भागलपुर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में चल रहे तीन दिवसीय राष्ट्रीय किसान मेला-सह-प्रदर्शनी 2026 का दूसरा दिन बेहद खास और आकर्षण से भरपूर रहा। इस दौरान किसानों, कृषि उद्यमियों, छात्रों और कृषि क्षेत्र में रुचि रखने वाले लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। पूरे परिसर में नई तकनीकों, शोध और कृषि नवाचारों को लेकर उत्साह का माहौल देखने को मिला।
बड़े नेताओं की मौजूदगी, मेले का बढ़ा महत्व
दूसरे दिन के कार्यक्रम में बिहार सरकार के कई वरिष्ठ नेताओं और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इनमें ग्रामीण विकास एवं परिवहन मंत्री श्रवण कुमार, कृषि मंत्री रामकृपाल यादव, भागलपुर सांसद अजय कुमार मंडल, विधान परिषद सदस्य डॉ. एन. के. यादव और नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह शामिल रहे।
अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया, जिसके बाद उन्होंने विभिन्न प्रदर्शनी मंडपों का अवलोकन किया और किसानों व वैज्ञानिकों से संवाद किया।
“शोध से समाधान” थीम पर आधारित प्रदर्शनी
मेले की थीम “शोध से समाधान” रखी गई है, जिसके तहत कृषि और उद्यानिकी से जुड़े नए प्रयोग और तकनीक प्रदर्शित किए गए।
अतिथियों ने फूलों की आकर्षक प्रदर्शनी के साथ-साथ कृषि और उद्यान मंडपों का निरीक्षण किया। यहां बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई तकनीकों और शोध कार्यों की सराहना की गई।
इसके अलावा, मिलेट (श्रीअन्न) आधारित उत्पादों की प्रदर्शनी भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रही।
नीलगाय पर शोध बना चर्चा का विषय
मेले का एक अनूठा आकर्षण नीलगाय के व्यवहार पर चल रहा शोध रहा। वैज्ञानिकों ने इसके व्यवहार में बदलाव को प्रदर्शित किया, जिससे भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की उम्मीद जताई जा रही है।
यह पहल किसानों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि नीलगाय फसलों को नुकसान पहुंचाने के लिए जानी जाती है।
किसानों की समृद्धि ही राज्य की प्रगति: कृषि मंत्री
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि खेती केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि देश की पहचान है। उन्होंने बताया कि बिहार की लगभग 76 प्रतिशत आबादी कृषि से जुड़ी है, ऐसे में किसानों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है।
वहीं ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में उन्नत तकनीक और प्रशिक्षण के माध्यम से ही किसानों की आय में वृद्धि संभव है।
कृषि उद्यमियों और वैज्ञानिकों को सम्मान
इस मौके पर विभिन्न जिलों के प्रगतिशील किसानों और कृषि उद्यमियों को सम्मानित किया गया। इनमें खगड़िया की इंदु कुमारी, बांका की रिंकू देवी, जमुई के अर्जुन मंडल, रोहतास के उत्कर्ष सिंह और भागलपुर के चंदन कुमार जैसे नाम शामिल रहे।
साथ ही, विश्वविद्यालय के कई वैज्ञानिकों को उनके नवाचार और शोध कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। डॉ. दीपक पटेल को प्रतिष्ठित “डॉ. जी. त्रिवेदी पुरस्कार” प्रदान किया गया।
जीआई उत्पादों पर रैम्प वॉक बना आकर्षण
मेले में एक अनूठा आयोजन भी देखने को मिला, जहां विश्वविद्यालय के छात्रों ने जीआई टैग वाले उत्पादों पर आधारित रैम्प वॉक प्रस्तुत किया।
इसमें मखाना, ज़र्दालू आम, मगही पान, कतरनी धान और लीची जैसे उत्पादों को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया। संभावित जीआई उत्पादों जैसे ठेकुआ और खाजा को भी खास तरीके से पेश किया गया।
पशु प्रदर्शनी और अनोखे आकर्षण
दूसरे दिन का एक प्रमुख आकर्षण पशु प्रदर्शनी रही, जिसमें विभिन्न नस्लों के कुत्तों—जर्मन शेफर्ड, पामेरियन, डोबरमैन और लैब्राडोर—के साथ-साथ खरगोश, कबूतर, मुर्गा और अन्य पशु-पक्षियों को प्रदर्शित किया गया।
हिमालयन और पर्शियन बिल्लियों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। वहीं, बकरी द्वारा खींची जाने वाली छोटी गाड़ी (गोट कार्ट) और शानदार नस्ल के घोड़े मेले के खास आकर्षण बने।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
शाम के समय आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विश्वविद्यालय के छात्रों ने शानदार प्रस्तुतियां दीं, जिसने पूरे माहौल को उत्सव में बदल दिया।
ज्ञान, तकनीक और मनोरंजन का संगम
राष्ट्रीय किसान मेला का दूसरा दिन यह साबित करता है कि आधुनिक कृषि अब केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें तकनीक, शोध और उद्यमिता का बड़ा योगदान है।
यह आयोजन किसानों के लिए सीखने, समझने और नए अवसरों को अपनाने का एक बड़ा मंच बनकर उभर रहा है।


