
दरभंगा। हृदय स्थली कहे जाने वाले दरभंगा के स्टेशन रोड इलाके में उस समय अफरातफरी मच गई, जब एक प्रतिष्ठित गेस्ट हाउस के बंद कमरे से मौत की दुर्गंध उठने लगी। विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र स्थित ‘नारायण रेस्ट हाउस’ के कमरा नंबर 109 में पिछले दो दिनों से खामोशी पसरी थी, लेकिन बुधवार की देर रात जब पुलिस ने दरवाजा तोड़ा, तो भीतर का मंजर रूह कंपा देने वाला था। बाथरूम के फर्श पर सुपौल के एक जाने-माने व्यवसायी की लाश पड़ी थी। मृतक की पहचान सुपौल जिले के नगर थाना क्षेत्र के गुदरी बाजार निवासी संजय प्रसाद अग्रवाल के रूप में हुई है। वह 15 अप्रैल को इस होटल में ठहरे थे, लेकिन उसके बाद वे कभी जीवित बाहर नहीं आ सके। इस घटना ने व्यावसायिक जगत और स्थानीय लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह एक सोची-समझी हत्या है या फिर किसी मानसिक तनाव के कारण उठाया गया आत्मघाती कदम? पुलिस फिलहाल इन दोनों पहलुओं के बीच उलझी हुई है और एफएसएल की टीम वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिए इस रहस्य को सुलझाने में जुटी है।
रहस्यमयी खामोशी और उठती दुर्गंध: होटल में ऐसे हुआ खुलासा
होटल प्रबंधन के अनुसार, संजय प्रसाद अग्रवाल ने 15 अप्रैल को होटल में कमरा लिया था। शुरुआती जांच में पता चला है कि चेक-इन के समय वे बिल्कुल सामान्य दिख रहे थे। हालांकि, अगले 48 घंटों तक उनके कमरे में कोई हलचल नहीं देखी गई। न तो उन्होंने खाने का ऑर्डर दिया और न ही कमरे से बाहर निकले। होटल के कर्मचारी इसे उनकी निजता समझकर नजरअंदाज करते रहे, लेकिन बुधवार की शाम जब कमरा नंबर 109 के आसपास से एक अजीब और तेज दुर्गंध आने लगी, तो सफाईकर्मियों और प्रबंधक के कान खड़े हो गए।
होटल प्रबंधक ने बताया कि उन्होंने कई बार दरवाजा खटखटाया और घंटी बजाई, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। दरवाजा अंदर से मजबूती से बंद था। अनहोनी की आशंका को देखते हुए तुरंत विश्वविद्यालय थाना को इसकी सूचना दी गई। मौके पर पहुँचे थानाध्यक्ष सुधीर कुमार ने गवाहों की मौजूदगी में दरवाजा तोड़ने का आदेश दिया। जैसे ही पुलिस की टीम अंदर दाखिल हुई, कमरे में फैली गंध और भयावह सन्नाटे ने किसी बड़ी त्रासदी की पुष्टि कर दी।
बाथरूम में बिछी थी लाश: एफएसएल ने खंगाला कोना-कोना
पुलिस की टीम जब कमरे के भीतर तलाशी ले रही थी, तो उन्हें बेडरूम का हिस्सा खाली मिला, लेकिन बाथरूम का दरवाजा आधा खुला था। वहां संजय प्रसाद अग्रवाल का बेजान शरीर पड़ा हुआ था। शव की स्थिति को देखकर पुलिस ने तुरंत फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम को मुजफ्फरपुर से तलब किया। विशेषज्ञों ने कमरे से कई महत्वपूर्ण कागजात, मृतक का मोबाइल फोन और कुछ अन्य सामान जब्त किए हैं।
प्रथम दृष्टया पुलिस इसे विषाक्त पदार्थ (जहरीला पदार्थ) के सेवन से हुई मौत मान रही है। शरीर पर बाहरी चोट के कोई स्पष्ट निशान नहीं मिले हैं, जिससे संघर्ष की संभावना कम नजर आती है। हालांकि, बाथरूम में शव का मिलना और दो दिनों तक बाहर न आना इस बात की ओर इशारा करता है कि घटना 15 या 16 अप्रैल की रात की ही हो सकती है। पुलिस ने कमरे में मौजूद पानी की बोतलों और खाने के अवशेषों को भी जांच के लिए सुरक्षित रख लिया है।
परिजनों में कोहराम: सुपौल से दरभंगा तक गम का माहौल
संजय प्रसाद अग्रवाल सुपौल के गुदरी बाजार के एक प्रतिष्ठित व्यवसायी थे। जैसे ही दरभंगा पुलिस ने उनके पास से मिले दस्तावेजों के आधार पर सुपौल पुलिस और परिजनों को सूचना दी, घर में मातम पसर गया। परिजन आनन-फानन में दरभंगा के लिए रवाना हो गए। परिजनों का कहना है कि वे किसी व्यावसायिक काम के सिलसिले में घर से निकले थे, लेकिन उनकी मौत इस तरह एक होटल के कमरे में होगी, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी।
संजय प्रसाद अग्रवाल के करीबियों का कहना है कि वे स्वभाव से मिलनसार थे, लेकिन क्या वे पिछले कुछ समय से किसी आर्थिक संकट या मानसिक दबाव में थे, इस पर फिलहाल परिवार चुप है। सुपौल के व्यापारिक संगठनों ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। शुक्रवार को शव का पोस्टमार्टम दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (DMCH) में किया जाएगा, जिसके बाद ही मौत के असली कारणों पर से पर्दा उठ सकेगा।
आत्महत्या या साजिश? पुलिस के सामने पेचीदा सवाल
विश्वविद्यालय थानाध्यक्ष सुधीर कुमार ने बताया कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। पुलिस हत्या और आत्महत्या—दोनों ही एंगल से जांच कर रही है। कमरे से कुछ ऐसे कागजात बरामद हुए हैं जो संभवतः ‘सुसाइड नोट’ या फिर व्यापारिक लेन-देन से जुड़े दस्तावेज हो सकते हैं। इन कागजातों की राइटिंग को मृतक की लिखावट से मिलान कराया जा रहा है।
पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या 15 अप्रैल के बाद होटल में कोई व्यक्ति उनसे मिलने आया था? होटल के सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है ताकि संजय प्रसाद अग्रवाल के अंतिम घंटों की गतिविधियों का पता लगाया जा सके। पुलिस उनके मोबाइल के कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) को भी स्कैन कर रही है ताकि यह जाना जा सके कि उन्होंने अंतिम बार किससे बात की थी। यदि यह आत्महत्या है, तो वह कौन सी मजबूरी थी जिसने एक सफल व्यवसायी को मौत को गले लगाने पर मजबूर कर दिया? और यदि यह हत्या है, तो अपराधी कमरे को अंदर से बंद करके कैसे निकला? इन सवालों के जवाब अब पुलिस की जांच पर टिके हैं।
व्यावसायिक तनाव और बढ़ते ऐसे मामले: एक गंभीर चिंता
पिछले कुछ समय में बिहार के विभिन्न शहरों में व्यवसायियों की संदिग्ध मौतों के मामले बढ़े हैं। अक्सर व्यापारिक घाटा, कर्ज का दबाव या फिर आपसी रंजिश इन घटनाओं की मुख्य वजह बनती है। दरभंगा के स्टेशन रोड जैसे व्यस्त इलाके में स्थित होटल में इस तरह की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और अतिथि पंजीकरण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। होटल संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई अतिथि लंबे समय तक कमरे से बाहर न निकले या किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
डीएमसीएच के डॉक्टरों का कहना है कि शरीर की स्थिति को देखते हुए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर के प्रकार और मृत्यु के सटीक समय का खुलासा हो जाएगा। पुलिस को अंदेशा है कि कमरे से बरामद कुछ रसायनों या दवाइयों का सेवन किया गया होगा। फिलहाल, नारायण रेस्ट हाउस के कमरा नंबर 109 को सील कर दिया गया है और वहां किसी के भी प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।
आगे की कार्रवाई और प्रशासनिक सतर्कता
विश्वविद्यालय पुलिस के अनुसार, परिजनों के आने के बाद उनके बयान दर्ज किए जाएंगे। क्या संजय प्रसाद की किसी से कोई पुरानी रंजिश थी या वे किसी धमकी का सामना कर रहे थे, इन बिंदुओं पर भी पूछताछ होगी। पुलिस कप्तान ने भी इस मामले पर संज्ञान लिया है और त्वरित जांच के निर्देश दिए हैं। दरभंगा में हुई इस घटना ने सुपौल के गुदरी बाजार के व्यवसायियों को भी स्तब्ध कर दिया है।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, कई और राज खुलने की उम्मीद है। 18 अप्रैल की इस रिपोर्ट के माध्यम से हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि पुलिस हर सूक्ष्म साक्ष्य को गंभीरता से ले रही है। सस्पेंस और गम के बीच दरभंगा और सुपौल की नजरें अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस के अगले खुलासे पर टिकी हैं। क्या स्टेशन रोड के इस कमरे में कोई खौफनाक राज छिपा है या यह एक टूटे हुए मन की दुखद परिणति है, यह जल्द ही साफ हो जाएगा।


