पटना | 19 जून 2025:बिहार में सिपाही बहाली परीक्षा के पेपर लीक कांड में अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुख्य आरोपित संजीव मुखिया और उससे जुड़े नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। PMMLA (धनशोधन निवारण अधिनियम) के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज करते हुए गुरुवार को देशभर के 11 ठिकानों पर एकसाथ छापेमारी की गई।
कहाँ-कहाँ हुई छापेमारी?
- बिहार: पटना (आरपीएस मोड़ के पास जेन एक्स अपार्टमेंट), नालंदा (नगरनौसा)
- कोलकाता: 6 ठिकाने
- रांची और लखनऊ: 1-1 स्थान
छापेमारी की यह कार्रवाई संजीव मुखिया, उसके बेटे डॉ. शिव, और इस घोटाले से जुड़े नीट पेपर लीक कांड के आरोपितों के साथ-साथ प्रश्न पत्र छापने वाली एजेंसी पर केंद्रित रही।
ईडी को क्या मिला?
ईडी के सूत्रों के मुताबिक:
- बड़ी मात्रा में डिजिटल दस्तावेज
- लेन-देन की रसीदें और संदिग्ध फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन के प्रमाण
- शैक्षणिक प्रमाण पत्र और आधार कार्ड की प्रतियां (नालंदा से बरामद)
ये दस्तावेज इस पूरे रैकेट के व्यवस्थित और संगठित नेटवर्क का संकेत देते हैं, जिसमें भर्ती परीक्षा के प्रश्न पत्रों की प्रिंटिंग से लेकर वितरण तक की कड़ी योजना का पता चलता है।
प्रमुख किरदारों पर नजर
- संजीव मुखिया: इस घोटाले का मुख्य सरगना, पहले से ही कई पेपर लीक मामलों में कुख्यात
- डॉ. शिव: संजीव का बेटा, नालंदा के ठिकानों से जुड़े
- सिकंदर कुमार यादवेंदु: बिहार सरकार में जूनियर इंजीनियर, NEET पेपर लीक कांड में नाम
- कौशिक कुमार कर: कोलकाता स्थित प्रिंटिंग एजेंसी से जुड़ा, सिपाही बहाली परीक्षा के प्रश्न पत्रों की छपाई और डिलीवरी में संलिप्त
ईडी की अगली रणनीति
ईडी अब जब्त दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच के आधार पर:
- धन शोधन की रकम का स्रोत व प्रवाह
- फर्जी अभ्यर्थियों को पैसे के बदले पास कराने की साजिश
- प्रिंटिंग एजेंसी की भूमिका और सरकारी तंत्र से संभावित सांठगांठ
की गहराई से जांच करेगी। यह कार्रवाई बिहार की बहुचर्चित भर्ती परीक्षा घोटाले में निर्णायक मोड़ ला सकती है।


