
पटना: बिहार में मानसून की सक्रियता के बीच मौसम एक बार फिर करवट ले चुका है। राज्य के कई हिस्सों में लगातार बदलते मौसम ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने अगले 3 से 4 दिनों तक बिहार के मौसम को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार राज्य के 30 जिलों में तेज आंधी, बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। इनमें 4 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि 26 जिलों को येलो अलर्ट श्रेणी में रखा गया है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
मौसम विभाग के अनुसार बिहार में मानसून सक्रिय जरूर है, लेकिन इसकी गतिविधियां पूरे राज्य में समान रूप से नहीं दिख रही हैं। कुछ इलाकों में अच्छी बारिश हो रही है, जबकि कई क्षेत्रों में अब भी अपेक्षित वर्षा नहीं हो सकी है। फिलहाल जो मौसम प्रणाली सक्रिय हुई है, उसके प्रभाव से अगले कुछ दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जा सकती है। कई स्थानों पर तेज हवाएं भी चलेंगी, जिनकी रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आंधी और बिजली गिरने की घटनाएं इस दौरान अधिक हो सकती हैं। ऐसे में खुले मैदान, खेत, पेड़ के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े रहने से बचने की सलाह दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और किसानों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है, क्योंकि खेतों में काम के दौरान बिजली गिरने का खतरा सबसे अधिक होता है।
पिछले 24 घंटों की बात करें तो बिहार के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। राजधानी पटना समेत बेगूसराय, सीवान, मधेपुरा, सुपौल, गया, नालंदा, बगहा, जहानाबाद और पूर्णिया में बारिश ने तापमान में गिरावट दर्ज कराई। बारिश से जहां लोगों को गर्मी और उमस से कुछ राहत मिली, वहीं कई क्षेत्रों में जलजमाव और यातायात बाधित होने की स्थिति भी देखने को मिली।
हालांकि बारिश के बीच दुखद खबर भी सामने आई। बांका, बक्सर और औरंगाबाद जिलों में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में चार लोगों की मौत हो गई। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि बिजली गिरने का खतरा इस मौसम में कितना गंभीर हो सकता है। प्रशासन ने लोगों से मौसम खराब होने पर घरों में रहने और अनावश्यक बाहर न निकलने की अपील की है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 3 जुलाई को पटना समेत दक्षिण और मध्य बिहार के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहेगी। कुछ जिलों में बारिश की तीव्रता ज्यादा रहने की संभावना है। खासकर कैमूर, सासाराम और गया जैसे क्षेत्रों में तेज बारिश होने के संकेत मिले हैं। इन जिलों में निचले इलाकों में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
4 जुलाई से 6 जुलाई के बीच मौसम और अधिक सक्रिय हो सकता है। उत्तर बिहार और उत्तर-पूर्व बिहार के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। मुजफ्फरपुर, बगहा, मधेपुरा, सहरसा और गोपालगंज समेत कई क्षेत्रों में तेज वर्षा के साथ गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। नदियों के जलस्तर पर भी प्रशासन नजर बनाए हुए है, क्योंकि लगातार बारिश से कुछ इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका रहती है।
हालांकि मौजूदा बारिश के बावजूद जुलाई महीने को लेकर मौसम विभाग की चिंता कम नहीं हुई है। विभाग ने अनुमान जताया है कि पूरे जुलाई में बिहार में सामान्य से कम बारिश दर्ज हो सकती है। इसका सीधा असर खेती, जल संसाधनों और तापमान पर पड़ सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि महीने भर में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जिससे उमस बढ़ सकती है।
अनुमान के मुताबिक जुलाई में अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। तापमान में यह वृद्धि लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है, खासकर शहरी क्षेत्रों में जहां गर्मी और उमस का असर ज्यादा महसूस होता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी मौसम को लेकर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि बढ़ती उमस और तापमान के कारण हीट स्ट्रेस, डिहाइड्रेशन और मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। पर्याप्त पानी पीना, धूप से बचना और संतुलित आहार लेना इस दौरान बेहद जरूरी माना जा रहा है।
इस बदलते मौसम का सबसे बड़ा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है। जुलाई महीना बिहार में धान की रोपनी के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। यदि इस दौरान पर्याप्त बारिश नहीं होती, तो किसानों को सिंचाई के लिए भूजल पर निर्भर होना पड़ सकता है। इससे लागत बढ़ेगी और खेती प्रभावित हो सकती है। ग्रामीण इलाकों में किसान पहले से ही मानसून की अनिश्चितता को लेकर चिंतित हैं।
जून महीने के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले रहे हैं। बिहार में जून के दौरान सामान्य से लगभग 46 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी। यह कमी दर्शाती है कि मानसून अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया। यदि जुलाई में भी बारिश सामान्य से कम रही, तो इसका असर फसल उत्पादन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।
फिलहाल मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और समय-समय पर अपडेट जारी कर रहा है। प्रशासन ने जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन टीमों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। लोगों से अपील की गई है कि मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों को गंभीरता से लें और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें। अगले चार दिन बिहार के लिए मौसम के लिहाज से बेहद अहम रहने वाले हैं, क्योंकि यही अवधि तय करेगी कि मानसून राज्य में राहत लेकर आएगा या चिंता और बढ़ाएगा।


