
झारखंड के चतरा जिले में मंगलवार को हुई एक सनसनीखेज हत्या की घटना ने बिहार और झारखंड, दोनों राज्यों की पुलिस व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। चतरा एसपी आवास के बाहर एक निजी सुरक्षा गार्ड ने अपने ही साथी गार्ड की गोली मारकर हत्या कर दी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, विवाद की शुरुआत खैनी मांगने को लेकर हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी गार्ड को गिरफ्तार कर लिया, जबकि मामले की जांच के दौरान बेलागंज की जेडीयू विधायक मनोरमा देवी के बेटे रॉकी यादव, उनके ड्राइवर और उनके साथ मौजूद एक सरकारी बॉडीगार्ड को भी हिरासत में लिया गया है।
घटना के बाद से ही पुलिस पूरे मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है। खासतौर पर यह सवाल जांच के केंद्र में है कि रॉकी यादव के साथ सरकारी बॉडीगार्ड किस आधार पर मौजूद था और क्या वह सुरक्षा कर्मी आधिकारिक रूप से उनके लिए नियुक्त किया गया था या नहीं।
खैनी मांगने के विवाद में हुई हत्या
जानकारी के अनुसार, मंगलवार दोपहर करीब दो बजे चतरा एसपी आवास के बाहर यह घटना हुई। बताया जा रहा है कि रमिया कंस्ट्रक्शन कंपनी के लिए काम करने वाले दो निजी सुरक्षा गार्डों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि गाजियाबाद निवासी सुरक्षा गार्ड बलवीर सिंह ने अपने साथी और बक्सर निवासी अतुल सिंह के सिर में गोली मार दी।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी बलवीर सिंह ने बताया कि अतुल सिंह उससे बार-बार खैनी मांग रहा था और कथित तौर पर उसे परेशान तथा चिढ़ा रहा था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया और गुस्से में आकर बलवीर ने कथित तौर पर गोली चला दी।
गोली चलने के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। आरोपी मौके से पैदल भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पुलिस ने उसे परिसदन भवन के पास पकड़ लिया। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ शुरू कर दी है।
रॉकी यादव भी पुलिस हिरासत में
यह घटना रमिया कंस्ट्रक्शन कंपनी के कर्मचारियों के बीच हुई, जिसके मालिक रॉकी यादव बताए जाते हैं। घटना के समय रॉकी यादव चतरा के एसपी अनिमेष नैथानी से मुलाकात कर रहे थे। हत्या की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी।
पुलिस ने रॉकी यादव, उनके ड्राइवर और उनके साथ मौजूद सरकारी बॉडीगार्ड सत्येंद्र कुमार को हिरासत में लिया। घटनास्थल से कंपनी की एक फोर्ड एंडेवर गाड़ी भी जब्त की गई है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार रॉकी यादव पर इस हत्या को अंजाम देने का आरोप नहीं है। उन्हें हिरासत में लिए जाने का मुख्य कारण घटना की परिस्थितियों और उनके साथ मौजूद लोगों की भूमिका से जुड़ी पुलिस जांच बताया जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के समय कौन-कौन लोग वहां मौजूद थे और सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
सरकारी बॉडीगार्ड को लेकर उठे सवाल
मामले में सबसे ज्यादा चर्चा सरकारी बॉडीगार्ड की मौजूदगी को लेकर हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, रॉकी यादव के साथ मौजूद सरकारी सुरक्षा कर्मी सत्येंद्र कुमार गया पुलिस से संबंधित हैं।
गया पुलिस के अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच के बाद कथित तौर पर कहा है कि रॉकी यादव के नाम पर कोई सरकारी बॉडीगार्ड आवंटित नहीं है। वहीं, उनकी मां और बेलागंज विधायक मनोरमा देवी के नाम पर चार सरकारी बॉडीगार्ड उपलब्ध कराए गए हैं।
पुलिस का आरोप है कि विधायक के लिए आवंटित सुरक्षा कर्मियों में से एक का इस्तेमाल रॉकी यादव द्वारा किया जा रहा था। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है, तो यह सरकारी सुरक्षा व्यवस्था के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है।
गया के एसएसपी सुशील कुमार और पुलिस लाइन डीएसपी ललित मोहन सिंह ने इस मामले में दस्तावेजों की जांच की है। रिपोर्ट के अनुसार, गया पुलिस ने चतरा पुलिस से भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। संबंधित सरकारी सुरक्षा कर्मी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और निलंबन की संभावना भी जताई गई है।
आरोपी गार्ड की मानसिक स्थिति की भी जांच
हत्या के आरोपी बलवीर सिंह को लेकर पुलिस ने उसकी मानसिक स्थिति की भी जांच शुरू कर दी है। चतरा के डीएसपी सुनील कुमार सिंह के अनुसार, आरोपी मानसिक रूप से परेशान बताया जा रहा है।
पुलिस को उसके पास से रिनपास से संबंधित दवा का पुर्जा भी मिला है। इससे पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी का पहले से किसी प्रकार का मानसिक उपचार चल रहा था।
जांच में यह बात भी सामने आने की बात कही गई है कि आरोपी पहले नबीनगर में भी फायरिंग की एक घटना में शामिल रहा था। पुलिस अब उसके पुराने रिकॉर्ड और आपराधिक गतिविधियों की भी जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी का व्यवहार कथित तौर पर सनकी किस्म का था और वह छोटी-छोटी बातों पर लोगों से विवाद करता था।
चतरा में 128 करोड़ की सड़क परियोजना
इस घटना का संबंध जिस कंपनी से बताया जा रहा है, वह चतरा में एक बड़ी सड़क निर्माण परियोजना पर काम कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, रमिया कंस्ट्रक्शन कंपनी करीब 128 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 25 किलोमीटर लंबे बाइपास सड़क का निर्माण कर रही है।
इसी परियोजना को लेकर रॉकी यादव की ओर से गया के रामपुर थाने में लेवी मांगने और निर्माण कार्य बंद कराने की धमकी मिलने की शिकायत भी दर्ज कराई गई है। प्राथमिकी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से कथित तौर पर व्हाट्सऐप कॉल और पत्र के माध्यम से पांच प्रतिशत लेवी की मांग की जा रही थी।
पुलिस ने इस मामले में भी प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, लेवी की धमकी और चतरा में हुई गार्ड की हत्या के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
रॉकी यादव का विवादों से पुराना संबंध
रॉकी यादव का नाम इससे पहले भी कई चर्चित मामलों में सामने आ चुका है। वह गया के पूर्व जिला पर्षद अध्यक्ष बिंदी यादव के बेटे हैं और उनकी मां मनोरमा देवी वर्तमान में बेलागंज से विधायक हैं।
साल 2016 में गया का आदित्य सचदेवा रोडरेज हत्याकांड देशभर में चर्चा में रहा था। इस मामले में रॉकी यादव को निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, वर्ष 2023 में पटना हाईकोर्ट ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए इस मामले में बरी कर दिया।
इसके बाद भी उनका नाम विभिन्न विवादों में सामने आता रहा है। अब चतरा में हुई इस घटना और सरकारी बॉडीगार्ड की कथित अनधिकृत मौजूदगी ने एक बार फिर उन्हें सुर्खियों में ला दिया है।
पुलिस जांच से सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल चतरा पुलिस इस पूरे मामले की जांच कई स्तरों पर कर रही है। एक तरफ निजी गार्ड द्वारा की गई हत्या की जांच हो रही है, तो दूसरी तरफ रॉकी यादव और उनके साथ मौजूद लोगों की भूमिका तथा सरकारी बॉडीगार्ड की तैनाती की वैधता की भी जांच की जा रही है।
सबसे अहम सवाल यह है कि सरकारी सुरक्षा कर्मी किसके आदेश पर रॉकी यादव के साथ मौजूद था और क्या विधायक को आवंटित सुरक्षा कर्मी का किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके अलावा पुलिस आरोपी गार्ड के पुराने रिकॉर्ड, उसकी मानसिक स्थिति और पूर्व की फायरिंग की घटनाओं की भी जांच कर रही है।
इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर होगी। फिलहाल हत्या के आरोपी गार्ड की गिरफ्तारी और रॉकी यादव समेत अन्य लोगों की हिरासत ने इस घटना को और अधिक गंभीर बना दिया है। आने वाले दिनों में पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि हत्या की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं, सरकारी बॉडीगार्ड वहां किस आधार पर मौजूद था और क्या इस मामले में सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर किसी अन्य व्यक्ति की जिम्मेदारी तय होती है


