
भागलपुर जिले के गोराडीह प्रखंड में आयोजित एक बड़े जनसंपर्क कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का अलग और स्थानीय संस्कृति से जुड़ा अंदाज देखने को मिला। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी “सहयोग” पहल की समीक्षा के लिए पहुंचे मुख्यमंत्री ने मंच से लोगों को संबोधित करते हुए अंगिका भाषा का इस्तेमाल किया और सीधे ग्रामीणों से कार्यक्रम की स्थिति के बारे में जानकारी ली। स्थानीय भाषा में पूछे गए उनके सवाल ने न केवल सभा में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया बल्कि पूरे कार्यक्रम को एक अलग पहचान भी दे दी।
मुख्यमंत्री ने अंगिका में लोगों से पूछा कि “सहयोग कार्यक्रम ठीक चलै छै नै, नेय चलै छै कि नहीं, अच्छा छै नै?” उनके इस सवाल के बाद सभा स्थल तालियों और नारों से गूंज उठा। बड़ी संख्या में मौजूद ग्रामीणों ने भी उत्साह के साथ अपनी प्रतिक्रिया दी और कार्यक्रम के प्रति समर्थन जताया। स्थानीय भाषा में संवाद होने के कारण लोगों के बीच अपनापन और सहजता का माहौल देखने को मिला।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि राज्य की योजनाओं और सुविधाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि कई बार लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बर्बादी होती है। इसी स्थिति को बदलने के उद्देश्य से सहयोग कार्यक्रम की शुरुआत की गई थी।
उन्होंने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों की शिकायतों, आवेदनों और समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है, ताकि लोगों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। सरकार चाहती है कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे और किसी को भी जानकारी या प्रक्रिया की कमी के कारण वंचित न रहना पड़े।
सभा के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और प्रशासनिक पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए। उन्होंने कहा कि जनता से जुड़े मामलों में देरी लोगों के विश्वास को प्रभावित करती है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री के अंगिका में दिए गए संबोधन ने पूरे कार्यक्रम का माहौल बदल दिया। जैसे ही उन्होंने स्थानीय बोली में संवाद शुरू किया, लोगों में उत्साह और बढ़ गया। ग्रामीणों ने भी उसी भाषा में जवाब देकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। कई लोगों ने इसे क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति के प्रति सम्मान के रूप में देखा।
राजनीतिक और सामाजिक जानकारों का मानना है कि स्थानीय भाषा में संवाद स्थापित करने से जनता और नेतृत्व के बीच दूरी कम होती है। इससे लोगों को यह महसूस होता है कि उनकी भाषा और पहचान को महत्व दिया जा रहा है। गोराडीह की सभा में भी कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जहां लोगों ने मुख्यमंत्री के संबोधन को ध्यानपूर्वक सुना और सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सहयोग कार्यक्रम के आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राज्यभर से इस योजना के तहत अब तक लगभग छह लाख आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से बड़ी संख्या में मामलों का समाधान किया जा चुका है और अधिकांश आवेदकों को राहत मिली है।
उन्होंने जानकारी दी कि लगभग साढ़े पांच लाख से अधिक मामलों का निपटारा हो चुका है, जबकि शेष मामलों पर भी तेजी से कार्रवाई जारी है। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी आवेदन लंबे समय तक लंबित न रहे और सभी मामलों का तय समय सीमा के भीतर समाधान किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। प्रत्येक विभाग को समय-समय पर समीक्षा और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश न रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन मामलों में कार्रवाई में देरी देखी गई, वहां जवाबदेही तय की गई और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया। इसके बाद कई मामलों में कार्यवाही की गति तेज हुई और लंबित आवेदनों के निष्पादन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का स्पष्ट संदेश है कि जनता की समस्याओं से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि लोगों को समय पर सेवा और सहायता प्राप्त हो।
कार्यक्रम के दौरान कई ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं और सुझाव भी साझा किए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा की जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब उनका लाभ वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि सरकार केवल योजनाओं की घोषणा करने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उनका प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना चाहती है। इसी सोच के तहत विभिन्न योजनाओं की नियमित समीक्षा की जा रही है और जहां जरूरत महसूस होती है वहां सुधारात्मक कदम भी उठाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक सरल और नागरिक केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। तकनीक और डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से शिकायतों और आवेदनों के निपटारे की प्रक्रिया को और तेज किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में सहयोग कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा ताकि लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। सरकार का प्रयास है कि हर नागरिक को सम्मानजनक और समयबद्ध सेवा उपलब्ध हो।
सभा समाप्त होने के बाद एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। मुख्यमंत्री का काफिला जैसे ही हेलिपैड की ओर बढ़ा, बड़ी संख्या में ग्रामीण भी वहां पहुंचने लगे। कई लोग हेलीकॉप्टर को करीब से देखने के लिए उत्साहित नजर आए, जबकि कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन से तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड किए।
हेलिपैड के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी और लोगों को निर्धारित स्थानों पर रोका गया था। इसके बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ और वे बैरिकेडिंग के पीछे खड़े होकर हेलीकॉप्टर के उड़ान भरने का इंतजार करते रहे।
जैसे ही हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरी, लोगों ने हाथ हिलाकर अभिवादन किया और कई लोग पूरे दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते दिखाई दिए। ग्रामीणों के बीच इस पूरे घटनाक्रम को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।
गोराडीह में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक प्रशासनिक समीक्षा बैठक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह स्थानीय भाषा, जनसंवाद और सरकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति को समझने का एक मंच भी बन गया। अंगिका में किया गया संवाद और लोगों से लिया गया सीधा फीडबैक इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता बनकर उभरा।
सरकार का कहना है कि आने वाले समय में भी सहयोग कार्यक्रम की नियमित समीक्षा जारी रहेगी और लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा। उद्देश्य यही है कि राज्य का प्रत्येक नागरिक बिना किसी बाधा के सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सके तथा शिकायतों का त्वरित और पारदर्शी समाधान सुनिश्चित हो सके।


