पटना, 12 अक्टूबर 2025:बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर दोनों बड़े गठबंधनों में सीटों के बंटवारे का जटिल पेच शनिवार को भी सुलझ नहीं पाया। शुक्रवार को चिराग पासवान से सहमति बनने के बाद शनिवार को उपेन्द्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी ने मामलों को उलझा दिया। सुबह ही उपेन्द्र कुशवाहा ने ट्वीट कर कहा कि “बात अभी अधूरी है।”
दिल्ली पहुंचे मांझी ने भी सीटों की साझेदारी पर अनभिज्ञता जताई। उधर, इंडिया गठबंधन में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से फोन पर बातचीत की। रविवार को तेजस्वी यादव भी दिल्ली जाने वाले हैं और संभावना है कि राहुल गांधी से उनकी बैठक हो। फिलहाल राजद, कांग्रेस और माले के बीच खींचतान जारी है।
एनडीए में सहमति का इंतजार
एनडीए समर्थक सीटों की घोषणा का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, लेकिन शनिवार सुबह पहले रालोमो अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा और फिर ‘हम’ के संरक्षक जीतन राम मांझी के बयानों से स्पष्ट हो गया कि मामला सुलझा नहीं है।
भाजपा ने सीटों पर सहमति बनाने की जिम्मेदारी अपने हाथ में ली है। जदयू और भाजपा में बातचीत पूरी हो चुकी है। लोजपा (आर), रालोमो और हम के साथ सहमति बनाने का प्रयास जारी है। इसके लिए भाजपा ने गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को जिम्मेदारी दी है।
शनिवार को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मांझी और कुशवाहा की मुलाकात हुई, जिससे स्पष्ट है कि सीट बंटवारे का मनुहार अभी भी जारी है। भाजपा की कोशिश है कि रविवार तक सीट बंटवारे की घोषणा हो जाए।
महागठबंधन में वीआईपी और वामदल अड़े
महागठबंधन में वीआईपी, सीपीआई, माले और सीपीएम अधिक सीटों पर लड़ने के पक्ष में हैं। माले को नाराजगी है क्योंकि उसकी कई मौजूदा सीटों पर राजद ने दावा कर दिया है। इसमें पालीगंज, तरारी, घोसी, फुलवारीशरीफ, मटिहानी, मांझी, बछवारा, राजापाकड़, कहलगांव और कुटुम्बा जैसी सीटें शामिल हैं।
कांग्रेस भी 60 से कम सीटों पर चुनाव लड़ने को तैयार नहीं है। माले की नाराजगी के चलते सीट बंटवारे में देरी हुई है, जबकि माकपा ने देरी के बावजूद सिंबल देना शुरू कर दिया है। अगर समझौता नहीं हुआ, तो कांग्रेस 13 अक्टूबर को इन सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर सकती है।
एनडीए में मान-मनोव्वल के पांच अहम बिंदु
- चिराग पासवान 30 से 40 सीटों की मांग कर रहे हैं।
- मांझी अपने दल को मान्यता दिलाने के लिए 15 सीट मांग रहे हैं।
- लोजपा (आर) का सहयोगी दलों की कई सीटों पर दावा।
- तीनों गठबंधन सहयोगियों की मांगों में विधानसभा सीटों के साथ RAS, मंत्री पद आदि भी शामिल।
- भाजपा को तीनों छोटे दलों को तैयार करने का जिम्मा मिला।
इंडिया गठबंधन में खींचतान के पांच प्रमुख कारण
- वीआईपी और वामदल की ओर से ज्यादा सीटों की मांग।
- करीब 15 सीटों पर एक से अधिक घटक दलों की दावेदारी।
- पसंद की सीटों की अदला-बदली का मामला सुलझा नहीं।
- राजद की ओर से सहयोगी दलों की दस से अधिक सीटों पर दावेदारी।
- सीएम चेहरे को लेकर कांग्रेस के रवैये से राजद खेमे में नाराजगी।


