
सरकार बाजार मूल्य के करीब लाना चाहती है जमीन की सरकारी दर; नई व्यवस्था लागू होने पर राज्य के राजस्व में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद
पटना: बिहार में जमीन की खरीद-फरोख्त को अधिक पारदर्शी बनाने और राजस्व चोरी पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार सर्किल रेट में बड़ी बढ़ोतरी की तैयारी कर रही है। मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने इस संबंध में कैबिनेट नोट लगभग तैयार कर लिया है। प्रस्ताव के मुताबिक राज्य के कई शहरों में जमीन का सर्किल रेट 80 प्रतिशत से लेकर 400 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार लंबे समय से यह शिकायत मिल रही थी कि जमीन की वास्तविक बाजार कीमत और सरकारी सर्किल रेट के बीच काफी बड़ा अंतर है। इसी वजह से कई मामलों में जमीन का सौदा अधिक कीमत पर होने के बावजूद रजिस्ट्री कम दर पर कराई जाती है, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता है। अब सरकार सर्किल रेट को बाजार दर के करीब लाकर इस अंतर को कम करना चाहती है।
अप्रैल में कैबिनेट की मंजूरी की संभावना
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक सर्किल रेट संशोधन का प्रस्ताव पहले ही तैयार कर लिया गया था, लेकिन हालिया राजनीतिक परिस्थितियों के कारण इसे कैबिनेट में पेश नहीं किया जा सका। अब उम्मीद जताई जा रही है कि अप्रैल महीने में होने वाली कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी के लिए रखा जाएगा। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो नई दरें राज्यभर में लागू की जा सकती हैं।
इलाकों के अनुसार अलग-अलग बढ़ोतरी का प्रस्ताव
सरकार का प्रस्ताव है कि जहां बाजार मूल्य और सर्किल रेट के बीच अंतर कम है, वहां करीब 50 से 80 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जाएगी। वहीं जिन इलाकों में बाजार दर काफी अधिक है, वहां सरकारी दरों में 200 से 400 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव है। इससे जमीन की रजिस्ट्री वास्तविक कीमत के अधिक करीब हो सकेगी।
राज्य को होगा बड़ा आर्थिक फायदा
निबंधन विभाग के अनुमान के अनुसार सर्किल रेट में संशोधन लागू होने के बाद राज्य सरकार के राजस्व में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल जमीन की रजिस्ट्री से राज्य को हर साल करीब 7,600 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है। नई दरें लागू होने के बाद यह राशि बढ़कर लगभग 16,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
प्रमुख शहरों में कराया गया सर्वे
सरकार ने पटना, मुजफ्फरपुर, गया, दरभंगा, पूर्णिया और सारण समेत सभी प्रमंडल मुख्यालयों और 24 से अधिक जिला मुख्यालयों में जमीन की वास्तविक कीमत का विस्तृत सर्वे कराया है। सर्वे रिपोर्ट में सामने आया कि कई प्रमुख बाजारों, पॉश कॉलोनियों और मुख्य सड़कों के किनारे स्थित जमीन की कीमत और सरकारी सर्किल रेट में काफी बड़ा अंतर है।
उदाहरण के तौर पर पटना के बोरिंग कैनाल रोड जैसे इलाके में सरकारी सर्किल रेट लगभग 30 लाख रुपये प्रति डिसिमल है, जबकि वास्तविक बाजार में जमीन की कीमत इससे कई गुना अधिक पर तय हो रही है। ऐसी ही स्थिति कई अन्य शहरों और जिलों में भी देखने को मिली है।
कई चरणों से गुजरती है सर्किल रेट तय करने की प्रक्रिया
सर्किल रेट में बदलाव की प्रक्रिया कई प्रशासनिक चरणों से होकर गुजरती है। सबसे पहले जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक कर जमीन के बाजार मूल्य का आकलन किया जाता है। इसके बाद जिला मूल्यांकन समिति नई दरों का प्रस्ताव तैयार करती है और आम लोगों से आपत्तियां व सुझाव मांगे जाते हैं। अंतिम प्रस्ताव को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को भेजा जाता है, जहां समीक्षा के बाद कैबिनेट नोट तैयार कर सरकार की मंजूरी के लिए पेश किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सर्किल रेट को बाजार दर के करीब लाया जाता है तो जमीन के सौदों में पारदर्शिता बढ़ेगी और राज्य सरकार के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।


