राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के प्रत्याशी के पक्ष में वोट न करने को लेकर मनिहारी से कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद ने खुलासा किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह कदम किसी दबाव या लालच के कारण नहीं, बल्कि वैचारिक मतभेदों की वजह से उठाया गया।
उम्मीदवार चयन पर उठाए सवाल
विधायक मनोहर प्रसाद ने कहा कि राज्यसभा के लिए चयनित उम्मीदवार उनके और उनकी पार्टी के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं था। उन्होंने कहा, “मैं ऐसे व्यक्ति का समर्थन नहीं कर सकता जो मेरे राजनीतिक मूल्यों की कसौटी पर खरा न उतरे।” उनके इस बयान से गठबंधन के भीतर असंतोष और आंतरिक मतभेद की झलक सामने आई है।
महागठबंधन का दावा और असलियत
मनोहर प्रसाद ने यह भी दावा किया कि जिसे महागठबंधन का उम्मीदवार बताया जा रहा था, वह केवल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का उम्मीदवार था। उन्होंने कहा कि महागठबंधन के नेतृत्व की ओर से उन्हें कभी आधिकारिक तौर पर इस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने के लिए कहा ही नहीं गया।
कार्यकर्ताओं की अनदेखी पर नाराजगी
विधायक ने कहा कि महागठबंधन को साधारण कार्यकर्ता या समाज के निचले तबके से आने वाले व्यक्ति को मौका देना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि रसूखदारों को प्राथमिकता देना लोकतंत्र और गठबंधन की मूल भावना के खिलाफ है। यही कारण था कि उन्होंने मतदान से दूरी बनाए रखी।
दबाव और लालच की खबरों को किया खारिज
मनोहर प्रसाद ने साफ किया कि उनके फैसले पर न तो किसी का दबाव था और न ही किसी तरह का लालच। उन्होंने कहा, “मैं अपने सिद्धांतों पर अडिग हूँ और भविष्य में भी इसी स्टैंड पर रहूँगा।”


