शबाना आजमी की सोशल मीडिया पोस्ट पर विवाद, पुलिस मैनुअल के उल्लंघन का आरोप, जांच शुरू

पूर्णिया | 2 अगस्त 2025: पूर्णिया के फणीश्वरनाथ रेणु टाउन आउट पोस्ट (TOP) की थानेदार शबाना आजमी एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में हैं। शबाना ने हाल ही में फेसबुक और इंस्टाग्राम पर कुछ तस्वीरें साझा की थीं, जिसमें उनके पिता और दादा उनकी कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं। अब इस मामले को लेकर पुलिस मैनुअल एक्ट के उल्लंघन का हवाला देते हुए जांच के आदेश दिए गए हैं।

वायरल पोस्ट में भावुक संदेश

वायरल तस्वीरों के साथ शबाना आजमी ने लिखा था—

“जब मां-बाप की आंखों में खुशी देखनी हो, तब सपने सिर्फ खुद के लिए नहीं होते, विरासत बनानी है, नाम रोशन करना है और एक ऐसी कहानी छोड़नी है, जो दुनिया याद रखे।”

तस्वीरों में वे अपने दादा को अपनी कुर्सी पर बैठा रही हैं और एक अन्य तस्वीर में किसी परिजन को गुलदस्ता देती दिख रही हैं। हालांकि विवाद बढ़ने के बाद शबाना ने यह पोस्ट सोशल मीडिया से हटा दिया है।

DIG ने दिए जांच के आदेश, केस की जिम्मेदारी वापस

तस्वीरें वायरल होने के बाद DIG प्रमोद कुमार मंडल ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। बताया गया है कि हाल ही में शबाना को एक अहम आपराधिक मामले की जांच सौंपी गई थी, लेकिन अब उनसे वह जिम्मेदारी हटा ली गई है।

शबाना का पक्ष – भावुक क्षण था, गलत मंशा नहीं थी

शबाना आजमी ने स्पष्ट किया कि—

“अप्रैल में मेरे दादा और पिता पहली बार मुझसे मिलने टीओपी आए थे। मैं भावुक हो गई थी। उन्होंने जो संघर्ष किया, उसकी बदौलत ही मैं आज इस पद पर हूं। यह भावनात्मक क्षण था, इसका कोई और अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए।”

उन्होंने यह भी बताया कि जब उन्होंने यह पोस्ट डाली थी, तब किसी ने विरोध नहीं किया था। 20 से अधिक लोगों ने पोस्ट को शेयर भी किया था।

पुलिस मैनुअल क्या कहता है?

पुलिस मैनुअल और अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के अनुसार, किसी भी पुलिस अधिकारी को अपनी कुर्सी या पद का प्रतीकात्मक दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। यह कार्यालय की गरिमा, अनुशासन और निष्पक्षता बनाए रखने की शर्तों के खिलाफ है।

बिहार पुलिस मैनुअल 2024 (संशोधित) में भी अधिकारियों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश दिए गए हैं कि वे सेवा में रहते हुए व्यक्तिगत भावनाओं को सार्वजनिक पद की गरिमा से ऊपर न रखें।

कानूनी विशेषज्ञ की राय

एडवोकेट गौतम वर्मा का कहना है:

“पुलिस एक्ट 1861 और पुलिस मैनुअल की धाराओं में स्पष्ट है कि ड्यूटी स्टेशन पर किसी बाहरी व्यक्ति को बैठाना, चाहे प्रतीकात्मक ही क्यों न हो, अनुशासनहीनता के अंतर्गत आता है। विभाग चाहे तो इस पर प्रशासनिक कार्रवाई कर सकता है।”


पृष्ठभूमि: कौन हैं शबाना आजमी?

शबाना आजमी वर्तमान में पूर्णिया के फणीश्वरनाथ रेणु टीओपी की थानेदार हैं। सोशल मीडिया पर उनकी अच्छी-खासी मौजूदगी है। इंस्टाग्राम पर उनके 2.12 लाख फॉलोअर्स हैं, जबकि फेसबुक पर 15,000 फॉलोअर्स हैं। वे युवाओं के बीच एक लोकप्रिय पुलिस अधिकारी मानी जाती रही हैं।


क्या आगे कार्रवाई होगी?

DIG स्तर पर जांच के निर्देश के बाद यह देखा जाना शेष है कि विभागीय अनुशासनात्मक समिति क्या रुख अपनाती है। यदि प्रथम दृष्टया उल्लंघन सिद्ध होता है, तो शबाना पर चेतावनी, तबादला या सस्पेंशन जैसी कार्रवाई संभव है।


 

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