बिहार की सड़कों पर ‘एआई’ का पहरा: 700 केंद्रों पर लगेगा आईटीएमएस सिस्टम; अब पलक झपकते कटेगा चालान, डीटीओ को नई साइटें खोजने का आदेश

पटना। बिहार की परिवहन व्यवस्था और सड़कों पर सुरक्षा के मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ी तकनीकी छलांग लगाने की तैयारी कर ली है। सुशासन की नई परिभाषा को सड़कों पर उतारने के लिए अब ‘इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम’ (ITMS) का जाल पूरे प्रदेश में बिछाया जाएगा। गुरुवार, 07 मई 2026 को परिवहन विभाग ने राज्य के सभी जिला परिवहन पदाधिकारियों (DTO) को एक कड़ा और स्पष्ट निर्देश जारी किया है। इसके तहत राज्य भर में लगभग 700 महत्वपूर्ण स्थानों की पहचान करने का कार्य युद्धस्तर पर शुरू करने को कहा गया है जहाँ इस अत्याधुनिक प्रणाली को स्थापित किया जाना है। विभाग का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं में भारी कमी लाना और यातायात नियमों के पालन को तकनीकी रूप से अनिवार्य बनाना है। राज्य परिवहन आयुक्त (STC) ने डीटीओ को निर्देश दिया है कि वे केवल पुराने या पहले से चयनित स्थलों तक सीमित न रहें, बल्कि यातायात के बदलते स्वरूप और बढ़ते दबाव को देखते हुए नए विकल्पों की तलाश करें। यह पहल बिहार की सड़कों को ‘स्मार्ट और सेफ’ बनाने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा निवेश और तकनीकी हस्तक्षेप माना जा रहा है।

डीटीओ को अल्टीमेटम: स्थल चयन में बरतें वैज्ञानिक दृष्टिकोण

​परिवहन विभाग ने आईटीएमएस परियोजना की गंभीरता को देखते हुए सभी जिला परिवहन पदाधिकारियों को स्थल पहचान की प्रक्रिया में गति लाने को कहा है। राज्य परिवहन आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि स्थलों का चयन केवल अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक डेटा और जमीनी हकीकत को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। डीटीओ को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने जिलों में उन चौराहों, मुख्य मार्गों और सड़कों की पहचान करें जहाँ वाहनों का घनत्व सबसे अधिक रहता है।

​इसके अलावा, विभाग ने उन ‘ब्लैक स्पॉट्स’ (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) को प्राथमिकता देने को कहा है जहाँ पिछले कुछ वर्षों में सबसे अधिक सड़क हादसे हुए हैं। स्थल चयन की इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने विशेष रूप से यह उल्लेख किया है कि डीटीओ को केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि उन्हें सड़कों पर उतरकर वास्तविक स्थिति का आकलन करना होगा। राज्य के सभी 38 जिलों में फैले ये 700 केंद्र भविष्य में बिहार की यातायात पुलिस और परिवहन विभाग के लिए तंत्रिका तंत्र (Nervous System) की तरह काम करेंगे।

ट्रैफिक पुलिस का विशेषज्ञ सहयोग: डेटा और प्रवर्तन का संगम

​आईटीएमएस प्रणाली की सफलता के लिए परिवहन विभाग और गृह विभाग (यातायात पुलिस) के बीच एक मजबूत समन्वय की रूपरेखा तैयार की गई है। विभाग ने यह अनिवार्य किया है कि नए स्थलों के चयन में संबंधित जिले की ट्रैफिक पुलिस की विशेषज्ञता का पूरा लाभ लिया जाए। चूंकि ट्रैफिक पुलिस सड़कों पर कानून व्यवस्था और प्रवर्तन (Enforcement) का सीधा जिम्मा संभालती है, इसलिए उनके पास यातायात के प्रवाह और नियमों के उल्लंघन के पैटर्न की सबसे सटीक जानकारी होती है।

​ट्रैफिक पुलिस के सहयोग से डीटीओ उन स्थानों को चिन्हित करेंगे जहाँ प्रवर्तन की आवश्यकता सबसे अधिक है। इसमें ओवरस्पीडिंग, बिना हेलमेट या सीटबेल्ट के वाहन चलाना, और गलत दिशा में ड्राइविंग जैसे अपराधों पर लगाम लगाना शामिल है। विभाग का मानना है कि पुलिस और परिवहन विभाग का यह संयुक्त प्रयास स्थल चयन में होने वाली मानवीय भूलों को कम करेगा और प्रणाली की उपयोगिता को बढ़ाएगा। इस रणनीतिक गठजोड़ का उद्देश्य एक ऐसी निगरानी प्रणाली विकसित करना है जिससे बचना किसी भी अपराधी या नियम तोड़ने वाले के लिए असंभव हो जाए।

एआई और चेहरे की पहचान: तकनीक से होगा नियमों का राज

​बिहार में लगने वाला आईटीएमएस सिस्टम केवल सामान्य सीसीटीवी कैमरों का समूह नहीं है, बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक एकीकृत प्लेटफॉर्म होगा। इस प्रणाली की सबसे बड़ी खूबी इसकी ‘चेहरे की पहचान’ (Facial Recognition) तकनीक होगी। इसके माध्यम से संदिग्ध अपराधियों, चोरी के वाहनों और बार-बार नियम तोड़ने वाले चालकों की पहचान सेकंडों में की जा सकेगी।

​एआई आधारित यह तंत्र स्वतः ही नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों का पता लगाएगा और तत्काल ई-चालान जेनरेट करेगा। इसमें मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी खत्म होगी। यह सिस्टम वाहनों की नंबर प्लेट को पढ़ने (ANPR) में सक्षम होगा, चाहे वाहन कितनी भी तेज रफ्तार में क्यों न हो। इसके अलावा, रेड लाइट जंप करने (RLVD) और निर्धारित सीमा से अधिक गति (Speeding) पर भी यह प्रणाली चौबीसों घंटे पैनी नजर रखेगी। विभाग के अनुसार, इन 700 केंद्रों के सक्रिय होने के बाद सड़कों पर पुलिस की भौतिक उपस्थिति कम होने के बावजूद नियमों का पालन अधिक कड़ाई से होगा।

दुर्घटनाओं में कमी और सड़क सुरक्षा का नया युग

​बिहार के लिए आईटीएमएस केवल एक तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि एक जीवनरक्षक मिशन है। राज्य में हर साल हजारों लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवाते हैं। इनमें से अधिकांश दुर्घटनाएं तेज रफ्तार और नियमों की अनदेखी के कारण होती हैं। आईटीएमएस के तहत चयनित होने वाले 700 स्थल विशेष रूप से उन हाई-स्पीड कॉरिडोर और राष्ट्रीय राजमार्गों के मिलन स्थलों पर होंगे जहाँ हादसों का जोखिम सर्वाधिक होता है।

​परिवहन विभाग का विजन ‘जीरो एक्सीडेंट’ की दिशा में कदम बढ़ाना है। आईटीएमएस के माध्यम से यातायात के घनत्व का वास्तविक समय (Real-time) विश्लेषण किया जा सकेगा, जिससे जाम की स्थिति में वैकल्पिक रास्तों का सुझाव देना और आपातकालीन सेवाओं (जैसे एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड) को सुगम रास्ता उपलब्ध कराना आसान होगा। यह प्रणाली सड़कों पर सुरक्षा के प्रति एक मनोवैज्ञानिक दबाव भी पैदा करेगी, क्योंकि वाहन चालकों को पता होगा कि हर चौराहे पर तकनीक की नजर उन पर बनी हुई है।

प्रवर्तन की आवश्यकता और भविष्य की चुनौतियां

​आईटीएमएस के लिए नए स्थलों की तलाश इस बात का भी संकेत है कि बिहार के शहरों का विस्तार तेजी से हो रहा है। पुराने चयनित स्थल अब बढ़ती आबादी और नए व्यावसायिक क्षेत्रों के दबाव को झेलने में सक्षम नहीं हैं। विभाग ने डीटीओ को यह भी निर्देश दिया है कि वे उन उभरते हुए शहरी क्षेत्रों को भी शामिल करें जहाँ भविष्य में यातायात बढ़ने की संभावना है।

​प्रवर्तन की आवश्यकता वाले क्षेत्रों में विशेष रूप से व्यावसायिक केंद्रों, स्कूलों के आसपास के इलाकों और भीड़भाड़ वाले बाजारों को प्राथमिकता दी जा रही है। इस पूरी प्रणाली को राज्य मुख्यालय में स्थित एक एकीकृत कमांड और कंट्रोल सेंटर (ICCC) से जोड़ा जाएगा, जहाँ से हर जिले की यातायात व्यवस्था की लाइव मॉनिटरिंग की जा सकेगी। हालांकि, इस विशाल नेटवर्क के लिए बिजली की निरंतर आपूर्ति और हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसी चुनौतियां भी हैं, जिनके लिए विभाग अन्य संबंधित विभागों के साथ मिलकर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में जुटा है।

​परिवहन विभाग के इस क्रांतिकारी कदम से न केवल सरकारी खजाने में चालान के माध्यम से राजस्व की वृद्धि होगी, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिहार की सड़कों पर चलने वाला हर नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस कर सकेगा। डीटीओ को दी गई समय सीमा और ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर स्थल चयन की प्रक्रिया यह सुनिश्चित करेगी कि बिहार का यह नया ‘ट्रैफिक सुरक्षा कवच’ जल्द ही हकीकत बनेगा। अब बिहार की सड़कों पर नियम तोड़ना न केवल महंगा पड़ेगा, बल्कि तकनीक के इस घेरे से बच निकलना लगभग नामुमकिन होगा।

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