
बिहपुर (भागलपुर)। सपनों के शहर मुंबई में रोजी-रोटी की तलाश में गए एक बिहारी युवक की संदेहास्पद परिस्थितियों में हत्या ने भागलपुर के बिहपुर प्रखंड में शोक और आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। बिहपुर के धरमपुररत्ती पंचायत स्थित जयरामपुर (वार्ड नंबर छह) निवासी 26 वर्षीय अभिनव चौधरी का शव जब गुरुवार की सुबह उसके पैतृक गांव पहुँचा, तो पूरे इलाके का माहौल गमगीन हो गया। दो महीने पहले जिन आँखों में भविष्य के सुनहरे सपने लेकर अभिनव ने घर की दहलीज लांघी थी, वे आँखें हमेशा के लिए बंद हो चुकी थीं। मुंबई के बांद्रा ईस्ट स्थित संटा कॉलोनी में हुई इस वारदात ने एक बार फिर महानगरों में रहने वाले प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा और उनके निजी जीवन में उलझे विवादों के खौफनाक अंत को उजागर किया है। पुलिस की शुरुआती जांच और परिजनों के आरोपों के अनुसार, यह हत्या ‘प्रेम प्रसंग’ और ‘डेढ़ लाख की उधारी’ के जटिल ताने-बाने के बीच फंसी एक सोची-समझी साजिश का परिणाम नजर आती है। मुंबई की खेरबाड़ी पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है, वहीं गांव में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
जयरामपुर में पसरा सन्नाटा: जब एम्बुलेंस से उतरी लाश
शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 की सुबह जयरामपुर गांव में एक अजीब सी खामोशी है। गुरुवार को जब अभिनव का पार्थिव शरीर मुंबई से एम्बुलेंस के जरिए गांव लाया गया, तो सिसकियों और चीत्कारों से आसमान गूँज उठा। अभिनव अपने परिवार का सहारा था और उसकी इस तरह असमय मौत ने पूरे कुनबे को झकझोर कर रख दिया है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि अभिनव मिलनसार स्वभाव का युवक था और गांव में उसकी किसी से कोई पुरानी रंजिश नहीं थी।
शव पहुँचते ही भारी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ मृतक के घर पर इकट्ठा हो गई। लोगों में इस बात को लेकर गहरा गुस्सा है कि आखिर एक साधारण से कामगार युवक की हत्या क्यों की गई। अभिनव के भाई अनमोल चौधरी ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद मुंबई पुलिस ने शव उन्हें सौंप दिया था। गुरुवार सुबह गांव पहुँचने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई, लेकिन परिजनों के मन में न्याय की प्यास अब भी बनी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक कातिलों को सजा नहीं मिल जाती, उनकी आत्मा को शांति नहीं मिलेगी।
मुंबई की वह आखिरी कॉल और संदेहास्पद परिस्थितियाँ
अभिनव चौधरी महज दो महीने पहले ही मुंबई गया था। वह बांद्रा ईस्ट के संटा कॉलोनी इलाके में रहकर एक फैक्ट्री में मजदूरी करता था ताकि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधार सके। अनमोल चौधरी ने बताया कि अभिनव से उनकी आखिरी बार बातचीत रविवार दोपहर करीब दो बजे हुई थी। उस फोन कॉल के दौरान अभिनव के लहजे में किसी बड़े खतरे का संकेत नहीं था, लेकिन उसके बाद से उसका फोन बंद आने लगा।
परिजनों का आरोप है कि शनिवार और रविवार के बीच ही पूरी साजिश रची गई। अभिनव के कमरे के आसपास रहने वाले अन्य लोगों से जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार वहां कुछ लोगों का आना-जाना हुआ था। मुंबई की खेरबाड़ी पुलिस ने मोबाइल टावर लोकेशन और कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) खंगालना शुरू कर दिया है। पुलिस यह देख रही है कि रविवार की उस आखिरी कॉल के बाद अभिनव के पास किन लोगों के फोन आए थे और उस रात उसके कमरे पर कौन-कौन मौजूद था।
प्रेम प्रसंग और शादी का दबाव: क्या यही बनी हत्या की वजह?
इस हत्याकांड का सबसे पेचीदा पहलू एक तरफा या प्रेम प्रसंग का दबाव नजर आ रहा है। अनमोल चौधरी ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि जयरामपुर की ही रहने वाली एक युवती (जो मुख्य आरोपी की बहन बताई जा रही है) अभिनव पर शादी के लिए लगातार दबाव बना रही थी। बताया जाता है कि पहले दोनों के बीच बातचीत होती थी, लेकिन जब अभिनव के परिवार ने इस रिश्ते पर आपत्ति जताई, तो अभिनव ने उस युवती से दूरी बना ली थी।
शनिवार को वह युवती अभिनव के पास मुंबई पहुँची थी। वहां उसने अभिनव से शादी करने की जिद की और इसी बात को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस हुई थी। परिजनों का मानना है कि जब अभिनव ने शादी से साफ इनकार कर दिया, तो युवती ने अपने भाई और अन्य साथियों के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। यह ‘ऑनर किलिंग’ का मामला है या आवेश में आकर की गई हत्या, यह अब पुलिसिया तफ्तीश का मुख्य केंद्र है।
डेढ़ लाख की उधारी: स्टाम्प पेपर पर दर्ज है सबूत
हत्या के पीछे केवल प्रेम प्रसंग ही नहीं, बल्कि एक बड़ा वित्तीय विवाद भी सामने आया है। मृतक के भाई अनमोल ने खुलासा किया कि जयरामपुर निवासी एक युवक ने एक वर्ष पूर्व अभिनव से 1.5 लाख रुपये उधार लिए थे। इस उधारी का बाकायदा स्टाम्प पेपर पर लिखित प्रमाण भी मौजूद है। अभिनव पिछले काफी समय से अपने पैसे वापस मांग रहा था, लेकिन वह युवक पैसे देने में आनाकानी कर रहा था।
संयोगवश, वह युवक भी इस समय मुंबई में ही मौजूद था। परिजनों को संदेह है कि पैसे न लौटाने पड़े और बहन के साथ हुए विवाद का बदला लेने के लिए उस युवक ने अपने साथियों के साथ मिलकर अभिनव को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। उधारी की राशि और प्रेम प्रसंग—इन दो वजहों ने मिलकर अपराधियों को उकसाया। स्टाम्प पेपर वाला यह सबूत अब पुलिस के लिए एक बड़ा आधार बन सकता है जिससे आरोपियों की मंशा (Motive) साबित की जा सकेगी।
आरोपियों की पहचान: जयरामपुर से खगड़िया तक जुड़े तार
परिजनों ने पुलिस को दी गई शिकायत में चार मुख्य लोगों को नामजद किया है। इनमें जयरामपुर का ही एक युवक, उसकी बहन, एक अन्य युवक और खगड़िया जिले के भरतखंड निवासी एक साथी शामिल है। खगड़िया वाले युवक की भूमिका इस मामले में इसलिए संदिग्ध मानी जा रही है क्योंकि वह मुख्य आरोपी का बेहद करीबी दोस्त बताया जाता है और घटना के समय वह भी बांद्रा इलाके में ही मौजूद था।
खेरबाड़ी पुलिस ने इन संदिग्धों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश में छापेमारी शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। बिहपुर पुलिस भी मुंबई पुलिस के साथ संपर्क में है ताकि आरोपियों के गांव लौटने की स्थिति में उन्हें तुरंत दबोचा जा सके। अपराधियों ने जिस तरह से इस घटना को अंजाम दिया है, उससे यह साफ है कि उन्हें कानून का कोई खौफ नहीं था।
खेरबाड़ी पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया
मुंबई की खेरबाड़ी पुलिस ने इस मामले में हत्या (धारा 302) और साक्ष्य छिपाने से जुड़ी अन्य धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि अभिनव के शरीर पर चोट के निशान और पोस्टमार्टम की प्राथमिक रिपोर्ट गला दबाकर या किसी भारी वस्तु से प्रहार कर हत्या किए जाने की ओर इशारा करती है। फॉरेंसिक टीम ने घटना स्थल से उंगलियों के निशान और अन्य साक्ष्य जुटाए हैं।
चूंकि मामला दो राज्यों से जुड़ा है, इसलिए जांच में थोड़ी तकनीकी पेचीदगियां हैं, लेकिन मुंबई पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। अभिनव के भाई अनमोल ने मांग की है कि इस मामले का ट्रायल फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो ताकि उनके भाई को जल्द न्याय मिल सके। उन्होंने भागलपुर जिला प्रशासन और बिहार सरकार से भी अपील की है कि वे मुंबई पुलिस पर दबाव बनाएं ताकि जांच में कोई ढिलाई न बरती जाए।
परिजनों का दर्द और समाज की जिम्मेदारी
अभिनव की मौत ने एक बार फिर बिहार के उन परिवारों के दर्द को सामने ला दिया है जो अपने बेटों को दूर शहरों में मेहनत करने के लिए भेजते हैं। 1.5 लाख रुपये की मामूली उधारी और एक तरफा जिद ने एक होनहार युवक की जान ले ली। जयरामपुर के ग्रामीणों का कहना है कि अभिनव को मारना केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं है, बल्कि उसके पूरे परिवार के भविष्य की हत्या है।
शुक्रवार को गांव में होने वाली चर्चाओं के बीच एक ही सवाल गूँज रहा है—क्या अब बिहार के युवाओं के लिए परदेस में भी सुरक्षित रहना मुश्किल हो गया है? स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मृतक के परिवार को सांत्वना दी है और सरकार से उचित मुआवजे की मांग की है। अभिनव का शव तो मिट्टी में मिल गया, लेकिन उसके पीछे छूटे सवाल अब भी मुंबई और बिहार की सड़कों पर न्याय की तलाश में भटक रहे हैं। खेरबाड़ी थाने की पुलिस अब इन सवालों के जवाब खोजने में जुटी है।


