
गया। राष्ट्रीय राजमार्ग-82 (NH-82) परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के बदले मुआवजे में अनावश्यक देरी और फाइल लटकाने की शिकायत पर गया जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने शुक्रवार को बड़ा कदम उठाया। डीएम ने खुद भू-अर्जन कार्यालय पहुंचकर जांच की और लापरवाही पाए जाने पर लिपिक राजेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
एक घंटे तक खड़े रहकर की फाइल की जांच
शिकायतकर्ता बालमुकुंद सिंह, जो वजीरगंज प्रखंड के ऐरू गांव निवासी हैं, ने डीएम को बताया कि उन्होंने 29 मार्च 2025 को जमीन अधिग्रहण से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए थे, लेकिन महीनों बीतने के बावजूद मुआवजे की राशि अब तक नहीं मिली।
डीएम ने बिना सूचना दिए खुद कार्यालय जाकर संचिका की जांच की। तकरीबन एक घंटे तक वे वहां खड़े रहे और सारे कागजातों की बारीकी से जांच की।
‘सारी फाइलें पूरी होने के बावजूद भुगतान क्यों नहीं हुआ?’
जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि मुआवजे के लिए आवश्यक सभी दस्तावेज पहले ही समय पर जमा कर दिए गए थे, बावजूद इसके भुगतान नहीं किया गया। डीएम ने जब लिपिक राजेश कुमार से जवाब मांगा तो वह संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके।
कानूनगो की भूमिका भी संदिग्ध, रिपोर्ट में दिया झूठा विवरण
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कानूनगो धीरेंद्र कुमार ने अपनी रिपोर्ट में बिना संचिका देखे यह लिखा कि ‘खतियानी जमीन से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं’, जबकि संचिका में सारे दस्तावेज स्पष्ट रूप से मौजूद थे। डीएम ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई और पूरे मामले की जांच के लिए एक टीम गठित कर दी।
डीएम की कार्रवाई से विभाग में हड़कंप
डीएम शुभंकर ने भू-अर्जन विभाग में अनुशासन की सख्त जरूरत जताते हुए भू-अर्जन पदाधिकारी से भी स्पष्टीकरण मांगा है कि आखिर मुआवजे का भुगतान इतने समय तक लंबित क्यों रखा गया। इस कार्रवाई के बाद पूरे भू-अर्जन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और अन्य लंबित मामलों की भी समीक्षा शुरू हो गई है।
गया में डीएम द्वारा की गई यह कार्रवाई प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक मजबूत संकेत के रूप में देखी जा रही है।


