
पटना: बिहार में राजस्व सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनहितकारी बनाने के उद्देश्य से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग लगातार जिलों के कार्यों की समीक्षा कर रहा है। इसी क्रम में विभागीय समीक्षा के सातवें दिन राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने मुजफ्फरपुर, बक्सर और बांका जिलों के राजस्व कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि हर जिले को टॉप-10 रैंकिंग हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। उनका कहना था कि रैंकिंग केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं बल्कि प्रशासनिक कार्यक्षमता और जनता को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता का वास्तविक प्रतिबिंब है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री ने दाखिल-खारिज, परिमार्जन, ई-मापी, राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों, जनशिकायतों के निस्तारण और विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं की प्रगति का बारीकी से मूल्यांकन किया। उन्होंने कहा कि यदि सभी स्तरों पर अधिकारी प्रतिस्पर्धी भावना के साथ कार्य करें और बेहतर प्रदर्शन को अपना लक्ष्य बनाएं, तो राजस्व प्रशासन में व्यापक सुधार स्वतः दिखाई देगा।
बैठक के दौरान मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने राजस्व सेवाओं को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए कई डिजिटल पहल शुरू की हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य आम नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचाना और उन्हें ऑनलाइन माध्यम से त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराना है। लेकिन इन योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब जिलों और अंचलों में तैनात अधिकारी पूरी जिम्मेदारी और गंभीरता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें।
समीक्षा के दौरान मुजफ्फरपुर जिले के प्रदर्शन पर चर्चा करते हुए मंत्री ने कहा कि अप्रैल माह की रैंकिंग में जिला 13वें स्थान पर है, जो अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिले को शीर्ष श्रेणी में पहुंचाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए। समीक्षा में यह भी सामने आया कि जिले के एडीएम और डीसीएलआर स्तर पर भी प्रदर्शन में सुधार की आवश्यकता है।
मंत्री ने यह भी कहा कि किसी जिले की रैंकिंग केवल जिलाधिकारी या एडीएम के प्रदर्शन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि अंचल स्तर पर कार्यरत अधिकारियों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने बताया कि मुजफ्फरपुर जिले के कई अंचल अभी भी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे अंचलों की पहचान कर विशेष निगरानी और मार्गदर्शन की आवश्यकता है।
बक्सर जिले की समीक्षा के दौरान भी मंत्री ने अधिकारियों को कार्यप्रणाली में सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कुछ अंचलों का प्रदर्शन बेहतर है, जबकि कई अंचलों को अभी काफी सुधार करने की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि जिन अंचलों ने अच्छा प्रदर्शन किया है, उनकी कार्यशैली और रणनीति का अध्ययन कर अन्य अंचलों में भी उसे लागू किया जाए। इससे पूरे जिले के प्रदर्शन में सुधार लाया जा सकता है।
वहीं बांका जिले के प्रदर्शन की सराहना करते हुए मंत्री ने कहा कि जिला राज्य स्तर पर तीसरे स्थान पर है, जो एक सकारात्मक उपलब्धि है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल जिला स्तर पर अच्छी रैंकिंग पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक अधिकारी और प्रत्येक अंचल का प्रदर्शन संतुलित और बेहतर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कुछ अंचल पीछे रह जाते हैं तो इसका असर पूरे जिले की कार्यक्षमता पर पड़ता है।
डॉ. जायसवाल ने तीनों जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्रत्येक श्रेणी में टॉप-10 में स्थान बनाने का लक्ष्य निर्धारित करें। उनका कहना था कि जब अधिकारी लक्ष्य आधारित कार्य करेंगे तो उसका सीधा लाभ जनता को मिलेगा। राजस्व मामलों के त्वरित निपटारे से लोगों की समस्याएं कम होंगी और प्रशासन पर उनका भरोसा भी बढ़ेगा।
समीक्षा बैठक में दाखिल-खारिज, परिमार्जन और ई-मापी से जुड़े मामलों पर विशेष ध्यान दिया गया। मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि प्रतिदिन जितने नए आवेदन प्राप्त होते हैं, उससे अधिक मामलों का निष्पादन किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि केवल नए मामलों के बराबर निष्पादन होगा तो लंबित मामलों का बोझ कभी कम नहीं होगा। इसलिए अधिकारियों को अतिरिक्त प्रयास करते हुए लंबित मामलों की संख्या घटानी होगी।
उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग से जुड़ी सेवाएं सीधे आम लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं। भूमि विवाद, दाखिल-खारिज, मापी और परिमार्जन जैसे मामलों में देरी होने से लोगों को आर्थिक और सामाजिक दोनों प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए समयबद्ध सेवा उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
लगभग तीन घंटे तक चली इस समीक्षा बैठक में विभाग की कई महत्वपूर्ण योजनाओं और अभियानों की भी समीक्षा की गई। इनमें म्यूटेशन डिफेक्ट चेक, ऑनलाइन दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस, ई-मापी, अभियान बसेरा-2, गवर्नमेंट लैंड वेरिफिकेशन रिपोर्ट, राजस्व महाअभियान, जनशिकायत निवारण और सहयोग शिविरों में प्राप्त आवेदनों का निष्पादन शामिल था।
मंत्री ने आरसीएमएस पोर्टल के माध्यम से संचालित राजस्व न्यायालयों की भी समीक्षा की। उन्होंने अंचल अधिकारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता और अपर समाहर्ता न्यायालयों में लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के निर्देश दिए। उनका कहना था कि न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या कम करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि कार्यों में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी। जो अधिकारी लगातार खराब प्रदर्शन करेंगे, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। वहीं उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित भी किया जाएगा ताकि बेहतर कार्य संस्कृति विकसित हो सके।
समीक्षा के दौरान विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी जिलों के अधिकारियों से सीधा संवाद किया और कार्यप्रणाली में सुधार के लिए आवश्यक सुझाव दिए। अधिकारियों को यह स्पष्ट कर दिया गया कि अगली समीक्षा में भी यदि अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई देता है तो जवाबदेही तय की जाएगी।
डॉ. जायसवाल ने अंत में कहा कि बिहार सरकार का लक्ष्य राजस्व सेवाओं को पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनाना है। इसके लिए तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जा रहा है और प्रशासनिक स्तर पर लगातार सुधार किए जा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे जनसेवा की भावना के साथ कार्य करें और यह सुनिश्चित करें कि प्रत्येक नागरिक को समय पर और गुणवत्तापूर्ण राजस्व सेवाएं उपलब्ध हो सकें।
उन्होंने कहा कि यदि सभी जिले टॉप-10 में आने का लक्ष्य लेकर काम करें तो न केवल विभागीय रैंकिंग में सुधार होगा, बल्कि पूरे राज्य की राजस्व व्यवस्था अधिक मजबूत, प्रभावी और जनता के प्रति उत्तरदायी बन सकेगी।


