पटना, 24 जुलाई।राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी को मजबूती देने और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पुल निर्माण कार्य को नई रफ्तार मिली है। ग्रामीण कार्य विभाग के अनुसार, अब तक कुल 4,415 पुलों के निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें से 3,482 पुलों के लिए अनुबंध प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जो कार्यान्वयन में विभाग की सक्रियता को दर्शाता है।
अब तक 2,551 पुलों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, जिससे हजारों ग्रामीणों को हर मौसम में निर्बाध आवागमन की सुविधा उपलब्ध हुई है। शेष 931 पुलों पर निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है और इनके समयबद्ध निष्पादन के लिए विभाग सतत निगरानी कर रहा है।
पीएमजीएसवाई के तहत सर्वाधिक पुलों का निर्माण
बिहार में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGAY) के अंतर्गत 2,017 पुलों को स्वीकृति दी गई है। इनमें से 1,954 पुलों के लिए एग्रीमेंट हो चुका है, जबकि 1,512 पुलों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष 442 पुलों पर कार्य जारी है।
मुख्यमंत्री योजनाओं में भी उल्लेखनीय प्रगति
- मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना (MMGSY) के अंतर्गत 433 पुल स्वीकृत किए गए, जिनमें से 307 का अनुबंध हो चुका है। इनमें से 164 पुल पूर्ण और 143 निर्माणाधीन हैं।
- नाबार्ड ऋण संपोषित योजना के तहत 1,212 पुल स्वीकृत, 1,153 पर एग्रीमेंट और 875 का निर्माण पूरा हो चुका है।
- मुख्यमंत्री ग्रामीण पथ अनुरक्षण कार्यक्रम (RRSMMP) के तहत 50 पुल स्वीकृत हैं, जिनमें 16 पर कार्य प्रारंभ हो चुका है।
- मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना (MGSY) के अंतर्गत 703 पुल स्वीकृत हैं, जिनमें से 52 पर कार्य शुरू हो चुका है।
ग्रामीण संपर्कता को मिला नया आयाम
राज्य सरकार की इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात का सुगम तंत्र विकसित हो रहा है। इससे न केवल लोगों की दैनिक गतिविधियाँ आसान हुई हैं, बल्कि कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी अधिक सुलभ हो गई है।
“पुलों के निर्माण से गांव जुड़े विकास से” — मंत्री अशोक चौधरी
बिहार सरकार में ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि पुल केवल ईंट और सीमेंट की संरचना नहीं, बल्कि ये ग्रामीणों को विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और सम्मान से जोड़ने वाले साधन हैं। उन्होंने कहा:
“हर वह पुल जो बनता है, वह गांव के बच्चों को स्कूल, किसानों को मंडी और मरीजों को अस्पताल की दूरी से राहत देता है। अब तक 2,500 से अधिक पुलों का निर्माण इस बात का प्रमाण है कि हमारी सरकार संवेदनशीलता, संकल्प और समयबद्धता के साथ कार्य कर रही है।”
राज्य सरकार द्वारा सेतु निर्माण में लाए गए इस परिवर्तन से बिहार के ग्रामीण परिवेश में अभूतपूर्व कनेक्टिविटी देखी जा रही है। यह पहल राज्य की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक प्रगति का आधार बनेगी।


