​पूर्वी चंपारण में डकैतों का तांडव: व्यवसायी दंपती को बंधक बनाकर 25 लाख की बड़ी लूट

चिरैया (पूर्वी चंपारण)। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए बेखौफ अपराधियों ने एक बार फिर बड़ी वारदात को अंजाम दिया है। चिरैया थाना क्षेत्र के दीपही गांव में सोमवार की देर रात हथियारबंद नकाबपोश डकैतों ने एक प्रतिष्ठित व्यवसायी के घर पर धावा बोलकर पूरे इलाके में दहशत फैला दी। करीब एक दर्जन की संख्या में आए अपराधियों ने न केवल घर के सदस्यों को हथियारों के बल पर डराया, बल्कि गृहस्वामी और उनकी पत्नी को बंधक बनाकर घंटों तक तांडव मचाया। इस भीषण डकैती के दौरान अपराधियों ने घर में रखे कीमती स्वर्णाभूषण और भारी मात्रा में नकदी समेत करीब 25 लाख रुपये की संपत्ति पर हाथ साफ कर दिया। जाते-जाते डकैतों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए दंपती के हाथ-पांव बेडशीट से बांध दिए और उन्हें अलग-अलग कमरों में बंद कर फरार हो गए। मंगलवार सुबह जब पड़ोसियों को इस घटना की भनक लगी, तब जाकर पुलिस को सूचना दी गई। इस सनसनीखेज वारदात के बाद से ही पूरे गांव में सन्नाटा पसरा है और स्थानीय लोगों में पुलिस की कार्यशैली को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

आधी रात को मौत का साया: डकैतों की सुनियोजित एंट्री

​सोमवार की वह रात दीपही गांव के इस व्यवसायी परिवार के लिए किसी डरावने सपने जैसी साबित हुई। जानकारी के अनुसार, सोमवार देर रात जब पूरा गांव गहरी नींद में सोया था, तभी करीब 10 से 12 की संख्या में नकाबपोश अपराधी घर के पिछले हिस्से से दीवार फांदकर भीतर दाखिल हुए। डकैतों के पास अत्याधुनिक पिस्तौल और कट्टे थे, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि वे पूरी तैयारी के साथ आए थे। घर में घुसते ही अपराधियों ने सबसे पहले बिजली के कनेक्शन को काट दिया ताकि अंधेरे का फायदा उठाया जा सके और कोई भी बाहरी व्यक्ति हलचल न देख पाए।

​गृहस्वामी और उनकी पत्नी उस वक्त अपने कमरे में सो रहे थे। डकैतों ने कमरे का दरवाजा तोड़कर भीतर प्रवेश किया और इससे पहले कि दंपती शोर मचा पाते, उनकी कनपटी पर पिस्तौल सटा दी गई। अपराधियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी देते हुए शोर न मचाने की चेतावनी दी। व्यवसायी और उनकी पत्नी अपनी जान की भीख मांगते रहे, लेकिन अपराधियों के सिर पर खून सवार था। डकैतों ने घर के हर कोने को खंगालना शुरू कर दिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उन्हें घर की भौगोलिक स्थिति और कीमती सामानों के रखे होने की जगह की पहले से थोड़ी-बहुत जानकारी थी।

25 लाख की लूट: अलमारियों में रखा सोना और नकदी साफ

​बंधक बनाए गए दंपती की आंखों के सामने ही डकैतों ने लूटपाट का नंगा नाच शुरू किया। अपराधियों ने घर में मौजूद सभी अलमारियों, संदूक और लॉकरों के ताले लोहे की रॉड से तोड़ दिए। डकैतों ने विशेष रूप से स्वर्णाभूषणों को निशाना बनाया। परिजनों के मुताबिक, घर में कई वर्षों से जमा किए गए पुश्तैनी जेवरात और कुछ नई खरीदारी के आभूषण रखे थे, जिन्हें डकैतों ने एक बैग में भर लिया। इसके अलावा, व्यवसाय के सिलसिले में रखी गई भारी नकदी को भी अपराधियों ने समेट लिया।

​शुरुआती आकलन के अनुसार, लूटे गए सोने और चांदी के गहनों की कीमत और नकद राशि मिलाकर कुल नुकसान 25 लाख रुपये के आसपास बताया जा रहा है। डकैतों ने घर के कीमती कपड़े और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों को भी नहीं छोड़ा। करीब दो घंटे तक चले इस लूटपाट के दौरान अपराधी लगातार दंपती को डराते रहे ताकि वे किसी भी प्रकार का प्रतिरोध न कर सकें। अपराधियों की बातचीत की शैली से स्थानीय लोगों को संदेह है कि इस गिरोह में कुछ स्थानीय अपराधी भी शामिल हो सकते हैं जो व्यवसायी की आर्थिक स्थिति से वाकिफ थे।

क्रूरता की इंतहा: बेडशीट से बांधकर अलग-अलग कमरों में किया बंद

​लूटपाट की वारदात को अंजाम देने के बाद डकैतों ने यह सुनिश्चित किया कि उन्हें भागने के लिए पर्याप्त समय मिल सके और कोई तुरंत पीछा न कर पाए। अपराधियों ने घर में रखी बेडशीट (चादर) को फाड़कर उसके टुकड़े किए और व्यवसायी के साथ-साथ उनकी पत्नी के हाथ और पैर बेरहमी से बांध दिए। इसके बाद अपराधियों ने दंपती को अलग-अलग कमरों में ले जाकर फर्श पर पटक दिया और बाहर से कमरों की कुंडी लगा दी।

​दंपती पूरी रात कराहते रहे और खुद को मुक्त करने की कोशिश करते रहे, लेकिन मजबूती से बंधे होने के कारण वे सफल नहीं हो सके। डकैतों के जाने के बाद घर में पसरी खामोशी और भी डरावनी थी। मंगलवार की सुबह जब घर का कोई भी दरवाजा नहीं खुला और बाहर से कोई हलचल नहीं हुई, तो आसपास के लोगों को संदेह हुआ। ग्रामीणों ने जब खिड़की से झाँका तो व्यवसायी को बंधा हुआ पाया, जिसके बाद शोर मचाकर अन्य लोगों को इकट्ठा किया गया और पुलिस को सूचना दी गई।

पुलिस की तफ्तीश और स्थानीय लोगों का गुस्सा

​सूचना मिलते ही चिरैया थाना पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुँची और बंधक बने दंपती को मुक्त कराया। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और वहां से अपराधियों द्वारा छोड़े गए कुछ साक्ष्य जुटाने की कोशिश की। एफएसएल (FSL) और डॉग स्क्वायड की टीम को भी बुलाने की तैयारी की जा रही है ताकि अपराधियों के भागने के रास्ते और उनकी पहचान का सुराग मिल सके। हालांकि, ग्रामीण इस बात से नाराज हैं कि पुलिस की गश्ती रात में न के बराबर रहती है, जिसके कारण अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि वे घर में घुसकर डकैती कर रहे हैं।

​चिरैया थाना अध्यक्ष ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं। पुलिस उन पुराने अपराधियों की सूची भी खंगाल रही है जो हाल ही में जेल से बाहर आए हैं। इसके अलावा, गांव की ओर आने वाले रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को भी खंगाला जा रहा है। पुलिस का दावा है कि डकैतों ने जिस तरह से इस घटना को अंजाम दिया है, उससे किसी पेशेवर गिरोह के शामिल होने की पूरी संभावना है।

व्यवसायी वर्ग में असुरक्षा: बढ़ता जा रहा है खौफ

​पूर्वी चंपारण के इस सीमावर्ती इलाके में हाल के दिनों में लूट और डकैती की घटनाओं में वृद्धि हुई है। विशेषकर व्यापारियों और व्यवसायियों को सॉफ्ट टारगेट बनाया जा रहा है। दीपही गांव की इस घटना ने व्यापारियों के भीतर असुरक्षा की भावना को और गहरा कर दिया है। स्थानीय व्यापार मंडल ने पुलिस प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही डकैतों की गिरफ्तारी नहीं हुई और लूटी गई संपत्ति बरामद नहीं की गई, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

​व्यापारियों का कहना है कि जब घर के भीतर ही लोग सुरक्षित नहीं हैं, तो वे अपना व्यवसाय कैसे चला पाएंगे। पुलिस द्वारा रात में गश्ती बढ़ाने और संदिग्धों पर कड़ी नजर रखने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। फिलहाल, पीड़ित व्यवसायी परिवार सदमे में है और उनकी पत्नी की हालत डर के कारण काफी खराब बताई जा रही है। जिला पुलिस कप्तान ने आश्वासन दिया है कि अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही इस कांड का उद्भेदन कर दिया जाएगा।

अपराध का नया पैटर्न और पुलिस की चुनौतियां

​डकैतों द्वारा जिस तरह से दंपती को अलग-अलग कमरों में बांधकर बंद किया गया, वह अपराधियों के एक नए और क्रूर पैटर्न की ओर इशारा करता है। यह केवल लूटपाट का मामला नहीं है, बल्कि पीड़ितों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की भी कोशिश है। पूर्वी चंपारण जैसे संवेदनशील जिले में, जहाँ नेपाल सीमा की निकटता भी एक कारक है, अपराधियों का इस तरह का दुस्साहस पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती है।

​जांच अधिकारियों का मानना है कि डकैतों ने भागने के लिए ग्रामीण रास्तों का इस्तेमाल किया होगा ताकि वे मुख्य सड़क पर लगे पुलिस चेकिंग पॉइंट से बच सकें। पुलिस अब मोबाइल टावर डंप डाटा के जरिए भी उस समय सक्रिय संदिग्ध मोबाइल नंबरों की पहचान करने की कोशिश कर रही है। दीपही गांव के लोग अब रात में पहरा देने की योजना बना रहे हैं, क्योंकि उन्हें पुलिसिया सुरक्षा पर अब भरोसा कम होता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि पुलिस इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करती है और पीड़ित परिवार को इंसाफ मिल पाता है या नहीं।

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