पटना। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जहां सियासी सरगर्मियां तेज़ हैं, वहीं शिक्षक भर्ती को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। TRE-4 अभ्यर्थी जहां 1 लाख 20 हज़ार पदों पर बहाली की मांग कर रहे हैं, वहीं शिक्षा विभाग केवल 26 हज़ार से अधिक पदों पर भर्ती की बात कह रहा है। इसी बीच शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति साफ की।
शिक्षा मंत्री का बयान: 26 हज़ार पद किसी भी तरह से कम नहीं
शिक्षा मंत्री ने कहा कि मौजूदा चरण में 26 हज़ार पदों पर बहाली की जाएगी।
- उन्होंने बताया कि 2-3 जिलों का रोस्टर क्लियरेंस बाकी है।
- यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद वैकेंसी BPSC को भेज दी जाएगी।
- यदि इसके बाद भी सीटें बचती हैं, तो उन्हें TRE-5 में जोड़ा जाएगा।
मंत्री ने साफ किया कि पदों की संख्या स्कूलों में विषयवार और छात्रों की संख्या के आधार पर ही तय की जाती है।
अभ्यर्थियों का आंदोलन: 1.20 लाख पदों की मांग
TRE-4 के उम्मीदवार सरकार से अपने पुराने वादे को पूरा करने की मांग पर अड़े हुए हैं।
- 19 सितंबर को अभ्यर्थियों ने पटना कॉलेज से सीएम आवास तक मार्च करने की कोशिश की।
- पुलिस ने उन्हें जेपी गोलंबर के पास रोक दिया।
- बारिश के बावजूद उम्मीदवार तीन घंटे तक डटे रहे और सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी करते रहे।
बाद में छात्र नेता दिलीप के नेतृत्व में अभ्यर्थियों का प्रतिनिधिमंडल शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव से मिला, जिसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।
नाराजगी और बेरोज़गारी का मुद्दा
अभ्यर्थियों का कहना है कि बिहार में सरकारी नौकरी ही युवाओं के लिए सबसे बड़ा विकल्प है।
- सरकार बार-बार भर्ती प्रक्रिया में देरी कर रही है।
- लाखों योग्य उम्मीदवार बेरोजगार हैं और सरकार का वादा अब तक अधूरा है।
उम्मीदवारों का आरोप है कि अगर सरकार समय पर वैकेंसी नहीं निकालती, तो यह युवाओं के साथ विश्वासघात होगा।
निष्कर्ष
TRE-4 शिक्षक भर्ती को लेकर बिहार में सरकार और अभ्यर्थियों के बीच टकराव गहराता जा रहा है। चुनाव से ठीक पहले यह विवाद राज्य की सियासत में बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर BPSC को भेजी जाने वाली वैकेंसी की फाइनल संख्या क्या होगी।


