हड़ताली राजस्व अधिकारियों पर सख्ती तय, सरकार तैयार कर रही सूची; जल्द शुरू होगी कार्रवाई

पटना। बिहार में हड़ताल पर गए राजस्व अधिकारियों के खिलाफ अब सरकार का रुख पूरी तरह सख्त हो गया है। तय समयसीमा खत्म होने के बाद ने काम पर नहीं लौटने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने ऐसे अधिकारियों की सूची तैयार करने का काम लगभग पूरा कर लिया है।

डेडलाइन के बाद भी नहीं लौटे अधिकारी

सरकार ने पहले ही स्पष्ट निर्देश दिया था कि 9 मार्च से हड़ताल पर गए सभी अंचलाधिकारी (CO) और राजस्व अधिकारी 25 मार्च शाम 5 बजे तक हर हाल में अपने पद पर लौटें। चेतावनी के बावजूद बड़ी संख्या में अधिकारी ड्यूटी पर वापस नहीं आए, जिसके बाद अब कार्रवाई लगभग तय मानी जा रही है।

जिलों से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों से ऐसे अधिकारियों की सूची मांगी है, जो अब तक अनुपस्थित हैं। विभाग स्तर पर इन सूचियों को मिलाकर अंतिम सूची तैयार की जा रही है, जिस पर अगले एक-दो दिनों में निर्णय लिया जाएगा।

क्या हो सकती है कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार, हड़ताली अधिकारियों पर कई तरह की सख्त कार्रवाई की तैयारी है—

  • निलंबन (Suspension)
  • वेतन कटौती
  • सेवा में ‘ब्रेक’ दर्ज करना
  • अनुशासनात्मक कार्रवाई

सेवा में “ब्रेक” दर्ज होने का असर अधिकारियों के भविष्य, प्रमोशन और अन्य सेवा लाभों पर भी पड़ सकता है।

सरकार ने हड़ताल को बताया अवैध

राज्य सरकार ने इस हड़ताल को अवैध करार दिया है। विभाग का कहना है कि सामूहिक अवकाश के नाम पर कामकाज ठप करना नियमों के खिलाफ है और इससे आम जनता को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। जमीन से जुड़े मामलों—दाखिल-खारिज, म्यूटेशन और अन्य सेवाएं—लगभग ठप हो गई हैं।

पहले ही दी जा चुकी थी चेतावनी

उपमुख्यमंत्री सह राजस्व मंत्री ने पहले ही साफ चेतावनी दी थी कि तय समयसीमा तक काम पर नहीं लौटने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी कहा था कि जो अधिकारी समय पर लौटेंगे, उनके मामलों में नियमों के तहत सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता है।

प्रशासनिक कामकाज प्रभावित

राजस्व विभाग राज्य का एक अहम विभाग है, जहां काम ठप होने से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों को सीधे नुकसान होता है। जमीन से जुड़े मामलों में देरी से विवाद बढ़ने की आशंका भी रहती है, साथ ही कई सरकारी योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं।

बातचीत के दरवाजे खुले, लेकिन शर्त साफ

सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि बातचीत के लिए दरवाजे खुले हैं, लेकिन इसके लिए अधिकारियों को पहले काम पर लौटना होगा। बिना ड्यूटी जॉइन किए किसी भी मांग पर विचार नहीं किया जाएगा।

टकराव की स्थिति बनी

फिलहाल, मामला टकराव की स्थिति में पहुंच गया है। एक तरफ सरकार अनुशासन बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाने को तैयार है, वहीं दूसरी ओर हड़ताली अधिकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।

आने वाले एक-दो दिनों में यह साफ हो जाएगा कि कितने अधिकारी काम पर लौटते हैं और कितनों पर सख्त कार्रवाई की गाज गिरती है। फिलहाल पूरे राज्य की नजर इस मुद्दे पर टिकी हुई है।

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