किसानों को सही उर्वरक और सही जानकारी: पटना में राज्य स्तरीय उर्वरक विक्रेता प्रशिक्षण, कालाबाजारी पर कसेगा शिकंजा

पटना। किसानों को उर्वरक की कमी, मिलावट और गलत जानकारी से होने वाली परेशानी से बचाने के लिए बिहार सरकार का कृषि विभाग लगातार कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में शनिवार को पटना स्थित बिहार कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान (बामेती) में राज्य स्तरीय उर्वरक विक्रेता प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

यह प्रशिक्षण कृषि विभाग के मार्गदर्शन में केन्द्रीय उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण एवं प्रशिक्षण संस्थान, फरीदाबाद और इफको के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य उर्वरक विक्रेताओं को गुणवत्ता मानकों, नियमों और किसानों को सही मार्गदर्शन देने के लिए तैयार करना है।

उर्वरक गुणवत्ता सुधार पर फोकस

कार्यक्रम में बताया गया कि उर्वरक की गुणवत्ता केवल फसल उत्पादन ही नहीं बढ़ाती, बल्कि मिट्टी की उर्वराशक्ति को भी बनाए रखती है। विभाग की कोशिश है कि किसान सही उर्वरक, सही मात्रा और सही समय पर इस्तेमाल करें।

क्या बोले कृषि निदेशक

कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव ने कहा कि राज्य में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने उर्वरक समिति की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि विक्रेता किसानों को उर्वरक के सही उपयोग के लिए जागरूक करें।
उन्होंने यह भी कहा कि रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ जैविक खाद को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है, ताकि मिट्टी की सेहत बनी रहे।

नियम, पंजीकरण और गुणवत्ता मानक समझाए गए

कार्यक्रम के मुख्य प्रशिक्षक डॉ. रविंद्र यादव (आरएफसीएल, कल्याणी) ने उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) के तहत आने वाले सभी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने

  • उर्वरकों के गुणवत्ता मानक
  • पंजीकरण प्रमाण-पत्र
  • प्राधिकरण पत्र
    जैसे अहम विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

वहीं, इफको के राज्य वितरण प्रबंधक अशोक कुमार पालीवाल ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्य और इसकी उपयोगिता पर चर्चा की।

सभी जिलों से पहुंचे विक्रेता

इस प्रशिक्षण में विभिन्न उर्वरक कंपनियों के राज्य विपणन प्रबंधक, इफको के अधिकारी, कृषि विभाग के पदाधिकारी और बिहार के सभी जिलों से आए उर्वरक विक्रेता शामिल हुए।

राज्य में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया कि राज्य में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है और कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।
30 जनवरी 2026 तक उपलब्ध भंडार

  • यूरिया: 1.71 लाख मीट्रिक टन
  • डीएपी: 1.64 लाख मीट्रिक टन
  • एनपीके: 2.10 लाख मीट्रिक टन
  • एमओपी: 0.44 लाख मीट्रिक टन
  • एसएसपी: 1.06 लाख मीट्रिक टन

सरकार का कहना है कि इस तरह के प्रशिक्षण से किसानों को सही जानकारी, सही उर्वरक और बेहतर उत्पादन का लाभ मिलेगा।

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