बिहार में बाल श्रम से ‘कलम’ तक का सफर: विमुक्त बच्चों का बनेगा ‘इंडिविजुअल रिहैब प्रोफाइल’; विकास आयुक्त ने शिक्षा और कौशल विकास से जोड़ने का दिया मेगा प्लान

पटना | 26 फरवरी, 2026 बिहार सरकार ने बाल एवं किशोर श्रम के समूल नाश और विमुक्त किए गए बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए अपनी रणनीति को नया विस्तार दिया है। बुधवार को राज्य के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में ‘बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन राज्य रणनीति एवं कार्य योजना, 2025’ के तहत गठित राज्य कार्यबल की एक उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। बैठक का मुख्य संदेश साफ था—सिर्फ बच्चों को काम से छुड़ाना काफी नहीं है, उन्हें ‘शिक्षा की मुख्यधारा’ से जोड़ना और उनके परिवारों को ‘आर्थिक सुरक्षा’ देना अनिवार्य है।

पुनर्वास का नया मॉडल: ‘इंडिविजुअल प्रोफाइल’ से होगी निगरानी

​विकास आयुक्त ने निर्देश दिया कि बाल श्रम से विमुक्त किए गए प्रत्येक बच्चे का एक ‘व्यक्तिगत पुनर्वास प्रोफाइल’ (Individual Rehabilitation Profile) तैयार किया जाए।

  • ट्रैकिंग सिस्टम: इस प्रोफाइल के जरिए समय-समय पर यह मॉनिटरिंग की जाएगी कि बच्चा स्कूल जा रहा है या नहीं और उसकी प्रगति कैसी है।
  • श्रेणीवार डेटा: श्रम संसाधन विभाग को श्रेणीवार डेटा तैयार करने को कहा गया है, ताकि नोडल विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ सीधे उन तक पहुँचे।
  • आवास की सुविधा: जिन विमुक्त बच्चों के पास रहने की समस्या है, उन्हें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्रावासों में प्राथमिकता के आधार पर जगह दी जाएगी।

परिवार को मिलेगा ‘सुरक्षा कवच’: राशन कार्ड से आयुष्मान तक

​सरकार का मानना है कि बाल श्रम की जड़ें गरीबी में हैं। इसीलिए, विमुक्त बच्चों के परिवारों को सशक्त बनाने के लिए विशेष विमर्श हुआ:

  1. सामाजिक सुरक्षा: बच्चों के परिवारों को तत्काल राशन कार्ड और आयुष्मान भारत कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा।
  2. कल्याणकारी योजनाएं: उनके परिवारों को स्वरोजगार और अन्य जन-कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा ताकि वे दोबारा बच्चों को काम पर भेजने को मजबूर न हों।
  3. कौशल विकास: विमुक्त किशोरों को उनकी रुचि के अनुसार व्यावसायिक प्रशिक्षण (Vocational Training) और स्किल डेवलपमेंट की सुविधा दी जाएगी ताकि वे स्वावलंबी बन सकें।

धावा दलों की कार्यप्रणाली में बदलाव और अंतर-विभागीय समन्वय

​बाल श्रम रोकने के लिए काम करने वाले ‘धावा दलों’ (Rescue Teams) को और अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाया जाएगा। विकास आयुक्त ने कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए एक ‘संयुक्त कार्य समूह’ के गठन का निर्देश दिया है।

  • मासिक बैठक: अब हर महीने गृह विभाग, श्रम संसाधन विभाग, विधि विभाग और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (SLSA) की संयुक्त बैठक होगी, ताकि कानूनी कार्रवाई सुगम हो सके।
  • एकीकृत कार्ययोजना: सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ ‘एकीकृत कार्ययोजना’ (Integrated Action Plan) के अनुरूप कार्य करने की हिदायत दी गई है।

बैठक में उपस्थित रहे दिग्गजों का जमावड़ा

​इस महत्वपूर्ण नीतिगत बैठक में बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के अध्यक्ष अशोक कुमार बादल, शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी राजेन्दर, योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती एन विजयलक्ष्मी, समाज कल्याण विभाग की सचिव श्रीमती बन्दना प्रेयषी, विभागीय सचिव दीपक आनन्द, श्रमायुक्त राजेश भारती और यूनिसेफ बिहार के विशेषज्ञ प्रतिनिधि उपस्थित थे।

VOB का नजरिया: क्या ‘2025 की रणनीति’ गेम-चेंजर साबित होगी?

​बिहार में बाल श्रम के खिलाफ अब तक कई अभियान चले हैं, लेकिन ‘व्यक्तिगत रिहैब प्रोफाइल’ और ‘परिवारों को आयुष्मान/राशन कार्ड’ से जोड़ना एक व्यावहारिक सोच है। अक्सर देखा जाता है कि विमुक्त होने के बाद बच्चे फिर से काम पर लौट जाते हैं क्योंकि परिवार की आर्थिक स्थिति नहीं बदलती। अगर शिक्षा, हॉस्टल और पारिवारिक सुरक्षा का यह त्रिकोण सही से काम कर गया, तो बिहार बाल श्रम मुक्त होने की दिशा में देश का रोल मॉडल बन सकता है।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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