
पटना/भागलपुर। बिहार की राजनीति के लिए 07 मई 2026 की तारीख एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बन गई है। पटना के गांधी मैदान की गौरवशाली धरती आज एक बार फिर सत्ता के बड़े बदलाव और संकल्प की साक्षी बनी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का भव्य विस्तार संपन्न हुआ। इस समारोह में जहाँ भाजपा के कई अनुभवी दिग्गजों ने शपथ ली, वहीं कुछ ऐसे चेहरों को भी प्रशासनिक मुख्यधारा में लाया गया है जिनकी छवि जमीन से जुड़े और तकनीक के जानकार नेता की रही है। इन्हीं नामों में एक प्रमुख नाम है भागलपुर जिले के बिहपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक इंजीनियर कुमार शैलेंद्र का। पहली बार कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेने वाले ई. शैलेंद्र का निजी क्षेत्र की नौकरी से लेकर राज्य के मंत्रिमंडल तक का सफर काफी प्रेरणादायक और राजनैतिक उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उन्हें पूर्वी बिहार (अंग और कोसी क्षेत्र) में भाजपा के एक मजबूत स्तंभ के रूप में देखा जाता है।
मोतिहारी से इंजीनियरिंग और निजी क्षेत्र में उद्यमिता
60 वर्षीय इंजीनियर कुमार शैलेंद्र का जन्म 9 दिसंबर 1966 को भागलपुर जिले के खरीक प्रखंड अंतर्गत तेलघी गांव में हुआ था। उनके पिता डॉक्टर कुमार नित्यानंद सिंह अपने समय के प्रतिष्ठित चिकित्सक और सिविल सर्जन रह चुके थे, जिससे शैलेंद्र को विरासत में अनुशासन और सेवा भाव मिला। शिक्षा की बात करें तो ई. शैलेंद्र बिहार के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं जिनके पास तकनीकी डिग्री है। उन्होंने मारवाड़ी कॉलेज, भागलपुर से 1985 में स्नातक किया और उसके बाद मोतिहारी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।
राजनीति में पूर्णतः सक्रिय होने से पहले उन्होंने एक प्रोफेशनल के रूप में अपना करियर शुरू किया था। उन्होंने भागलपुर में निजी क्षेत्र में सिविल इंजीनियर के पद पर नौकरी की और बाद में अपनी उद्यमशीलता का परिचय देते हुए ‘भोला कंस्ट्रक्शन’ नाम की अपनी संस्था शुरू की। वर्तमान में यह संस्थान उनकी माता के नाम पर संचालित है। एक सफल इंजीनियर और उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बनाने के बाद उन्होंने सामाजिक सरोकारों के लिए राजनीति का रुख किया और भाजपा के एक निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में अपनी पारी शुरू की।
राजनैतिक सफर: 2005 से 2026 तक का संघर्ष और सफलता
इंजीनियर कुमार शैलेंद्र का राजनैतिक ग्राफ निरंतर सक्रियता का रहा है। वे साल 2005 से ही भाजपा के टिकट पर बिहपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ते रहे हैं। हालांकि, उनका यह सफर केवल जीत का नहीं बल्कि संघर्ष का भी रहा है। साल 2005 और 2015 के विधानसभा चुनावों में उन्हें हार का स्वाद भी चखना पड़ा, लेकिन उन्होंने क्षेत्र का साथ नहीं छोड़ा।
उनकी जीत का सिलसिला साल 2010 में शुरू हुआ, जब उन्होंने पहली बार बिहपुर से जीत दर्ज की। इसके बाद साल 2020 और फिर 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भारी मतों से विजय प्राप्त की। साल 2025 के चुनाव में उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 30,032 मतों के अंतर से करारी शिकस्त दी थी। तभी से उनके मंत्री बनने की चर्चाएं जोरों पर थीं, लेकिन उस समय उन्हें संगठन और सदन के भीतर सचेतक की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के पूर्ण विस्तार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाकर पार्टी ने उनके धैर्य और वफादारी का पुरस्कार दिया है।
संगठन और सदन का अनुभव: तकनीकी प्रकोष्ठ से सचेतक तक
पार्टी ने ई. शैलेंद्र की तकनीकी विशेषज्ञता और सांगठनिक पकड़ का हमेशा सम्मान किया है। साल 2006 से 2009 तक वे बीजेपी तकनीकी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रहे, जहाँ उन्होंने राज्य भर के इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों को भाजपा की विचारधारा से जोड़ने का काम किया। सदन के भीतर उनकी भूमिका एक ‘अनुशासक’ की रही है। वे साल 2010 से 2015 और फिर 2020 से 2025 तक बिहार विधानसभा में सचेतक (Whip) का पद संभालते रहे हैं। 2025 में सरकार बनने के बाद भी उन्हें फिर से सचेतक की जिम्मेदारी दी गई थी।
उनकी सांगठनिक कुशलता को देखते हुए 2024 के लोकसभा चुनावों में उन्हें ‘पूर्णिया क्लस्टर प्रभारी’ बनाया गया था, जिसमें उनके जिम्मे पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जैसे चुनौतीपूर्ण जिलों का प्रभार था。 इन क्षेत्रों में भाजपा के जनाधार को सक्रिय रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। शांत स्वभाव और कार्यकर्ताओं के बीच सुलभता उनकी सबसे बड़ी पूंजी मानी जाती है।
अंग और कोसी क्षेत्र में ‘भूमिहार’ राजनीति के बड़े चेहरे
राजनैतिक विश्लेषक मानते हैं कि इंजीनियर कुमार शैलेंद्र को मंत्री बनाना भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। पूर्वी बिहार, विशेषकर भागलपुर, खगड़िया और नवगछिया के इलाकों में भूमिहार समाज के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है。 इलाके में उनके कद का कोई बड़ा राजनैतिक विरोधी फिलहाल सक्रिय नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि उनके पुराने प्रतिद्वंद्वी रहे बुलो मंडल भी अब एनडीए का हिस्सा हैं, जिससे ई. शैलेंद्र के लिए क्षेत्र में काम करना और अधिक सुगम हो गया है।
बीजेपी उन्हें कोसी-सीमांचल और अंग क्षेत्र में सामाजिक संतुलन साधने वाले चेहरे के रूप में देख रही है। वे एक ऐसे नेता हैं जिन्होंने कभी भी पार्टी नहीं बदली और हर परिस्थिति में भाजपा के झंडे को बुलंद रखा। उनकी स्वच्छ छवि और साफ-सुथरा निजी जीवन उन्हें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ‘सुशासन’ वाली टीम के लिए एक फिट उम्मीदवार बनाता है।
विवाद और छवि: ‘हिंदूवादी’ बयानों से रहे चर्चा में
ई. शैलेंद्र अपनी बेबाकी के लिए भी जाने जाते हैं। साल 2025 में उनके एक बयान ने राज्य भर में सुर्खियां बटोरी थीं, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने राजद को ‘मुसलमानों की पार्टी’ बताते हुए हिंदुओं को गोलबंद होने का आह्वान किया था। उनके इन बयानों को उनकी कट्टर हिंदूवादी छवि के रूप में देखा गया, जिससे भाजपा के कोर वोटर के बीच उनकी लोकप्रियता और बढ़ गई।
हलफनामों की बात करें तो, जहाँ 2015 और 2020 के चुनावों के दौरान उन पर कुछ छोटे-मोटे आपराधिक मामले दर्ज थे, वहीं 2025 के हलफनामे में उनकी छवि पूरी तरह बेदाग रही है。 सार्वजनिक जीवन में उन पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है, जो उनकी ‘इंजीनियर’ वाली छवि को और अधिक निखारता है।
कैबिनेट विस्तार का व्यापक संदर्भ: एक संतुलित टीम
इंजीनियर कुमार शैलेंद्र के साथ-साथ भाजपा ने अपनी इस नई टीम में कई अन्य चेहरों को भी जगह दी है। आज शपथ लेने वालों में संजय टाइगर, नंद किशोर राम, रामचंद्र प्रसाद और अंतरराष्ट्रीय शूटर श्रेयसी सिंह जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा, बिहार कैबिनेट ने कल ही राज्य में AI मिशन को मंजूरी दी है, जिसे लागू करने में ई. शैलेंद्र जैसे तकनीकी पृष्ठभूमि वाले मंत्रियों की भूमिका काफी अहम हो सकती है।
गांधी मैदान का यह समारोह केवल चेहरों का बदलाव नहीं, बल्कि बिहार के विकास के लिए एक नई ‘वार टीम’ का गठन है। भागलपुर जिले के बिहपुर से निकलकर पटना के सत्ता के गलियारे तक पहुँचे ई. शैलेंद्र से अब न केवल उनके क्षेत्र, बल्कि पूरे बिहार के तकनीकी और बुनियादी ढांचे में सुधार की उम्मीद की जा रही है। शपथ ग्रहण के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि उन्हें कौन सा विभाग सौंपा जाता है।


