सरकारी स्कूलों के बच्चे सीखेंगे सड़क सुरक्षा के मूल मंत्र

पटना, 11 जुलाई 2025:राज्य के सरकारी स्कूलों में अब विद्यार्थियों को कक्षाओं के साथ-साथ सड़क सुरक्षा के नियमों की भी जानकारी दी जाएगी। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) को इस बाबत स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें चेतना सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को ट्रैफिक नियमों और रोड सेफ्टी से संबंधित मूलभूत बातें सिखाने को कहा गया है।

चेतना सत्र में शामिल होंगे सड़क सुरक्षा के टिप्स

यह निर्णय विशेष रूप से उन स्कूलों के लिए महत्त्वपूर्ण है, जो राष्ट्रीय राजमार्गों और मुख्य सड़कों के निकट स्थित हैं। छात्रों को सड़क पार करने, संकेत चिन्हों की पहचान, यातायात लाइटों की समझ और हेलमेट/सीटबेल्ट की आवश्यकता जैसे विषयों पर जानकारी दी जाएगी। साथ ही संबंधित विभागों — जैसे परिवहन, पुलिस और एनजीओ — के साथ समन्वय स्थापित कर बच्चों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिलाया जाएगा।


फीडबैक के जरिए होगी जानकारी की समीक्षा

इस कार्यक्रम के तहत बच्चों से समय-समय पर जानकारी लेकर यह परखा जाएगा कि उन्हें सड़क सुरक्षा से संबंधित कितनी समझ विकसित हुई है। इससे जागरूकता के स्तर का मूल्यांकन करने में मदद मिलेगी और सुधार की दिशा में जरूरी बदलाव किए जा सकेंगे।


फैसले की पृष्ठभूमि — पटना में हुआ था पायलट सर्वे

इस निर्णय की पृष्ठभूमि में वर्ष 2024 में पटना के 10 स्कूलों में कराया गया एक पायलट सर्वेक्षण है। यह सर्वे इंटरनेशनल रोड फेडरेशन, इंडिया चैप्टर द्वारा जुलाई-अगस्त 2024 में किया गया था। सर्वेक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि स्कूली बच्चों को सड़क सुरक्षा के न्यूनतम नियमों की जानकारी भी नहीं है।
इसी तरह का सर्वे असम, कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के 10-10 माध्यमिक विद्यालयों में भी किया गया था।


रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

अध्ययन में भारत में सड़क दुर्घटनाओं की भयावह स्थिति को रेखांकित किया गया।

  • भारत में प्रतिवर्ष 1.5 लाख से अधिक लोगों की मौत सड़क हादसों में होती है।
  • वैश्विक आंकड़ों में भारत में सड़क दुर्घटनाओं की हिस्सेदारी 22% है, जबकि दुनिया के कुल वाहनों का मात्र 1% भारत में है।
  • देश में हर दिन औसतन 1130 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें 422 लोगों की मौत होती है।
  • सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि हर 45 मिनट में 31 बच्चों की मृत्यु सड़क हादसों में हो जाती है। इनमें 0-14 वर्ष के 38% और 14-18 वर्ष के 64% बच्चे शामिल हैं।

सड़क सुरक्षा को लेकर व्यापक पहल

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इन चिंताजनक आंकड़ों के मद्देनज़र एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति शुरू की है, जिसके तहत विद्यालयों को रोड सेफ्टी एजुकेशन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया जा रहा है। बिहार का यह प्रयास उसी दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।


 

  • ये भी पढ़े..

    राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड सरकारी आवास खाली करने का अंतिम नोटिस, 7 दिन की डेडलाइन तय

    Share Add as a preferred…

    NEET सॉल्वर गैंग का PMCH कनेक्शन फिर उजागर, मेडिकल छात्रों पर सवाल

    Share Add as a preferred…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *