नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट 2026-27 में परिवहन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बड़ा प्रोत्साहन देते हुए पूर्व में डांकुनी और पश्चिम में सूरत को जोड़ने वाले नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की घोषणा की है। यह परियोजना पर्यावरण के अनुकूल माल परिवहन को बढ़ावा देने और लॉजिस्टिक लागत घटाने के उद्देश्य से लाई गई है।
सरकार ने अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग चालू करने की योजना भी पेश की है। इसके अलावा पटना और वाराणसी में जहाज मरम्मत सुविधा केंद्र विकसित करने का ऐलान किया गया है, जिससे गंगा जलमार्ग पर परिवहन गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।
पांच वर्षों में 20 नए जलमार्ग
बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि देश में जल परिवहन की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए अगले पांच साल में 20 नए वॉटरवे शुरू किए जाएंगे। इससे सड़क और रेल पर बढ़ते दबाव को कम करने के साथ-साथ सस्ता और स्वच्छ परिवहन माध्यम विकसित होगा।
पटना–वाराणसी क्षेत्र में जहाज मरम्मत सुविधा शुरू होने से पूर्वी भारत में इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट को नई गति मिलेगी।
डांकुनी से सूरत तक तेज होगी माल ढुलाई
नए फ्रेट कॉरिडोर के माध्यम से डांकुनी से सूरत तक माल की आवाजाही अधिक तेज, सस्ती और सुगम होगी।
- डांकुनी पूर्वी भारत का बड़ा लॉजिस्टिक्स हब बनेगा
- सूरत टेक्सटाइल और डायमंड इंडस्ट्री का प्रमुख केंद्र है
- दोनों छोरों के जुड़ने से औद्योगिक सप्लाई चेन मजबूत होगी
- परिवहन लागत में कमी आएगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा
ओडिशा से होगी जलमार्ग योजना की शुरुआत
20 नए जलमार्गों की योजना की शुरुआत ओडिशा से की जाएगी, जहां 5 नेशनल वॉटरवे विकसित होंगे।
इनके जरिए—
- तालचेर और अंगुल के खनिज समृद्ध क्षेत्रों
- कलिंगनगर जैसे औद्योगिक केंद्रों
- पारादीप और धमरा बंदरगाहों
को आपस में जोड़ा जाएगा। इससे कोयला, स्टील और अन्य औद्योगिक उत्पादों की ढुलाई अधिक किफायती होगी।
क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रेट कॉरिडोर और जलमार्गों के विस्तार से—
- लॉजिस्टिक खर्च घटेगा
- कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी
- पूर्वी और पश्चिमी भारत के औद्योगिक केंद्र सीधे जुड़ेंगे
- रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे
सरकार की यह पहल भारत को मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।


