मोतिहारी — फाइनेंशियल इन्क्लूजन लिमिटेड बैंक के 43 हजार रुपये और तीन टैब की हेरा-फेरी को अंजाम देने के लिए बैंक के ही दो कर्मचारियों ने एक फिल्मी स्क्रिप्ट रच दी। झूठी छिनतई की कहानी गढ़कर बैंक को गुमराह करने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच ने पूरे मामले की साजिश को बेनकाब कर दिया। अब दोनों आरोपी — विकास कुमार और मोनी कुमारी — के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
दिनांक 2 अगस्त 2025 को विकास कुमार ने मुफ्फसिल थाना में आवेदन देकर दावा किया कि वह अपनी महिला सहकर्मी मोनी कुमारी के साथ बैंक का कलेक्शन लेकर जा रहा था, तभी चार अज्ञात अपराधियों ने उनकी बैग छीन ली, जिसमें बैंक का ₹43,820, तीन सैमसंग टैब, और उसका निजी बिवो मोबाइल था। यह घटना बताई गई बतरौलिया पेट्रोल पंप के पास की।
पुलिस को कैसे हुआ शक?
थाने में मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने जब तकनीकी साक्ष्य जैसे सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) और मानवीय आसूचना का विश्लेषण किया तो कहानी में कई पेंच दिखे। जांच में यह सामने आया कि छिनतई की पूरी स्क्रिप्ट पहले से ही दोनों कर्मचारियों द्वारा तैयार की गई थी। मकसद था बैंक का पैसा और टैब हड़प लेना।
आरोपी ने मोबाइल लीचवानी में छुपाया था
पूछताछ में विकास कुमार टूट गया और उसने बताया कि उसका मोबाइल और सिम कहां छुपाया गया है। इसके बाद पुलिस ने पकड़ीदयाल थाना क्षेत्र के चोरमा गाँव में लीचवानी के पास सड़क किनारे मिट्टी के अंदर से मोबाइल को बरामद किया। वहीं, सिम कार्ड को मधुबनी घाट पुल के पास से निकाला गया।
दर्ज की गई प्राथमिकी और आरोपी
इस फर्जीवाड़े को लेकर मुफ्फसिल थाना में कांड संख्या 513/25, धारा 61 (2)/318(4)/217/248/3(5) बीएनएस के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
अभियुक्तों के नाम:
- विकाश कुमार, पिता- संजय पटेल, निवासी- फुलकाहा, थाना- श्यामपुर, जिला- शिवहर
- मोनी कुमारी, पिता- राजेश राम, निवासी- नरूलापुर, थाना- कांटी, जिला- मुजफ्फरपुर
क्या-क्या बरामद हुआ?
- सैमसंग टैब – 03
- बिवो मोबाइल – 01
- सिम कार्ड – 02
- मोनी कुमारी का बैंक आईडी कार्ड
किसने की कार्रवाई?
इस मामले का खुलासा करने में मोतिहारी सदर-2 के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी जितेश पांडेय के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने त्वरित कार्रवाई की। टीम में मुफ्फसिल थाना प्रभारी, कई पु.अ.नि. और सशस्त्र बल के जवान शामिल थे।
क्यों है मामला खास?
बैंकिंग सेक्टर में कर्मचारियों द्वारा इस प्रकार की साजिश दुर्लभ होती है। यह मामला केवल एक फर्जी रिपोर्ट का नहीं, बल्कि सोची-समझी आर्थिक धोखाधड़ी का है, जिसमें दोनों आरोपियों ने बैंक को चूना लगाने की कोशिश की। फिलहाल दोनों की गिरफ्तारी की कवायद जारी है।


