​मोकामा में बाबा चौहारमल की धरती पर खूनी साजिश: पूर्व सांसद ब्रह्मदेव आनंद पासवान पर तलवार और रिवाल्वर से हमला, रंगदारी के सिंडिकेट ने मचाया कोहराम

मोकामा/घोसवरी। बिहार की राजनीति और सामाजिक समरसता के प्रतीक माने जाने वाले मोकामा के टाल क्षेत्र में इस बार बाबा चौहारमल राष्ट्रीय महोत्सव की खुशियां दहशत के साये में सिमट गईं। घोसवरी थाना क्षेत्र के चाराडीह में आयोजित इस भव्य मेले के दौरान असामाजिक तत्वों ने महोत्सव के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद ब्रह्मदेव आनंद पासवान पर जानलेवा हमला कर दिया। 3 अप्रैल 2026 की यह घटना केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं है, बल्कि बिहार में लगने वाले मेलों और सांस्कृतिक आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक करारा तमाचा है। हथियारों से लैस अपराधियों ने जिस तरह से एक जन-प्रतिनिधि को निशाना बनाया, उसने मोकामा की फिजा में एक बार फिर पुराने दौर की कड़वाहट घोल दी है।

महोत्सव के बीच मची चीख-पुकार: रिवाल्वर और तलवारों से लैस थे हमलावर

​चाराडीह में आयोजित बाबा चौहारमल राष्ट्रीय महोत्सव अपनी भव्यता के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। लाखों की भीड़ और भक्तिमय माहौल के बीच अचानक उस समय अफरा-तफरी मच गई जब हमलावरों के एक समूह ने पूर्व सांसद ब्रह्मदेव आनंद पासवान को घेर लिया। पीड़ित पूर्व सांसद ने घटना की आपबीती सुनाते हुए बताया कि हमलावर पूरी तैयारी के साथ आए थे। उनके हाथों में अवैध रिवाल्वर, तेज धार वाले छुरा और चमचमाती तलवारें थीं।

​जैसे ही हमलावरों ने उन पर वार करने की कोशिश की, वहां मौजूद समर्थकों ने दीवार बनकर उन्हें बचाने का प्रयास किया। इस दौरान समर्थकों और हमलावरों के बीच जमकर धक्का-मुक्की और नोकझोंक हुई। अपराधियों का दुस्साहस इतना था कि वे भीड़ के बीच भी हथियार लहराते रहे। ब्रह्मदेव आनंद पासवान के अनुसार, यह हमला अचानक हुआ था और इसका उद्देश्य उन्हें गंभीर चोट पहुंचाना या उनकी जान लेना भी हो सकता था। समर्थकों की मुस्तैदी की वजह से एक बड़ी अनहोनी टल गई, लेकिन इस घटना ने महोत्सव की शुचिता को पूरी तरह दागदार कर दिया है।

अवैध वसूली और गुंडागर्दी का सिंडिकेट: हमले के पीछे की असली वजह

​पूर्व सांसद ने इस हमले के पीछे के कारणों का खुलासा करते हुए सीधे तौर पर उन असामाजिक तत्वों को जिम्मेदार ठहराया है जो मेले के दौरान ‘समानांतर सत्ता’ चलाने की कोशिश करते हैं। आरोप है कि चाराडीह मेले के दौरान कुछ दबंग और अपराधी किस्म के लोग दुकानदारों और आम जनता से अवैध वसूली और रंगदारी की मांग करते रहे हैं।

​ब्रह्मदेव आनंद पासवान ने महोत्सव के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते इस तरह की गुंडागर्दी और अवैध वसूली का कड़ा विरोध किया था। उन्होंने स्थानीय स्तर पर इस सिंडिकेट को रोकने की कोशिश की थी, जिससे ये अपराधी नाराज चल रहे थे। बताया जा रहा है कि मेले के राजस्व और वहां लगने वाली दुकानों से होने वाली अवैध कमाई पर जब प्रशासन और महोत्सव समिति ने लगाम लगानी चाही, तो इन अपराधियों ने सीधा प्रहार नेतृत्व पर ही कर दिया। यह हमला उन लोगों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है जो कानून-व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं।

मोकामा का टाल और बाबा चौहारमल की विरासत (विशेष विश्लेषण)

​मोकामा का टाल क्षेत्र हमेशा से अपनी विशेष भौगोलिक और राजनीतिक पहचान के लिए जाना जाता है। बाबा चौहारमल, जिन्हें वीरता और न्याय का प्रतीक माना जाता है, उनके सम्मान में आयोजित यह मेला दलित और वंचित समाज की अस्मिता से जुड़ा हुआ है।

  1. सुरक्षा के दावों की पोल: हर साल इस मेले के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती का दावा किया जाता है। इसके बावजूद, रिवाल्वर और तलवार लेकर अपराधियों का मुख्य मंच या अध्यक्ष के करीब पहुंच जाना यह बताता है कि सुरक्षा घेरे में बड़ी चूक हुई है।
  2. अपराध का बदलता स्वरूप: मोकामा में अब अपराध केवल वर्चस्व की लड़ाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मेलों और सार्वजनिक उत्सवों में होने वाली करोड़ों की ‘अवैध वसूली’ के कारोबार में बदल गया है।
  3. राजनीतिक निहितार्थ: ब्रह्मदेव आनंद पासवान एक अनुभवी नेता रहे हैं। उन पर हमले का संदेश दूर तक जाता है। यह हमला यह भी संकेत देता है कि अपराधी अब राजनीतिक चेहरों पर हाथ डालने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं।

पुलिस का रुख: आवेदन के इंतजार में थमी कार्रवाई

​इस हाई-प्रोफाइल मामले में घोसवरी पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। घोसवरी थानाध्यक्ष सत्यम तिवारी ने घटना की पुष्टि तो की है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अब तक पूर्व सांसद की ओर से कोई लिखित आवेदन या प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने के लिए शिकायत नहीं मिली है। पुलिस का तर्क है कि बिना लिखित शिकायत के वे कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में असमर्थ हैं।

​थानाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि जैसे ही पीड़ित पक्ष की ओर से आवेदन प्राप्त होगा, पुलिस तुरंत कार्रवाई करेगी और दोषियों को गिरफ्तार किया जाएगा। हालांकि, स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर चर्चा है कि जब हमला सरेआम हुआ और वहां पुलिस बल तैनात था, तो पुलिस ने खुद संज्ञान लेकर अपराधियों को मौके पर ही क्यों नहीं पकड़ा? क्या पुलिस किसी दबाव में है या फिर वह केवल कागजी औपचारिकताओं का इंतजार कर रही है?

समर्थकों का आक्रोश और न्याय की मांग

​पूर्व सांसद पर हुए हमले की खबर फैलते ही उनके समर्थकों में भारी उबाल देखा जा रहा है। चाराडीह और आसपास के इलाकों में लोग सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि अगर 24 घंटे के भीतर हमलावरों की पहचान कर उन्हें जेल नहीं भेजा गया, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। ब्रह्मदेव आनंद पासवान के समर्थकों ने आरोप लगाया है कि स्थानीय पुलिस के कुछ कर्मियों की मिलीभगत से ही मेले में अवैध वसूली का खेल चलता है, इसलिए पुलिस अब मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रही है।

​पीड़ित पूर्व सांसद ने कहा कि वे इस मामले को मुख्यमंत्री और गृह विभाग के आला अधिकारियों तक ले जाएंगे। उनका कहना है कि अगर एक पूर्व सांसद सुरक्षित नहीं है, तो मेले में आने वाले आम नागरिक और दुकानदार खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करेंगे?

व्यवस्था और व्यक्तिगत सुरक्षा का संकट

​इस घटना को केवल एक राजनीतिक हमले के तौर पर देखना गलत होगा। यह बिहार के सामाजिक उत्सवों में बढ़ते अपराधीकरण का एक जीता-जागता उदाहरण है। एक तरफ जहां सरकार सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे अपराधी तत्वों की मौजूदगी इन आयोजनों की गरिमा को धूल में मिला रही है।

  • प्रशासनिक जिम्मेदारी: मोकामा जैसे संवेदनशील इलाके में बाबा चौहारमल महोत्सव के दौरान जिला प्रशासन को खुफिया तंत्र (Intelligence) को और सक्रिय रखना चाहिए था। हथियारों का प्रदर्शन सरेआम होना यह बताता है कि चेकिंग की प्रक्रिया केवल दिखावा थी।
  • पूर्व सांसद की चुप्पी पर सवाल: पुलिस का यह कहना कि अभी तक आवेदन नहीं मिला है, यह भी सोचने पर मजबूर करता है। क्या पूर्व सांसद को न्याय व्यवस्था पर भरोसा नहीं है या वे खुद मामले को सुलझाने का कोई और रास्ता देख रहे हैं?

भविष्य की चुनौतियां और समाधान

​ब्रह्मदेव आनंद पासवान पर हुआ यह हमला मोकामा की कानून-व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है। बाबा चौहारमल की धरती न्याय और शौर्य की प्रतीक है, वहां इस तरह की कायराना हरकत समाज को पीछे ले जाने वाली है। अगर समय रहते इन अपराधियों पर नकेल नहीं कसी गई, तो भविष्य में ऐसे बड़े आयोजनों में जाने से लोग कतराने लगेंगे।

द वॉयस ऑफ बिहार की टीम इस घटना की कड़ी निंदा करती है और प्रशासन से मांग करती है कि वह लिखित आवेदन का इंतजार करने के बजाय सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के आधार पर स्वत: संज्ञान लेकर अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजे। महोत्सव की पवित्रता और एक जन-प्रतिनिधि का सम्मान बहाल करना अब पुलिस के लिए प्रतिष्ठा का विषय होना चाहिए।

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