“पति दवा खाकर करता है हैवानियत…” बिहार महिला आयोग पहुंची पत्नी की गुहार, बोली- अब उनके साथ नहीं रहना

पटना। बिहार में घरेलू हिंसा और वैवाहिक प्रताड़ना का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। बिहार राज्य महिला आयोग में पहुंची एक महिला ने अपने पति पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह नशीली दवाएं खाकर उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाता है, विरोध करने पर बेरहमी से मारपीट करता है और रातभर उसे प्रताड़ित करता है।

महिला ने आयोग के सामने साफ शब्दों में कहा कि अब वह किसी भी हालत में अपने पति के साथ नहीं रहना चाहती। पीड़िता का कहना है कि उसके पति की हरकतों ने उसका मानसिक और शारीरिक जीवन पूरी तरह बर्बाद कर दिया है।

यह मामला सामने आने के बाद महिला आयोग ने इसे गंभीरता से लिया है और दोनों पक्षों को सुनने के बाद फिलहाल पति को सुधार का एक मौका देने का फैसला किया है। हालांकि आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि व्यवहार में सुधार नहीं हुआ तो आगे सख्त कार्रवाई की जाएगी।

शादी के बाद खुला पति के नशे का राज

जानकारी के मुताबिक, मामला बिहार के परसा थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। पीड़िता ने महिला आयोग को दिए आवेदन में बताया कि उसकी शादी वर्ष 2015 में हुई थी। शादी के बाद शुरुआती कुछ महीने सामान्य रहे, लेकिन धीरे-धीरे पति का असली चेहरा सामने आने लगा।

महिला के अनुसार, शादी के समय ससुराल पक्ष ने यह बात छिपाई थी कि उसका पति नशे का आदी है और उसे पहले नशा मुक्ति केंद्र में भी भर्ती कराया जा चुका है।

पीड़िता ने बताया कि शादी के करीब एक साल बाद पति का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। वह अक्सर नशे की हालत में घर आता और उसके साथ मारपीट करता। महिला का आरोप है कि उसका पति नशीली दवाएं खाने के बाद उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाता था और पूरी रात प्रताड़ित करता था।

विरोध करने पर होती थी बेरहमी से पिटाई

महिला ने आयोग को बताया कि जब भी वह पति की हरकतों का विरोध करती, उसे बुरी तरह पीटा जाता। कई बार उसके शरीर पर गंभीर चोटें आईं, लेकिन समाज और परिवार की बदनामी के डर से वह लंबे समय तक चुप रही।

पीड़िता का कहना है कि हर रात उसके लिए किसी भयावह सपने से कम नहीं होती थी। पति नशे में हिंसक हो जाता और सुबह होने पर माफी मांगकर मामला खत्म करने की कोशिश करता।

महिला ने यह भी कहा कि पति के इस व्यवहार का असर अब बच्चों पर भी पड़ने लगा था। घर का माहौल लगातार तनावपूर्ण रहने लगा था।

बेटी की सुरक्षा को लेकर डरी मां

पीड़िता ने आयोग को बताया कि उसकी एक 11 वर्षीय बेटी और 5 साल का बेटा है। महिला ने कहा कि जैसे-जैसे बेटी बड़ी हो रही थी, उसकी चिंता और बढ़ती जा रही थी।

महिला ने आशंका जताई कि घर का माहौल बच्चों के मानसिक विकास पर गलत असर डाल रहा है। उसने कहा कि उसे डर सताने लगा था कि कहीं भविष्य में कोई बड़ी अनहोनी न हो जाए।

इसी डर और लगातार हो रही प्रताड़ना से परेशान होकर महिला अपने दोनों बच्चों को लेकर मायके चली गई।

आयोग के सामने पति ने मानी गलती

मामले की सुनवाई के दौरान महिला के पति को भी आयोग के सामने पेश किया गया। पति ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि वह पहले नशे की लत का शिकार था, लेकिन अब वह बदलना चाहता है।

उसने आयोग से कहा कि वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ दोबारा सामान्य जीवन बिताना चाहता है और उसे सुधार का एक मौका दिया जाए।

पति ने यह भी दावा किया कि उसने अब नशा छोड़ दिया है और भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी।

महिला साथ रहने को नहीं थी तैयार

महिला आयोग की अध्यक्ष प्रोफेसर अप्सरा ने बताया कि पीड़िता किसी भी हालत में अपने पति के साथ रहने को तैयार नहीं थी। महिला लगातार कह रही थी कि उसने वर्षों तक प्रताड़ना झेली है और अब उसका विश्वास पूरी तरह टूट चुका है।

हालांकि आयोग ने बच्चों के भविष्य और परिवार को एक मौका देने की सोच के तहत बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की।

अध्यक्ष ने बताया कि फिलहाल पति को सुधार का अवसर दिया गया है, लेकिन उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी।

हर सप्ताह आयोग को देनी होगी रिपोर्ट

महिला आयोग ने पीड़िता को निर्देश दिया है कि वह हर सप्ताह आयोग के सामने उपस्थित होकर पति के व्यवहार और सुधार की स्थिति की जानकारी दे।

यदि पति के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव नहीं दिखता या दोबारा हिंसा की घटना सामने आती है, तो आयोग सख्त कानूनी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

आयोग ने यह भी कहा कि महिला और बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की प्रताड़ना बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

घरेलू हिंसा के बढ़ते मामले चिंता का विषय

विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू हिंसा और नशे से जुड़े मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कई महिलाएं सामाजिक दबाव और परिवार टूटने के डर से लंबे समय तक चुप रहती हैं।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, नशे की लत अक्सर व्यक्ति के व्यवहार को हिंसक बना देती है, जिसका सबसे ज्यादा असर परिवार और बच्चों पर पड़ता है।

महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे मामलों में पीड़ित महिलाओं को कानूनी और मानसिक सहयोग की जरूरत होती है। साथ ही समाज को भी यह समझना होगा कि घरेलू हिंसा किसी निजी मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गंभीर सामाजिक समस्या है।

महिलाओं को जागरूक होने की जरूरत

महिला आयोग ने महिलाओं से अपील की है कि यदि वे किसी भी प्रकार की घरेलू हिंसा या प्रताड़ना का सामना कर रही हैं, तो चुप न रहें और तुरंत कानूनी मदद लें।

आयोग का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता, काउंसलिंग और सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

फिलहाल यह मामला बिहार में घरेलू हिंसा और नशे की समस्या को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आरोपी पति अपने व्यवहार में वास्तव में बदलाव लाता है या नहीं।

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