पटना, 21 सितंबर।बिहार सरकार ने ग्रामीण इलाकों को शहरों से जोड़ने और आवागमन को आसान बनाने के लिए बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी “मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना” के तहत मौजूदा वित्तीय वर्ष 2025-26 में 703 नए पुलों का निर्माण शुरू हो गया है। इस पर कुल 3,688 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
क्या है योजना का मकसद?
ग्रामीण इलाकों में आज भी बरसात, बाढ़ और जर्जर पुलों के कारण सड़क संपर्क टूट जाता है। इस योजना के तहत —
- पुराने और जर्जर पुलों को हटाकर नए और मजबूत पुल बनाए जाएंगे।
- जहां मिसिंग ब्रिज के कारण सड़क अधूरी है, वहां नए पुल खड़े होंगे।
- बाढ़ और प्राकृतिक आपदा से क्षतिग्रस्त पुलों का भी पुनर्निर्माण किया जाएगा।
- जहां पुल बने हैं लेकिन एप्रोच रोड नहीं, वहां अधूरा काम पूरा होगा।
किन जिलों में बनेंगे सबसे ज्यादा पुल?
योजना के तहत उत्तर और दक्षिण बिहार दोनों को शामिल किया गया है। सबसे अधिक पुल पूर्वी चंपारण (56) में बनेंगे। वहीं दरभंगा में 38, गया, सिवान और सीतामढ़ी में 30-30, सारण और वैशाली में 28-28, भागलपुर और गोपालगंज में 27-27, रोहतास और शेखपुरा में 26-26, नालंदा में 24, बेगूसराय में 20 और राजधानी पटना में 18 पुलों का निर्माण कराया जाएगा।
जनता की मांग को मिली प्राथमिकता
सरकार का कहना है कि यह योजना सिर्फ विभागीय पहल नहीं है, बल्कि इसमें जनता की मांग को प्राथमिकता दी गई है। “जनता के दरबार में मुख्यमंत्री” कार्यक्रम और मुख्यमंत्री की सार्वजनिक घोषणाओं के आधार पर पुलों का चयन किया गया है।
कैसे बदलेंगे हालात?
सरकार के मुताबिक, यह योजना गांवों की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर बदल देगी।
- किसानों को फसल मंडी तक पहुंचाने में आसानी होगी।
- बच्चों को स्कूल जाने के लिए सुरक्षित रास्ता मिलेगा।
- आपात स्थिति में मरीजों को शहर के अस्पताल तक ले जाना आसान होगा।


