बिहार में गन्ना किसानों को बड़ी राहत, खरीदे गए गन्ने की पूरी राशि का हुआ शत-प्रतिशत भुगतान

बिहार के गन्ना किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार की पहल और गन्ना उद्योग विभाग की लगातार निगरानी के परिणामस्वरूप पेराई सत्र 2025-26 के दौरान किसानों से खरीदे गए गन्ने का शत-प्रतिशत भुगतान पूरा कर दिया गया है। विभाग के अनुसार राज्य की सभी संचालित चीनी मिलों ने किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का पूरा भुगतान कर दिया है। इससे हजारों गन्ना उत्पादक किसानों को आर्थिक मजबूती मिली है और आगामी खेती की तैयारियों के लिए समय पर धन उपलब्ध हो सका है।

गन्ना उद्योग विभाग के मुताबिक राज्य में संचालित दस चीनी मिलों ने पेराई सत्र 2025-26 के दौरान किसानों से बड़े पैमाने पर गन्ने की खरीद की थी। यह खरीद नौ अप्रैल 2026 तक जारी रही, जिसके दौरान कुल 572.66 लाख क्विंटल गन्ना किसानों से खरीदा गया। इस गन्ने के बदले किसानों को देय पूरी राशि का भुगतान अब सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। विभाग का कहना है कि समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए पूरे सत्र के दौरान लगातार समीक्षा और निगरानी की गई।

गन्ना किसानों के लिए समय पर भुगतान लंबे समय से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। कई बार भुगतान में देरी होने से किसानों को खेती की अगली फसल, उर्वरक, बीज, सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों के लिए आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पेराई सत्र शुरू होने के साथ ही सभी चीनी मिलों को स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि किसानों को गन्ने का मूल्य निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराया जाए।

विभाग के अधिकारियों ने बताया कि चीनी मिलों को शुरुआत से ही यह निर्देश दिया गया था कि गन्ना खरीद के साथ-साथ भुगतान प्रक्रिया भी नियमित रूप से जारी रखी जाए। इसके लिए विभागीय स्तर पर लगातार रिपोर्ट ली जाती रही और प्रत्येक मिल की भुगतान स्थिति की समीक्षा की गई। जिन मिलों में भुगतान की गति अपेक्षाकृत धीमी थी, वहां आवश्यक निर्देश जारी किए गए ताकि किसी भी किसान को अनावश्यक रूप से इंतजार न करना पड़े।

सरकार का मानना है कि कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए किसानों को उनकी उपज का समय पर उचित मूल्य मिलना बेहद जरूरी है। यदि भुगतान में देरी होती है तो उसका सीधा असर किसानों की आय और अगली फसल की तैयारी पर पड़ता है। इसी कारण इस बार भुगतान प्रक्रिया को प्राथमिकता देते हुए विभाग ने नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था लागू की।

गन्ना उद्योग विभाग के अनुसार पेराई सत्र 2025-26 में खरीदे गए गन्ने के बदले किसानों को देय पूरी राशि का भुगतान कर दिया गया है। विभाग का कहना है कि यह उपलब्धि सरकार, विभाग और चीनी मिलों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की गई, जिससे किसी प्रकार की लंबित देनदारी नहीं रही।

चीनी मिल संचालकों ने भी इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई। विभाग के अनुसार सभी मिलों ने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए भुगतान में तेजी दिखाई और निर्धारित समय के भीतर बकाया राशि किसानों के खातों में भेजने का प्रयास किया। यही कारण रहा कि इस बार गन्ना मूल्य का शत-प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित किया जा सका।

विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर भुगतान मिलने से किसानों का भरोसा चीनी उद्योग पर और मजबूत होगा। इससे भविष्य में अधिक किसान गन्ने की खेती के लिए प्रोत्साहित होंगे, जिसका सकारात्मक प्रभाव राज्य के चीनी उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों पर देखने को मिल सकता है। गन्ना एक नकदी फसल है और इसकी खेती से जुड़े किसानों के लिए समय पर भुगतान सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता होती है।

राज्य सरकार लगातार इस दिशा में प्रयास कर रही है कि कृषि क्षेत्र में किसानों को किसी भी प्रकार की वित्तीय परेशानी का सामना न करना पड़े। इसी उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं के साथ-साथ फसल खरीद और भुगतान व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। गन्ना उद्योग विभाग का कहना है कि भविष्य में भी भुगतान प्रक्रिया की इसी तरह नियमित निगरानी जारी रहेगी, ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसानों को समय पर उनकी उपज का मूल्य मिल जाता है तो वे आधुनिक खेती, बेहतर बीज, उन्नत तकनीक और सिंचाई सुविधाओं में अधिक निवेश कर पाते हैं। इससे कृषि उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ किसानों की आय में भी वृद्धि होती है। गन्ना उत्पादन वाले क्षेत्रों में इसका सीधा लाभ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलता है।

बिहार के कई जिलों में बड़ी संख्या में किसान गन्ने की खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में भुगतान की यह प्रक्रिया उनके लिए आर्थिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। समय पर राशि मिलने से किसान अपनी पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ अगली फसल की तैयारी भी बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय दबाव के कर सकेंगे।

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी किसानों के भुगतान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए चीनी मिलों की कार्यप्रणाली पर नियमित नजर रखी जाएगी और आवश्यकतानुसार निर्देश जारी किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य समय पर मिले और उन्हें भुगतान के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।

गन्ना उद्योग विभाग की इस पहल को किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। समयबद्ध भुगतान व्यवस्था न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी, बल्कि राज्य में गन्ना उत्पादन और चीनी उद्योग के विकास को भी नई गति देगी। सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से किसानों का विश्वास और बढ़ेगा तथा आने वाले पेराई सत्रों में भी भुगतान प्रक्रिया इसी तरह सुचारु रूप से संचालित होती रहेगी।

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