
पटना, 21 मई 2026। बिहार में बढ़ती महंगाई के बीच आम उपभोक्ताओं को एक और बड़ा झटका लगा है। राज्य की प्रमुख डेयरी ब्रांड सुधा ने दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। नई दरें 22 मई 2026 यानी शुक्रवार से पूरे बिहार में लागू होंगी। कीमतों में वृद्धि के बाद अब उपभोक्ताओं को हर लीटर दूध के लिए पहले की तुलना में अधिक पैसे खर्च करने होंगे। इस फैसले का सीधा असर लाखों परिवारों की रसोई और मासिक बजट पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड यानी कॉम्फेड की ओर से जारी नई दरों के अनुसार विभिन्न प्रकार के दूध के दामों में 2 से 3 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की गई है। डेयरी प्रबंधन का कहना है कि लगातार बढ़ती उत्पादन लागत, पशुचारा की महंगाई, ट्रांसपोर्ट खर्च और वितरण व्यवस्था पर बढ़ते आर्थिक दबाव के कारण यह फैसला लेना आवश्यक हो गया था।
नई कीमतों के मुताबिक सुधा गोल्ड फुल क्रीम दूध अब 65 रुपये की जगह 67 रुपये प्रति लीटर मिलेगा। वहीं सुधा शक्ति दूध की कीमत 57 रुपये से बढ़ाकर 59 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। इसके अलावा सुधा काऊ मिल्क की कीमत भी बढ़ा दी गई है और अब यह 54 रुपये की जगह 56 रुपये प्रति लीटर मिलेगा। हालांकि डेयरी प्रबंधन ने राहत देते हुए कहा है कि फिलहाल घी, दही, लस्सी, पेड़ा और अन्य डेयरी उत्पादों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
दूध की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी का असर सबसे ज्यादा मध्यम वर्ग और रोजाना दूध खरीदने वाले परिवारों पर पड़ सकता है। शहरों और कस्बों में ऐसे लाखों परिवार हैं जिनकी दिनचर्या दूध पर आधारित है। सुबह की चाय से लेकर बच्चों के पोषण और घरेलू भोजन तक में दूध की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में लगातार बढ़ती कीमतों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दूध की कीमतों में वृद्धि का प्रभाव केवल सीधे उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे चाय, मिठाई, दही, पनीर और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। होटल, रेस्तरां और मिठाई व्यवसाय से जुड़े लोग भी बढ़ी हुई लागत का सामना करेंगे, जिसका असर बाजार कीमतों में दिखाई दे सकता है।
कॉम्फेड अधिकारियों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में पशुचारा, डीजल और परिवहन खर्च में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा डेयरी संचालन और वितरण प्रणाली की लागत भी काफी बढ़ गई है। संस्था का कहना है कि किसानों को उचित भुगतान और डेयरी व्यवस्था को संतुलित बनाए रखने के लिए दूध की कीमतों में संशोधन करना जरूरी हो गया था।
डेयरी क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि दूध उत्पादन में सबसे बड़ा खर्च पशुचारा पर आता है। हाल के समय में चारे की कीमतों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। गर्मी के कारण हरे चारे की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ी है। इसके अलावा ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन पर भी पड़ा है।
बिहार में सुधा दूध की मजबूत बाजार पकड़ है और लाखों लोग रोजाना इस ब्रांड का उपयोग करते हैं। ऐसे में कीमतों में हुई वृद्धि का व्यापक असर देखने को मिल सकता है। कई उपभोक्ताओं ने सोशल मीडिया और स्थानीय बाजारों में इस फैसले पर चिंता जताई है। लोगों का कहना है कि पहले से ही खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हुई हैं और अब दूध महंगा होने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य महंगाई का असर सबसे अधिक मध्यम और निम्न आय वर्ग पर पड़ता है। दूध जैसी रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ने से परिवारों को अपने मासिक खर्चों में बदलाव करना पड़ सकता है। कई परिवारों को अन्य खर्चों में कटौती करनी पड़ सकती है ताकि बढ़े हुए दूध के दामों का असर संभाला जा सके।
सुधा से पहले देश की अन्य बड़ी डेयरी कंपनियां भी दूध की कीमतों में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। अमूल ने हाल ही में अपने कई दूध उत्पादों के दाम बढ़ाए थे। अमूल गोल्ड, स्टैंडर्ड दूध, टी स्पेशल और गाय के दूध की कीमतों में प्रति लीटर लगभग दो रुपये तक की वृद्धि की गई थी। इसी तरह मदर डेयरी ने भी उत्पादन लागत बढ़ने का हवाला देते हुए कीमतों में संशोधन किया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि डेयरी उद्योग इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। जलवायु परिवर्तन, गर्मी का बढ़ता असर, पशुओं के स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और चारे की कमी जैसे कारण उत्पादन पर असर डाल रहे हैं। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई का प्रभाव स्थानीय बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है।
दूध उत्पादकों का कहना है कि यदि किसानों को समय पर उचित मूल्य नहीं मिलेगा तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है। डेयरी उद्योग किसानों और उपभोक्ताओं के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता है। हालांकि उपभोक्ताओं की नजर से देखें तो लगातार बढ़ती कीमतें चिंता का विषय बनती जा रही हैं।
बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में यदि उत्पादन लागत में और वृद्धि होती है तो अन्य डेयरी उत्पादों की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि फिलहाल सुधा डेयरी ने घी, दही और अन्य उत्पादों की कीमत स्थिर रखने का फैसला लिया है।
राज्य में दूध की बढ़ती कीमतों को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चा भी शुरू हो गई है। आम लोगों की उम्मीद है कि सरकार और डेयरी कंपनियां आगे कीमतों को नियंत्रित रखने की दिशा में कदम उठाएंगी। वहीं डेयरी प्रबंधन का कहना है कि उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाला दूध उपलब्ध कराने और किसानों के हितों की रक्षा के लिए संतुलित निर्णय लेना जरूरी है।
महंगाई के इस दौर में दूध की कीमतों में हुई यह बढ़ोतरी आम परिवारों के बजट पर नया दबाव लेकर आई है। अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले समय में अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर इसका कितना असर पड़ता है और डेयरी कंपनियां भविष्य में क्या रणनीति अपनाती हैं।


