
पटना, 23 मई 2026। बिहार के घरेलू रसोई बजट और आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डालने वाली एक बड़ी आर्थिक खबर सामने आई है। बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (COMFED) ने अपने सबसे लोकप्रिय ब्रांड ‘सुधा’ के दूध और उससे निर्मित होने वाले तमाम डेयरी उत्पादों की कीमतों में प्रखर बढ़ोतरी करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।
कॉम्फेड प्रबंधन द्वारा जारी विलेख के अनुसार, दूध की ये संशोधित और बढ़ी हुई नई दरें 25 मई 2026 से संपूर्ण बिहार के सभी प्रक्षेपों, वितरण काउंटरों और खुदरा आउटलेट्स पर पूरी कड़ाई से लागू हो जाएंगी। इस फैसले के तहत केवल नियमित दूध ही महंगा नहीं हुआ है, बल्कि आम लोगों की दैनिक जीवन शैली का हिस्सा बन चुके घी, पनीर, मक्खन, दही, लस्सी और विभिन्न पारंपरिक मिठाइयों के विन्यास में भी भारी मूल्य वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों के मासिक बजटीय समीकरण पूरी तरह से प्रभावित होने तय माने जा रहे हैं।
दूध की नई दरों का पूरा विन्यास: विभिन्न श्रेणियों में ₹1 से ₹3 तक की बढ़ोतरी
बिहार के शहरी और ग्रामीण प्रक्षेपों में सुधा ब्रांड के दूध की मांग सबसे सर्वोपरि संधारित रहती है। कॉम्फेड द्वारा जारी की गई नई समय सारणी और रेट चार्ट के अनुसार, दूध की प्रत्येक श्रेणी के भीतर 500 मिलीलीटर (आधा लीटर) और 1 लीटर के पैकेटों पर कीमतों का नया ग्राफ लाइव कर दिया गया है। दूध के प्रमुख वैरिएंट्स में हुए मूल्य संशोधनों का विस्तृत विवरण नीचे दिए गए विनिर्देश के अनुसार है:
- सुधा गोल्ड (हाई फैट मिल्क): उपभोक्ताओं के बीच सबसे अधिक पसंद किए जाने वाले सुधा गोल्ड के 500 मिलीलीटर पैकेट की कीमत अब ₹33 से बढ़ाकर ₹35 मुकम्मल कर दी गई है। वहीं, इसके 1 लीटर के पैकेट को प्राप्त करने के लिए उपभोक्ताओं को अब विधिक रूप से ₹68 की सांख्यिकी का भुगतान करना होगा।
- सुधा शक्ति टोंड: दैनिक चाय और सामान्य उपयोग में आने वाले सुधा शक्ति के 500 मिलीलीटर पैकेट की दर को ₹27 से बढ़ाकर ₹28 कर दिया गया है, जबकि इसके 1 लीटर के पैकेट का नया मूल्य विन्यास अब ₹55 संधारित किया गया है।
- सुधा स्टैंडर्ड: सुधा स्टैंडर्ड दूध की कीमत में भी प्रखर इजाफा दर्ज किया गया है। इसके 500 मिलीलीटर के पैकेट की कीमत ₹29 से बढ़ाकर अब सीधे ₹31 निर्धारित की गई है, जबकि इसका 1 लीटर का पैक अब बाजार में ₹60 की कीमत पर लाइव रहेगा।
- सुधा गाय दूध (काउ मिल्क): छोटे बच्चों और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से उपयोगी माने जाने वाले गाय के शुद्ध दूध की कीमतों में भी बदलाव हुआ है। इसका 500 मिलीलीटर का पैकेट अब ₹28 के स्थान पर ₹29 में मिलेगा, और 1 लीटर के विन्यास के लिए ₹57 खर्च करने होंगे।
- सुधा टी स्पेशल: कनिष्ठ व वरिष्ठ चाय दुकानदारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए आने वाले टी स्पेशल दूध के 500 मिलीलीटर पैकेट की कीमत ₹26 से बढ़ाकर ₹27 कर दी गई है, और इसका 1 लीटर का पैकेट अब ₹52 के स्तर पर ब्लॉक किया गया है।
घी, पनीर और बटर के शौकीनों को लगेगा झटका: ₹7 से ₹35 तक का भारी उछाल
दूध के पैकेटों के समानांतर, सुधा के प्रीमियम डेयरी प्रोडक्ट्स के विन्यास को भी महंगाई के दायरे में प्रविष्ट करा दिया गया है। शादी-ब्याह के सीजन और घरेलू व्यंजनों के मुख्य अवयव माने जाने वाले इन उत्पादों के दामों में न्यूनतम ₹7 से लेकर अधिकतम ₹35 तक की प्रखर वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस प्रकार है:
- सुधा शुद्ध घी: मध्यमवर्गीय परिवारों के किचन का मुख्य हिस्सा माने जाने वाले सुधा घी के 1 लीटर के पैक की कीमत अब ₹315 से सीधे बढ़ाकर ₹325 मुकम्मल कर दी गई है, यानी सीधे ₹10 का वित्तीय भार डाइवर्ट किया गया है।
- सुधा पनीर: रेस्टोरेंट संचालकों और शाकाहारी उपभोक्ताओं के प्रिय उत्पाद सुधा पनीर के 200 ग्राम वाले पैकेट की कीमत ₹85 से बढ़ाकर अब ₹95 निर्धारित की गई है, जिससे प्रति पैकेट ₹10 की सीधी बढ़ोतरी लाइव दर्ज हुई है।
- टेबल बटर: नाश्ते की मेज पर इस्तेमाल होने वाले टेबल बटर के 500 ग्राम के बड़े पैक के मूल्य में सबसे प्रखर उछाल आया है। इसकी कीमत ₹270 से सीधे बढ़ाकर ₹305 कर दी गई है, जिससे उपभोक्ताओं पर सीधे ₹35 का बजटीय बोझ बढ़ेगा।
- व्हाइट बटर: सुधा व्हाइट बटर का 100 ग्राम का छोटा पैकेट अब ₹55 के स्थान पर ₹62 की नई कीमत पर बाजार में सप्लायर किया जाएगा।
गर्मी के सीजन में दही, लस्सी और फ्लेवर्ड ड्रिंक्स का जायका भी हुआ महंगा
वर्तमान समय में संपूर्ण बिहार के भीतर अत्यधिक भीषण गर्मी और पारे का प्रखर संचरण लाइव देखा जा रहा है। ऐसे में शरीर को शीतलता हस्तगत कराने वाले दही, लस्सी और मस्तानी जैसे पेय पदार्थों के दामों में की गई यह वृद्धि आम राहगीरों और उपभोक्ताओं के पॉकेट मनी को आंशिक रूप से प्रभावित करेगी:
- सुधा दही: रोजमर्रा के भोजन का मुख्य अंग माने जाने वाले 1 किलोग्राम (1 किलो) सुधा दही के पैकेट की कीमत अब ₹72 से बढ़ाकर सीधे ₹78 कर दी गई है।
- सुधा लस्सी: आम लोगों को न्यूनतम दर पर राहत देने वाली 140 मिलीलीटर (140 ml) की साधारण लस्सी की कीमत अब ₹10 से बढ़ाकर ₹12 कर दी गई है।
- सुधा मैंगो लस्सी: फ्लेवर्ड मैंगो लस्सी के शौकीनों को अब प्रति पैक ₹12 के स्थान पर ₹15 की सांख्यिकी का भुगतान करना होगा।
- सुधा मस्तानी ड्रिंक: 140 मिलीलीटर क्षमता वाले मस्तानी ड्रिंक की कीमत को भी ₹12 से बढ़ाकर ₹15 के स्तर पर लॉक कर दिया गया है।
- मिल्क केक और पेड़ा: सुधा के विख्यात पेड़ा और मिल्क केक के 250 ग्राम वाले पैकेट की कीमत अब ₹108 से बढ़ाकर सीधे ₹125 निर्धारित की गई है, जिससे इसके शौकीनों को प्रति पैकेट ₹17 अतिरिक्त देने होंगे।
मीठा खाना भी हुआ दूभर: रसगुल्ला, गुलाब जामुन और बालूशाही के दाम बढ़े
कॉम्फेड ने अपने पैक्ड स्वीट्स पोर्टफोलियो के भीतर भी कीमतों को संशोधित करने का कड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। इसके तहत त्योहारों और मांगलिक अवसरों पर उपहार के रूप में डाइवर्ट किए जाने वाले मिठाई के डिब्बों की दरें निम्नलिखित रूप से बदल गई हैं:
- गुलाब जामुन (1 किलो टिन): चाशनी से आकंठ भरे सुधा गुलाब जामुन के 1 किलोग्राम वाले सीलबंद टिन पैकेट की कीमत अब ₹240 से बढ़ाकर ₹250 कर दी गई है।
- रसगुल्ला (1 किलो टिन): बंगाली रसगुल्ले के 1 किलोग्राम वाले टिन डिब्बे का नया मूल्य विन्यास अब ₹220 से सीधे बढ़ाकर ₹240 के स्तर पर प्रविष्ट कराया गया है, यानी सीधे ₹20 की वृद्धि हुई है।
- सुधा बालूशाही: पारंपरिक मिठाई बालूशाही की कीमत को भी ₹230 से बढ़ाकर ₹250 प्रति किलोग्राम मुकम्मल कर दिया गया है।
पशुपालकों को बेहतर मूल्य हस्तांतरण बनाम इनपुट लागत का बढ़ता दबाव: कॉम्फेड का विलेख
इस चौतरफा मूल्य वृद्धि के पीछे छिपे अंतर्निहित कारणों और आर्थिक विन्यासों पर प्रकाश डालते हुए कॉम्फेड प्रशासन ने एक विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। फेडरेशन के आला कप्तानों के अनुसार, यह निर्णय किसी व्यावसायिक मुनाफे के वास्ते नहीं लिया गया है, बल्कि वर्तमान समय में डेयरी उद्योग के समक्ष संधारित हो रहे कतिपय अपरिहार्य इनपुट लागत के दबावों को संतुलित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
कॉम्फेड ने अपनी विरणी में स्पष्ट किया है कि ग्रामीण अंचलों में दूध का उत्पादन करने वाले लाखों पशुपालकों और किसानों के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए समिति ने उनके द्वारा खरीदे जाने वाले कच्चे दूध (प्रोक्योरमेंट प्राइस) की विधिक दरों में ₹2 से लेकर ₹3.13 प्रति लीटर तक का प्रखर इजाफा किया है। जब तक किसानों को दूध का बेहतर और कड़ा मूल्य हस्तगत नहीं कराया जाएगा, तब तक राज्य के भीतर श्वेत क्रांति के सांगठनिक ढांचे को सुदृढ़ बनाए रखना पूरी तरह से असंभव संधारित होगा।
इसके समानांतर, कॉम्फेड ने अन्य ऑपरेशनल और लॉजिस्टिक्स विन्यासों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले कतिपय महीनों के भीतर वैश्विक और घरेलू स्तर पर पैकेजिंग मैटेरियल्स (पॉलीथिन और टिन केंटेनर्स) के दामों में सांख्यिकीय वृद्धि दर्ज की गई है। बिजली की दरों के संशोधित होने, शीतलन संयंत्रों (चिलिंग प्लांट्स) के संचालन खर्च में बढ़ोतरी होने और इसके साथ ही पेट्रोल व डीजल की कीमतों के ऊंचे स्तर पर संधारित होने के कारण भागलपुर, पटना, मुजफ्फरपुर और गया जैसे मुख्य केंद्रों से सुदूर ग्रामीण बूथों तक दूध की रसद आपूर्ति करने वाले ट्रांसपोर्टेशन सिंडिकेट की ऑपरेशनल लागत काफी बढ़ चुकी है।
फेडरेशन के कप्तानों का कहना है कि इन सभी बढ़ते खर्चों के बजटीय बोझ को लंबे समय तक आंतरिक रूप से अवशोषित करना और वित्तीय मार्जिन को ब्लॉक रखना पूरी तरह से असंभव हो रहा था, जिसके कारण विवश होकर उत्पादन लागत का एक आंशिक हिस्सा बाजार और रिटेल उपभोक्ताओं की प्रविष्टि पर डाइवर्ट करना पूरी तरह से विधिक रूप से अपरिहार्य हो गया था। उपभोक्ताओं को 25 मई की सुबह से ही बूथों पर जाने के दौरान इन नए रेटों के अनुसार ही भुगतान मुकम्मल करना होगा, जिसके लिए सभी कनिष्ठ वितरकों को नए मूल्य विन्यास की पट्टियां काउंटरों पर मुस्तैद करने का विनिर्देश जारी कर दिया गया है।


