
पटना। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने सोशल मीडिया पर आयोग की प्रतिष्ठा धूमिल करने और अभ्यर्थियों के बीच भ्रम फैलाने की कोशिशों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार, 18 अप्रैल 2026 को आयोग ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उन तमाम दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें परीक्षा प्रणाली की शुचिता पर सवाल उठाए जा रहे थे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि हाल के दिनों में ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित की जा रही खबरें न केवल तथ्यहीन हैं, बल्कि वे एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हैं ताकि पारदर्शी चयन प्रक्रिया को बाधित किया जा सके।
आयोग ने इस संबंध में अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से भी स्थिति स्पष्ट की है।
बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति।
भ्रामक एवं तथ्यहीन खबरों से सावधान रहें। pic.twitter.com/xyz123
— Bihar Public Service Commission (@BPSCOffice)
April 18, 2026
बायोमेट्रिक एजेंसी विवाद: तारीखों के गणित से बेनकाब हुई साजिश
बीपीएससी ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस पोस्ट का तार्किक जवाब दिया है जिसमें बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन कार्य कराने वाली एजेंसी के चयन पर सवाल उठाए गए थे। आयोग ने बताया कि इस एजेंसी का चयन (Empanelment) पूरी तरह से पारदर्शी निविदा (Tender) प्रक्रिया का पालन करते हुए अगस्त 2025 में ही कर लिया गया था। चयन का मुख्य आधार ‘न्यूनतम दर’ (Lowest Bid) था, जो सरकारी खरीद नियमों के अनुरूप है।
आयोग ने उस भ्रामक दावे की धज्जियाँ उड़ाते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर जिस नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के पत्र का हवाला दिया जा रहा है, वह 25 अक्टूबर 2025 को जारी किया गया था। स्वाभाविक रूप से, अगस्त में जो प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, उस पर दो महीने बाद जारी किसी पत्र का कोई प्रभाव नहीं पड़ सकता था।
मुंगेर कांड की हकीकत: पेपर लीक नहीं, पुलिस की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
विज्ञप्ति का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मुंगेर जिले में हुई गिरफ्तारियों से जुड़ा है। सोशल मीडिया पर यह प्रसारित किया गया था कि 13 अप्रैल 2026 को सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी की परीक्षा के दौरान प्रश्न-पत्र लीक होते-होते बच गया। आयोग ने इस सूचना को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि मुंगेर में प्रश्न-पत्र लीक होने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।
हकीकत यह है कि मुंगेर पुलिस ने परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए सक्रियता दिखाते हुए परीक्षा से एक दिन पहले ही, यानी 13 अप्रैल को ही छापेमारी की थी। इस दौरान 20 अभ्यर्थियों सहित कुल 22 ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया गया था जो परीक्षा में गड़बड़ी करने का षड्यंत्र रच रहे थे। 14 अप्रैल 2026 को आयोजित परीक्षा पूरी तरह से सुरक्षित और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई।
बीपीएससी का नया सुरक्षा कवच: दो वर्षों में 60 बेदाग परीक्षाएं
पिछले दो वर्षों के कार्यकाल का लेखा-जोखा पेश करते हुए आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली में आए क्रांतिकारी बदलावों को रेखांकित किया है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि बीपीएससी ने अपनी परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से ‘सुदृढ़, सुरक्षित और अभेद्य’ बना लिया है। तकनीकी सुधारों और कड़े प्रोटोकॉल का ही नतीजा है कि पिछले 24 महीनों में करीब 60 परीक्षाओं का आयोजन किया गया है, जो पूरी तरह से कदाचारमुक्त, स्वच्छ और पारदर्शी रही हैं। पेपर लीक होना अब आयोग के लिए एक ‘दुःस्वप्न’ बन चुका है।
असामाजिक तत्वों की ‘नाकामयाब सेंधमारी’ और आयोग की चेतावनी
बीपीएससी ने उन तत्वों को सीधे तौर पर ललकारा है जो परीक्षा व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश करते हैं। आयोग का स्पष्ट संदेश है कि जो भी व्यक्ति या गिरोह आयोग की अभेद्य दीवार को लांघने की कोशिश करेगा, उसका पकड़ा जाना और जेल जाना निश्चित है। आयोग ने अभ्यर्थियों से यह अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की ‘मनगढ़ंत, भ्रांतिपूर्ण और तथ्यहीन’ बातों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
सत्य की जीत और अफवाहों की हार
बिहार लोक सेवा आयोग ने अपनी इस सफाई और आधिकारिक लिंक जारी कर उन तमाम चर्चाओं पर विराम लगा दिया है जो डिजिटल स्पेस में तैर रही थीं। यह प्रेस विज्ञप्ति यह भी संकेत देती है कि भविष्य में होने वाली परीक्षाओं को लेकर आयोग और भी अधिक सख्त प्रोटोकॉल अपना सकता है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित करें और नकारात्मकता फैलाने वाले तत्वों को अपने लक्ष्य के बीच न आने दें।


