बोधगया का करोड़ों का पुल हुआ जर्जर: पिलरों से निकली सरिया, गुजरते ट्रकों से कांपता है पुल

Bodh Gaya में करोड़ों रुपये की लागत से बना एक पुल उद्घाटन के कुछ ही वर्षों बाद जर्जर हो गया है। हालत ऐसी है कि पुल के पिलरों से सरिया बाहर निकल आई है और भारी वाहनों के गुजरने पर पूरा पुल कांपने लगता है। यह पुल बोधगया को डूंगेश्वरी पहाड़ी से जोड़ता है, जहां हर साल हजारों स्थानीय लोगों के साथ विदेशी पर्यटक भी पहुंचते हैं।

एक नहीं, तीन पुलों पर खतरा

Indian Institute of Technology Patna की एक शोध रिपोर्ट में गया जिले के तीन पुलों को जर्जर बताया गया है। इनमें—

  • बतसपुर-सिलैंजा से डूंगेश्वरी को जोड़ने वाला पुल
  • अतरी विधानसभा क्षेत्र का चटकी-दरियापुर गोरा रोड पुल
  • बेलागंज क्षेत्र का राजा बिगहा-बेलदार बिगहा पुल

शामिल हैं। बताया जा रहा है कि तीनों पुलों का निर्माण 2017-18 में 10 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से हुआ था।

पिलरों से बाहर दिख रही सरिया

बतसपुर-सिलैंजा पुल में कुल 16 पिलर हैं, लेकिन कुछ ही वर्षों में इनमें से कई पिलर हवा में झूलने जैसी स्थिति में पहुंच गए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार 6 से 7 पिलरों की हालत बेहद खराब हो चुकी है।

कई जगहों पर सीमेंट पूरी तरह उखड़ गई है और लोहे की सरिया साफ दिखाई देने लगी है। कुछ सरिया गलकर टूट भी चुकी है।

स्थिति इतनी खराब है कि क्षतिग्रस्त हिस्से पर खड़े होने के दौरान यदि कोई मोटरसाइकिल भी गुजरती है तो पुल में भूकंप जैसे कंपन महसूस होते हैं।

भारी वाहनों से बढ़ रहा खतरा

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पुल से हर दिन ओवरलोडेड बालू लदे हाइवा ट्रक गुजरते हैं, जिससे कंपन और बढ़ जाता है।

“जब ओवरलोड हाइवा ट्रक पुल से गुजरता है तो कंपन की आवाज साफ सुनाई देती है। उस समय लगता है कि पुल कभी भी गिर सकता है।”
— राधा देवी, स्थानीय निवासी

100 गांवों का संपर्क टूटने का डर

स्थानीय निवासी कपिल कुमार का कहना है कि अगर पुल गिर गया तो करीब 100 गांवों के 70 से 80 हजार लोगों का संपर्क टूट जाएगा।

उन्होंने बताया कि पुल बनने से पहले बरसात के दौरान मुहाने नदी में बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती थी और लोगों का बोधगया व गया से संपर्क कट जाता था।

“विदेशी पर्यटक भी बरसात में डूंगेश्वरी पहाड़ी नहीं जा पाते थे। अब पुल की हालत ने फिर वही डर पैदा कर दिया है।”
— कपिल कुमार, स्थानीय निवासी

निर्माण के समय भी लगे थे भ्रष्टाचार के आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुल निर्माण के दौरान ही घटिया सामग्री के इस्तेमाल और भ्रष्टाचार की शिकायतें उठी थीं। ग्रामीणों ने कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत भी की थी।

स्थानीय युवक रोहित कुमार ने कहा—

“जब दूसरे राज्यों में लोग बिहार के पुल गिरने की खबरें सुनते हैं तो मजाक उड़ाते हैं। सवाल यह है कि आखिर ऐसी गड़बड़ी करने वालों पर बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं होती?”

बालू उत्खनन को बताया कारण

Shrikant Sharma ने कहा कि पुलों की यह स्थिति नदी में अत्यधिक बालू उत्खनन और बाढ़ के कारण हुई है।

उनके अनुसार इंजीनियरों की विशेष टीम जांच कर चुकी है और मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया है।

“बतसपुर-सिलैंजा पुल के पिलर ज्यादा क्षतिग्रस्त हुए हैं। रिपेयरिंग का काम तेजी से चल रहा है और अगले एक महीने में कार्य पूरा कर लिया जाएगा।”
— Shrikant Sharma

12 पिलरों की होगी मरम्मत

साइट पर मौजूद कर्मचारी मुन्ना पासवान ने बताया कि करीब 12 पिलरों को नुकसान पहुंचा है, जिनमें 6 पिलर ज्यादा क्षतिग्रस्त हैं। सभी की सफाई और कंक्रीट-सरिया से मरम्मत की जा रही है।

उनका दावा है कि काम पूरा होने के बाद पुल पहले की तरह मजबूत हो जाएगा।

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