नई दिल्ली।केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 पेश करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने हमेशा अस्पष्टता की जगह काम, बातों की जगह सुधार और लोक-लुभावन नीतियों की जगह आम लोगों को प्राथमिकता दी है।
उन्होंने कहा कि सरकार तीन कर्तव्यों से प्रेरित होकर आगे बढ़ रही है।
पहला कर्तव्य— आर्थिक विकास को गति देना और उसे लगातार बनाए रखना, ताकि वैश्विक अस्थिरता के दौर में भी भारत मजबूत बना रहे। इसके साथ ही उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
MSME को बताया विकास का इंजन
वित्त मंत्री ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) को देश की अर्थव्यवस्था का मुख्य इंजन बताया। उनके लिए सरकार ने तीन सूत्रीय रणनीति पेश की है।
1. इक्विटी सपोर्ट: 10 हजार करोड़ का फंड
सरकार MSME को मजबूत करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का समर्पित इक्विटी फंड बनाएगी।
इसका उद्देश्य ऐसे उद्यमों को आगे बढ़ाना है जो भविष्य में बड़े और प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं।
इसके साथ ही आत्मनिर्भर भारत कोष में 2,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि देने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि सूक्ष्म उद्यमों को जोखिम पूंजी तक पहुंच मिल सके।
2. वित्तीय सहायता: 7 लाख करोड़ रुपये की व्यवस्था
MSME सेक्टर के लिए पहले से ही 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय व्यवस्था की गई है। इसका पूरा लाभ दिलाने के लिए सरकार चार बड़े कदम उठाएगी:
- सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को MSME से खरीदारी के लिए TReDS प्लेटफॉर्म अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करना होगा।
- TReDS पर बिल डिस्काउंटिंग के लिए CGTMSE के जरिए क्रेडिट गारंटी दी जाएगी।
- सरकारी ई-मार्केटप्लेस GeM को TReDS से जोड़ा जाएगा, ताकि फाइनेंसर्स को सरकारी खरीद की जानकारी मिल सके।
- TReDS पर बकाया भुगतान को एसेट-बैक्ड सिक्योरिटी के रूप में बदलकर दूसरा बाजार विकसित किया जाएगा।
3. बिजनेस सपोर्ट: टियर-2 और टियर-3 शहरों पर फोकस
वित्त मंत्री ने कहा कि छोटे शहरों में MSME को पेशेवर मदद की जरूरत है। इसके लिए
‘कॉर्पोरेट मित्र’ नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
सरकार आईसीएआई, आईसीएसआई और आईसीएमएआई जैसे संस्थानों के साथ मिलकर
- छोटे कोर्स
- प्रैक्टिकल टूल्स
डिजाइन करेगी, ताकि प्रमाणित अर्ध-पेशेवर कम लागत पर MSME को कानूनी और अनुपालन सेवाएं दे सकें।
सरकार का संदेश
निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल नीतियां बनाना नहीं, बल्कि उन्हें ज़मीन पर उतारना है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बने और छोटे कारोबारियों को भी आगे बढ़ने का मौका मिले।


