नई दिल्ली, 17 जुलाई 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना’ को मंजूरी दे दी गई। यह योजना देशभर के 100 चयनित जिलों में कृषि उत्पादकता बढ़ाने, टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है।
करीब 24,000 करोड़ रुपये की लागत से लागू की जा रही इस योजना से लगभग 1.70 करोड़ किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। रेल, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि योजना चालू वित्तीय वर्ष से ही शुरू होगी और इसमें प्राथमिकता उन जिलों को दी जाएगी, जहां कृषि उत्पादन कम है और ऋण वितरण में पिछड़ापन है। हर राज्य से कम से कम एक जिले को योजना में शामिल किया जाएगा।
योजना के तहत 11 मंत्रालयों की 36 विभिन्न योजनाओं का समन्वय किया जाएगा ताकि एकीकृत रूप से किसानों को सहायता मिल सके।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस निर्णय को किसानों के जीवन में बदलाव की दिशा में एक बड़ा कदम बताते हुए कहा,
“’पीएम धन-धान्य’ योजना से कृषि क्षेत्र में पिछड़े जिलों में फसलों का उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी।”
स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम, एनटीपीसी और एनएलसी को निवेश की मंजूरी
कैबिनेट बैठक में अक्षय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने को लेकर भी बड़ा निर्णय लिया गया। एनटीपीसी लिमिटेड को 20,000 करोड़ रुपये और एनएलसी इंडिया लिमिटेड (एनएलसीआईएल) को 7,000 करोड़ रुपये तक के निवेश की अनुमति दी गई है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत ने अपने स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य को समय से पहले हासिल कर लिया है और देश की कुल विद्युत क्षमता का 50 प्रतिशत अब नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त हो रहा है। अब सरकार का नया लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना है।
एनटीपीसी का लक्ष्य है कि वर्ष 2032 तक वह अपनी कुल उत्पादन क्षमता में 60 गीगावाट अक्षय ऊर्जा जोड़े, जिसके लिए यह निवेश महत्वपूर्ण होगा।


