बिहार को मिलेगा नया हाई-स्पीड कॉरिडोर, बक्सर से भागलपुर तक बनेगा 350 किलोमीटर लंबा छह लेन एक्सप्रेसवे

बिहार में बक्सर से भागलपुर तक प्रस्तावित छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे परियोजना अब अगले चरण में पहुंच गई है। बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीएसआरडीसीएल) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराने को लेकर कंसल्टेंसी एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

राज्य के पश्चिमी और पूर्वी हिस्से को हाई-स्पीड सड़क नेटवर्क से जोड़ने वाली इस परियोजना को बिहार की सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना योजनाओं में शामिल माना जा रहा है। एक्सप्रेसवे बनने के बाद बक्सर से भागलपुर तक की यात्रा का समय करीब आधा हो जाएगा। अभी जहां इस दूरी को तय करने में लगभग नौ घंटे लगते हैं, वहीं भविष्य में यह सफर करीब चार घंटे में पूरा किया जा सकेगा।

डीपीआर तैयार करने के लिए छह महीने का समय

बीएसआरडीसीएल ने डीपीआर तैयार कराने के लिए कंसल्टेंसी एजेंसियों से निविदा आमंत्रित की है। चयनित एजेंसी को हर हाल में छह महीने के भीतर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर निगम को सौंपनी होगी।

परियोजना को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के लिए निगम ट्रांजक्शन एडवाइजर की भी नियुक्ति करेगा। यह एजेंसी परियोजना से जुड़े वित्तीय, तकनीकी और संविदा संबंधी मामलों में सहायता करेगी, ताकि निर्माण प्रक्रिया बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सके।

350 किलोमीटर लंबा होगा हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे

प्रस्तावित बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे की लंबाई करीब 350 किलोमीटर होगी। यह हाई-स्पीड कॉरिडोर बक्सर से शुरू होकर आरा, पटना, मोकामा और मुंगेर होते हुए भागलपुर तक पहुंचेगा।

परियोजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग-922, राष्ट्रीय राजमार्ग-31 और राष्ट्रीय राजमार्ग-33 के कुछ हिस्सों का चौड़ीकरण किया जाएगा और उन्हें चार लेन से बढ़ाकर छह लेन तक विकसित किया जाएगा।

यह पूरी तरह एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे होगा, जहां प्रवेश और निकास को नियंत्रित किया जाएगा। इससे वाहनों की रफ्तार बढ़ेगी और सड़क दुर्घटनाओं की संभावना भी कम होगी।

यात्रियों को मिलेगा बड़ा फायदा, समय और ईंधन की होगी बचत

इस एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा लाभ आम लोगों और परिवहन क्षेत्र को मिलेगा। वर्तमान में बक्सर से भागलपुर की यात्रा लंबी और समय लेने वाली है, लेकिन बेहतर सड़क और नियंत्रित यातायात व्यवस्था के कारण यह दूरी करीब चार घंटे में पूरी की जा सकेगी।

यात्रा समय कम होने से ईंधन की खपत में भी कमी आएगी। इसका सीधा फायदा निजी वाहन चालकों, बस संचालकों, ट्रांसपोर्ट कंपनियों और मालवाहक वाहनों को मिलेगा। परिवहन लागत घटने से व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।

उद्योग और व्यापार के लिए खुलेगा विकास का नया रास्ता

बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि बिहार के आर्थिक विकास का नया गलियारा साबित हो सकता है।

पश्चिम और पूर्व बिहार के बीच तेज संपर्क स्थापित होने से कृषि उत्पादों, औद्योगिक सामान और अन्य वस्तुओं की ढुलाई पहले की तुलना में कम समय में संभव हो सकेगी। इससे लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और उद्योगों को नए बाजार तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।

मुंगेर, भागलपुर, मोकामा, पटना और आरा जैसे प्रमुख शहरों की कनेक्टिविटी मजबूत होने से नए निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क नेटवर्क किसी भी क्षेत्र के औद्योगिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

5 अगस्त को खुलेगी तकनीकी बिड

बीएसआरडीसीएल की ओर से जारी निविदा के अनुसार, निविदा दस्तावेज डाउनलोड करने की अवधि 16 जुलाई से 5 अगस्त तक निर्धारित की गई है।

प्री-प्रपोजल बैठक 27 जुलाई को आयोजित होगी। इसके बाद 5 अगस्त को तकनीकी बिड खोली जाएगी। तकनीकी मूल्यांकन पूरा होने के बाद पात्र एजेंसियों की वित्तीय बिड खोली जाएगी।

सबसे उपयुक्त और कम दर देने वाली एजेंसी का चयन कर उसे डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। यदि पूरी प्रक्रिया तय समय पर पूरी होती है तो अगस्त से परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का काम शुरू हो जाएगा।

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