम लहराते हुए SDM पद हासिल कर लिया।

“अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे तो सफलता जरूर मिलती है। असफलता केवल अगली सफलता की तैयारी होती है।”
समरीन फातिमा

6 घंटे से 13 घंटे तक पढ़ाई, मेहनत लाई रंग

समरीन ने बताया कि सामान्य दिनों में वह प्रतिदिन 6 से 7 घंटे पढ़ाई करती थीं, जबकि परीक्षा के समय यह समय बढ़कर 13 घंटे तक पहुंच जाता था। उन्होंने नियमित रूटीन और निरंतर अभ्यास को अपनी सफलता का सबसे बड़ा मंत्र बताया।

माता-पिता का मिला भरपूर सहयोग

समरीन की सफलता पर पिता मो. इम्तियाज आलम ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें बेटी की मेहनत पर पूरा भरोसा था। वहीं मां नौशवा खातून ने कहा कि बच्चों को समय देना और उनका मनोबल बढ़ाना ही सफलता की असली कुंजी है।

“बच्चों को सिर्फ पढ़ाई नहीं, भरोसा और साथ भी चाहिए। समरीन ने मेहनत की और आज उसका परिणाम पूरे जिले के सामने है।”
नौशवा खातून, समरीन की मां

डेहटी गांव से SDM तक का सफर

समरीन की प्रारंभिक शिक्षा डेहटी गांव में हुई। इसके बाद उनका चयन बिहार के प्रतिष्ठित सिमुलतला आवासीय विद्यालय में हुआ, जहां उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। आगे उन्होंने पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की और प्रशासनिक सेवा की तैयारी में जुट गईं।

बधाइयों का लगा तांता

परिणाम घोषित होते ही समरीन के घर पर शुभचिंतकों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों का जमावड़ा लग गया। मिठाइयां बांटी गईं और पूरे गांव में जश्न का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि समरीन की सफलता अररिया की बेटियों के लिए नई प्रेरणा लेकर आई है।

समरीन की सफलता का संदेश

“मेहनत कीजिए, धैर्य रखिए और अपने सपनों पर विश्वास बनाए रखिए। मंजिल जरूर मिलेगी।”

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