मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बाढ़ पीड़ित परिवारों को डीबीटी के माध्यम से 456 करोड़ 12 लाख रुपये की राहत राशि वितरित की

पटना, 20 अगस्त 2025 : मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने बुधवार को 1 अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प’ से वर्ष 2025 में बाढ़ से प्रभावित परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer – DBT) प्रणाली के तहत आनुग्रहिक राहत (Gratuitous Relief) की राशि प्रदान करने की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने माउस क्लिक कर 12 जिलों के 6 लाख 51 हजार 602 बाढ़ प्रभावित परिवारों को 7000 रुपये प्रति परिवार की दर से कुल 456 करोड़ 12 लाख रुपये की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की।

38 लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित
विकास आयुक्त सह आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत ने जानकारी दी कि अगस्त माह में गंगा नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर एवं कटिहार जिले बाढ़ की चपेट में आ गए। वहीं, नालन्दा जिले के कुछ प्रखंडों और पंचायतों में भी बाढ़ की स्थिति बनी।
कुल मिलाकर 12 जिलों के 66 प्रखंडों की लगभग 38 लाख की आबादी प्रभावित हुई है।

राहत और बचाव कार्य
बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए अब तक 2.19 लाख पॉलीथीन शीट और 57,639 ड्राई राशन पैकेट वितरित किए गए हैं। 14 राहत शिविरों में लगभग 15 हजार लोग रह रहे हैं, जबकि सामुदायिक रसोई केंद्रों के माध्यम से अब तक लगभग 85 लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराया गया है। साथ ही, मानव और पशु चिकित्सा की व्यवस्था भी शिविरों में की गई है।

मुख्यमंत्री का संदेश
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने 13 अगस्त को संबंधित जिलों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी और 14 अगस्त को स्वयं पटना, वैशाली, बेगूसराय और मुंगेर जिलों के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया था। उन्होंने कहा—
“हमने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया था कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाया जाए और 20 अगस्त तक आनुग्रहिक राहत राशि का भुगतान शुरू कर दिया जाए। मुझे खुशी है कि आज हम यह वादा पूरा कर रहे हैं।”

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आगाह करते हुए कहा कि बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। सितंबर माह में भी भारी वर्षा और नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन को पूरी सतर्कता बरतने और पीड़ित परिवारों की संवेदनशीलता के साथ मदद करने की आवश्यकता है। उन्होंने दोहराया—
“राज्य के खजाने पर आपदा पीड़ितों का पहला अधिकार है।”

कार्यक्रम में शामिल अधिकारी
इस अवसर पर आपदा प्रबंधन मंत्री श्री विजय कुमार मंडल, मुख्य सचिव श्री अमृत लाल मीणा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, विकास आयुक्त सह आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ, जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव श्री संतोष कुमार मल्ल, कृषि विभाग के प्रधान सचिव श्री पंकज कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार, श्री कुमार रवि, विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह तथा आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह सहित अन्य वरीय अधिकारी मौजूद थे।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रभावित जिलों के जिलाधिकारी भी कार्यक्रम से जुड़े।


 

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