यूपी सीएम की मां पर अभद्र टिप्पणी का मामला: पूर्णिया से धरा गया ‘चतुर्वेदी’ मौलाना, यूपी के 84 थानों में दर्ज हैं मुकदमे

  • ​उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां के खिलाफ विवादित और अमर्यादित टिप्पणी करने वाले मौलाना अब्दुल्ला सालिम चतुर्वेदी कासमी को यूपी एसटीएफ ने बिहार के पूर्णिया से गिरफ्तार कर लिया है।
  • ​सोमवार को पूर्णिया जिले के अमौर थाना अंतर्गत दलमालपुर इलाके में छापेमारी कर एसटीएफ ने मौलाना को दबोचा, जिसके बाद उसे पूछताछ के लिए गोरखपुर ले जाया गया है।
  • ​आरोपी मौलाना मूल रूप से अररिया जिले के जोकीहाट का रहने वाला है और उस पर उत्तर प्रदेश के 84 से अधिक थानों में शिकायतें और कई जगह एफआईआर दर्ज हैं।
  • ​वेद और संस्कृत व्याकरण की पढ़ाई करने के कारण ‘चतुर्वेदी’ की उपाधि पाने वाला यह मौलाना बिहार की राजनीति में भी सक्रिय रहा है और हाल ही में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी से जुड़ा था।

पूर्णिया/अररिया (द वॉयस ऑफ बिहार)।

पूर्णिया के अमौर में यूपी एसटीएफ की सर्जिकल स्ट्राइक

बिहार के पूर्णिया जिले में सोमवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब उत्तर प्रदेश एसटीएफ (STF) की एक विशेष टीम ने अमौर थाना क्षेत्र के दलमालपुर में छापेमारी की। इस कार्रवाई का मुख्य लक्ष्य मौलाना अब्दुल्ला सालिम चतुर्वेदी कासमी था, जिस पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां के खिलाफ अत्यंत अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणी करने का संगीन आरोप है। एसटीएफ की टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से घेराबंदी की और मौलाना को उस वक्त गिरफ्तार कर लिया जब वह वहां छिपा हुआ था। गिरफ्तारी के तुरंत बाद सुरक्षा कारणों से उसे गुप्त स्थान पर ले जाया गया और फिर ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया पूरी कर उसे गोरखपुर ले जाया गया है, जहां वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उससे पूछताछ कर रहे हैं। इस गिरफ्तारी की पुष्टि अररिया के जोकीहाट थानेदार राजीव कुमार झा ने भी की है।

रमजान के महीने में वायरल हुआ था विवादित वीडियो

इस पूरे विवाद की जड़ में वह वीडियो है जो पिछले दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। सूत्रों के अनुसार, यह वीडियो रमजान के महीने में बिहार में आयोजित एक मजहबी तकरीर (भाषण) का है। इस तकरीर के दौरान मौलाना अब्दुल्ला सालिम चतुर्वेदी कासमी ने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां को लेकर बेहद निचले स्तर की टिप्पणी की थी। वीडियो सामने आते ही उत्तर प्रदेश में भारी जनाक्रोश फैल गया और हिंदूवादी संगठनों के साथ-साथ आम जनता ने भी इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में 84 से अधिक थानों में मौलाना के खिलाफ तहरीर दी गई और कई प्रमुख शहरों में संगीन धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए।

गोरखपुर में पूछताछ: साजिश या केवल विवादित बयान?

गिरफ्तारी के बाद मौलाना को गोरखपुर ले जाया गया है, जहां यूपी एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त टीम उससे पूछताछ कर रही है। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि मुख्यमंत्री के परिवार के खिलाफ ऐसा बयान देने के पीछे मौलाना का वास्तविक उद्देश्य क्या था? पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह बयान किसी गहरी राजनीतिक या सांप्रदायिक साजिश का हिस्सा था या फिर केवल चर्चा में आने के लिए दिया गया एक विवादित भाषण था। इसके अलावा, एसटीएफ मौलाना के बैंक खातों, उसके संपर्कों और हाल के महीनों में उसकी गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसे किसी बाहरी संगठन या व्यक्ति द्वारा उकसाया तो नहीं गया था।

कौन है अब्दुल्ला सालिम? दारुल उलूम से पढ़ाई और ‘चतुर्वेदी’ की उपाधि

मौलाना अब्दुल्ला सालिम चतुर्वेदी कासमी का व्यक्तित्व काफी विरोधाभासी रहा है। वह अररिया जिले के जोकीहाट थाना क्षेत्र के पथराबाड़ी गांव का रहने वाला है और उसके पिता मोहम्मद कमरुल होदा एक रिटायर्ड मदरसा शिक्षक हैं। अब्दुल्ला सालिम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद विश्व प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद से शिक्षा पूरी की, जहां से उसे ‘कासमी’ की उपाधि मिली। हालांकि, उसकी पहचान में सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि उसने न केवल इस्लामिक शिक्षा ली, बल्कि संस्कृत व्याकरण और चारों वेदों का भी गहन अध्ययन किया। वेदों के इसी ज्ञान के कारण उसे ‘चतुर्वेदी’ की उपाधि दी गई, जिसका उपयोग वह अपने नाम के साथ करता रहा है।

एआईएमआईएम से जन सुराज तक का राजनीतिक सफर

धार्मिक मंचों के साथ-साथ अब्दुल्ला सालिम बिहार की राजनीति में भी अपनी किस्मत आजमाता रहा है। वह काफी समय तक असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) से जुड़ा रहा और पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता के तौर पर जोकीहाट इलाके में काम किया। हालांकि, साल 2025 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान जब एआईएमआईएम ने उसे जोकीहाट सीट से टिकट देने से इनकार कर दिया, तो उसने पार्टी से बगावत कर दी और इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उसने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी का दामन थाम लिया और जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र से अपना नामांकन पत्र भी दाखिल किया था। हालांकि, तकनीकी कारणों से उसका नामांकन पत्र खारिज हो गया, जिससे उसकी चुनावी पारी पर फिलहाल विराम लग गया था।

अभद्र टिप्पणी ने बिगाड़ा सामाजिक माहौल, प्रशासन सख्त

मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की मां को राजनीति और विवादों में घसीटने को लेकर कानूनी जानकार भी मौलाना के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कह रहे हैं। पुलिस का मानना है कि इस तरह के बयानों से न केवल व्यक्तिगत मानहानि होती है, बल्कि समाज के दो समुदायों के बीच तनाव पैदा होने का भी खतरा रहता है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां के खिलाफ की गई इस अभद्र टिप्पणी को लेकर प्रशासन ने मौलाना के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट और रासुका (NSA) जैसी कठोर धाराओं के तहत कार्रवाई करने के संकेत भी दिए हैं।

गिरफ्तारी के बाद जोकीहाट और पूर्णिया में सुरक्षा अलर्ट

मौलाना की गिरफ्तारी के बाद सीमांचल के जिलों विशेषकर अररिया और पूर्णिया में पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। जोकीहाट के पथराबाड़ी गांव और पूर्णिया के दलमालपुर इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए गश्ती बढ़ा दी गई है। स्थानीय पुलिस का कहना है कि वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी तरह की अफवाह न फैले। वहीं, मौलाना के समर्थकों और परिवार का कहना है कि बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है, हालांकि वायरल वीडियो के साक्ष्य सीधे तौर पर मौलाना की संलिप्तता की ओर इशारा कर रहे हैं। अब सबकी नजरें गोरखपुर में चल रही पूछताछ और आगामी अदालती कार्रवाई पर टिकी हैं।

  • ये भी पढ़े..

    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर भागलपुर वन विभाग में योग शिविर, वनकर्मियों ने अपनाया स्वस्थ जीवन का संकल्प

    Share Add as a preferred…