बिहार में मानसून के दौरान बालू खनन पर पूर्ण प्रतिबंध, 15 अक्टूबर तक सभी घाट रहेंगे बंद

पटना, 18 जून 2025 – पर्यावरण संरक्षण और खनन प्रबंधन को लेकर बिहार सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। 15 जून से 15 अक्टूबर 2025 तक राज्य के सभी घाटों पर बालू खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। यह निर्णय खान एवं भूतत्व विभाग द्वारा लिया गया है ताकि मानसून के दौरान नदियों में प्राकृतिक पुनर्भरण की प्रक्रिया को बाधित न किया जाए।

बालू की आपूर्ति सेकेंड्री लोडिंग प्वाइंट्स से

इस अवधि में बालू की आपूर्ति केवल सेकेंड्री लोडिंग प्वाइंट्स और लाइसेंसधारकों के माध्यम से की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आम जनता और सरकारी निर्माण कार्यों को बालू की कमी से जूझना न पड़े, इसके लिए सभी ज़रूरी उपाय किए जा रहे हैं।

ड्रोन वीडियोग्राफी से होगा निगरानी और पुनर्भरण का आकलन

राज्य के सभी संचालित और असंचालित घाटों तथा सेकेंड्री लोडिंग प्वाइंट्स की ड्रोन वीडियोग्राफी कराने का निर्देश दिया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नदियों में बालू के पुनर्भरण का विज्ञानसम्मत और पारदर्शी आकलन किया जा सके। इसके अलावा, भारत सरकार की एजेंसी सीएमपीडीआई से वैज्ञानिक अध्ययन कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है।

अवैध खनन के विरुद्ध सख्त कार्रवाई

विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई की जाए और जब्त बालू को सरकारी दर पर कार्य विभागों को उपलब्ध कराया जाए। यह कदम वैध खनन को बढ़ावा देने और राज्य में विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

आम जनता के लिए उपलब्ध होगी सहायता

अगर किसी जिले में बालू की कमी की शिकायत आती है, तो नागरिक अपने जिला खनन पदाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। सभी ज़िला पदाधिकारियों के संपर्क विवरण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। विभाग ने कार्य विभागों को भी आवश्यकतानुसार घाटों का बंदोबस्त करने की जानकारी दी है।

19 जून को अहम बैठक

विभाग के निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए 19 जून को पटना में जिला खनन पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गई है। बैठक में मानसून के दौरान बालू की आपूर्ति, वैध खनन की निगरानी, और आम जनता को असुविधा से बचाने जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।

विभाग का संकल्प

खान एवं भूतत्व विभाग का कहना है कि उसका उद्देश्य है कि राज्य में विकास कार्य बिना किसी रुकावट के चलते रहें, साथ ही पर्यावरण की रक्षा और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग भी सुनिश्चित हो।


बिहार सरकार की यह पहल राज्य में संतुलित खनन नीति की दिशा में एक मजबूत कदम है, जो पर्यावरण संरक्षण और विकास—दोनों के बीच संतुलन कायम रखने की सोच को दर्शाता है।

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