HIGHLIGHTS: गाजियाबाद पुलिस का बड़ा ‘क्रैकडाउन’; पाक जासूसी नेटवर्क का मुख्य हैंडलर बिहार से गिरफ्तार
- बड़ी गिरफ्तारी: मुजफ्फरपुर (बिहार) के हरचंदा गांव का मूल निवासी नौशाद अली उर्फ लालू गाजियाबाद में धराया।
- खतरनाक मंसूबे: झारखंड का प्रसिद्ध देवघर मंदिर और दिल्ली कैंट इलाका था आतंकियों के निशाने पर।
- लेडी जासूस: मुंबई पुलिस की महिला मुखबिर मीरा ठाकुर भी गिरफ्तार; हथियार तस्करी और महिलाओं को नेटवर्क में जोड़ने का काम।
- ट्रेनिंग: पाकिस्तानी हैंडलर ‘सरफराज’ ने नौशाद को दी थी जासूसी ऐप चलाने और रेकी की ट्रेनिंग।
- मास्टरमाइंड: नौशाद, सुहेल और समीर मिलकर देश के संवेदनशील स्थानों के फोटो-वीडियो पाकिस्तान भेज रहे थे।
ट्रांस हिंडन (गाजियाबाद) | 23 मार्च, 2026
देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। गाजियाबाद पुलिस ने रविवार को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय जासूसी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसका मुख्य सूत्रधार बिहार के मुजफ्फरपुर का रहने वाला नौशाद अली उर्फ लालू निकला। यह गिरोह न केवल भारतीय सेना के ठिकानों की जानकारी जुटा रहा था, बल्कि झारखंड के देवघर स्थित विश्व प्रसिद्ध मंदिर को भी निशाना बनाने की फिराक में था।
देवघर मंदिर और दिल्ली कैंट: ‘रेकी’ का मिला था बड़ा टास्क
पूछताछ में नौशाद अली ने कबूल किया है कि वह सीधे पाकिस्तानी आका सरफराज के संपर्क में था। सरफराज ने उसे एक विशेष ऐप के जरिए ट्रेनिंग दी थी कि कैसे संवेदनशील स्थानों के वीडियो, फोटो और जीपीएस (GPS) लोकेशन पाकिस्तान भेजनी है।
नौशाद के पास दो मुख्य जिम्मेदारियां थीं:
- देवघर मंदिर: झारखंड के इस प्रसिद्ध मंदिर का वीडियो और सटीक जीपीएस लोकेशन जुटाना।
- दिल्ली कैंट: सेना के इस संवेदनशील इलाके में घुसकर वहां की गतिविधियों की रेकी करना। इसके अलावा, आरोपी ने देश के एक बड़े उद्योगपति के घर की रेकी करने की बात भी स्वीकार की है। वह पहले भी रेलवे स्टेशनों और सुरक्षा बलों के ठिकानों की जानकारी सरहद पार भेज चुका है।
VOB डेटा चार्ट: पाक जासूसी नेटवर्क की ‘क्राइम’ फाइल
- मुख्य हैंडलर: नौशाद अली उर्फ लालू (निवासी: हरचंदा, मुजफ्फरपुर, बिहार)।
- सह-आरोपी: मीरा ठाकुर (मथुरा निवासी, मुंबई पुलिस की मुखबिर) और एक नाबालिग।
- पाकिस्तानी आका: सरफराज (इसी ने ट्रेनिंग और निर्देश दिए)।
- नेटवर्क के प्रमुख सदस्य: सुहेल मलिक, नौशाद अली और समीर।
- हथियार कनेक्शन: मीरा ठाकुर अपराधियों को हथियार सप्लाई करती थी और जासूसी के लिए महिलाओं को ‘हनी-ट्रैप’ या पैसों का लालच देकर जोड़ रही थी।
- तकनीक: पाकिस्तान संचालित व्हाट्सऐप ग्रुप और विशेष ट्रेनिंग ऐप का इस्तेमाल।
मीरा ठाकुर: मुखबिरी के पीछे ‘हथियार तस्करी’ का खेल
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस गैंग में शामिल मीरा ठाकुर की भूमिका काफी संदेहास्पद है। वह मुंबई पुलिस की मुखबिर होने का दावा करती थी, लेकिन असल में वह सीमा पार से मिलने वाले निर्देशों पर काम कर रही थी। आशंका है कि पाकिस्तानी हैंडलर मीरा के जरिए गैंग के सदस्यों तक हथियार पहुँचाने की योजना बना रहा था। वह दिल्ली-एनसीआर के अपराधियों को अवैध हथियार सप्लाई करने में भी शामिल रही है।
VOB का नजरिया: बिहार के युवाओं के लिए ‘रेड अलर्ट’
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि मुजफ्फरपुर के नौशाद की गिरफ्तारी बिहार और झारखंड के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
- सोशल मीडिया का जाल: यह गैंग सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को फंसा रहा है। पैसे और लालच के चक्कर में नौशाद जैसे युवा देश से गद्दारी कर रहे हैं।
- सुरक्षा पर आंच: देवघर मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों की रेकी यह बताती है कि दुश्मन अब केवल सेना ही नहीं, बल्कि हमारी आस्था के केंद्रों पर भी नजर गड़ाए बैठा है।
- जागरूकता की कमी: क्या स्थानीय खुफिया तंत्र को मुजफ्फरपुर के इस युवक की गतिविधियों की भनक नहीं थी? बिहार पुलिस को अब ग्रामीण इलाकों में ‘वेरिफिकेशन’ पर जोर देना होगा।
निष्कर्ष: सुशासन और सतर्कता ही सुरक्षा का आधार
फिलहाल नौशाद और उसके साथियों से पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में बिहार और झारखंड के और कितने लोग शामिल हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ नागरिकों से अपील करता है कि सोशल मीडिया पर किसी भी संदिग्ध ग्रुप या ‘अनजान हैंडलर’ के संपर्क में आने से बचें।


