पटना: बिहार में राज्यसभा की पांचों सीटों पर एनडीए उम्मीदवारों ने जीत दर्ज कर ली है। कांग्रेस और राजद के कुछ विधायकों के क्रॉस वोटिंग और अनुपस्थिति के बीच एनडीए के पांचवें उम्मीदवार शिवेश राम ने महागठबंधन प्रत्याशी अमरेंद्रधारी सिंह को पराजित कर राज्यसभा पहुंचने में सफलता हासिल की। पांचों सीटों पर जीत के बाद एनडीए खेमे में खुशी की लहर है, जबकि महागठबंधन में मायूसी का माहौल देखने को मिल रहा है।
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को साजिश करार दिया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता का दुरुपयोग करते हुए अधिकारियों के माध्यम से दबाव बनाया गया, कुछ लोगों को डराया गया और कुछ को खरीदा गया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने जिस तरह की राजनीति की शुरुआत की है, उसका अंत जरूर होगा।
तेजस्वी यादव ने कहा कि महागठबंधन के पास कुल 35 विधायकों का समर्थन था, जो जीत के लिए आवश्यक संख्या से छह कम था, जबकि एनडीए तीन वोट कम था। इसके बावजूद महागठबंधन ने मुकाबला करने का फैसला किया और पीछे हटने की बजाय चुनाव लड़ना पसंद किया। उन्होंने कहा कि भाजपा की विचारधारा के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि कुछ लोगों ने धोखा नहीं दिया होता तो महागठबंधन की जीत तय थी। तेजस्वी ने बताया कि ओवैसी की पार्टी और बसपा के विधायकों ने महागठबंधन का समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि कोई विधायक अनुपस्थित रहता है तो यह समझना चाहिए कि वहां हॉर्स ट्रेडिंग हुई है। उनका कहना था कि इस तरह की घटनाएं सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी सामने आ चुकी हैं।
वहीं महागठबंधन के उम्मीदवार अमरेंद्रधारी सिंह (एडी सिंह) ने अपनी हार पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सभी को पता है कि किसने किसे धोखा दिया है। उनका आरोप था कि कांग्रेस के तीन विधायक मतदान के दौरान मौजूद नहीं रहे, जिसकी जिम्मेदारी कांग्रेस को लेनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी के कुछ विधायक भी खरीद-फरोख्त का शिकार हुए हैं और यह साफ तौर पर हॉर्स ट्रेडिंग का मामला है। उनके मुताबिक, वे चुनाव जीतकर भी हार गए।


