बिहार के दो IAS अधिकारियों का राष्ट्रीय स्तर पर जलवा, ‘श्रेष्ठ जिलाधिकारी-2026’ सूची में सारण और सिवान के डीएम टॉप रैंक में शामिल

सिवान/सारण, 21 मई 2026। बिहार के प्रशासनिक तंत्र के लिए गुरुवार का दिन गर्व और सम्मान से भरा रहा। फेम इंडिया मैगजीन और एशिया पोस्ट द्वारा जारी “श्रेष्ठ जिलाधिकारी-2026” की राष्ट्रीय रैंकिंग में बिहार के दो युवा आईएएस अधिकारियों ने पूरे देश में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव और सिवान के जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय को देश के सबसे प्रभावशाली और उत्कृष्ट जिलाधिकारियों की सूची में शीर्ष स्थान प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि के बाद बिहार के प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम जनता तक खुशी का माहौल है।

राष्ट्रीय स्तर पर जारी इस प्रतिष्ठित सर्वेक्षण में सारण के डीएम वैभव श्रीवास्तव को पूरे देश में पांचवां स्थान मिला है, जबकि सिवान के डीएम विवेक रंजन मैत्रेय छठे स्थान पर रहे। देशभर के हजारों जिलाधिकारियों के बीच यह उपलब्धि हासिल करना दोनों अधिकारियों की प्रशासनिक दक्षता, नेतृत्व क्षमता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

फेम इंडिया और एशिया पोस्ट की इस रिपोर्ट को प्रशासनिक क्षेत्र में काफी प्रतिष्ठित माना जाता है। सर्वेक्षण में जिलाधिकारियों के कामकाज, नेतृत्व शैली, पारदर्शिता, जनसंपर्क, विकास योजनाओं के क्रियान्वयन, कानून-व्यवस्था नियंत्रण और जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता जैसे कई मानकों पर मूल्यांकन किया जाता है। इन्हीं पैमानों पर बिहार के इन दोनों अधिकारियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है।

सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव को उनके सक्रिय प्रशासन और तेज निर्णय क्षमता के लिए जाना जाता है। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने जिले में विकास योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। जिला प्रशासन की कार्यशैली में पारदर्शिता लाने, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान को लेकर उनकी कार्यशैली की लगातार सराहना होती रही है।

सारण जिले में जनसुनवाई व्यवस्था को मजबूत बनाने में भी उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है। अधिकारियों के अनुसार वैभव श्रीवास्तव ने प्रशासनिक तंत्र को अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में कई कदम उठाए, जिससे आम लोगों का भरोसा जिला प्रशासन पर और मजबूत हुआ। विकास योजनाओं की निगरानी और समयबद्ध क्रियान्वयन को लेकर भी उनकी कार्यशैली चर्चा में रही।

दूसरी ओर सिवान के जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने भी अपने शांत लेकिन प्रभावी प्रशासनिक अंदाज से अलग पहचान बनाई है। सिवान जैसे संवेदनशील जिले में कानून-व्यवस्था और विकास दोनों को संतुलित तरीके से संभालना बड़ी चुनौती माना जाता है। लेकिन विवेक रंजन मैत्रेय ने अपनी जमीनी समझ और त्वरित निर्णय क्षमता के जरिए प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया।

सिवान में सरकारी योजनाओं की निगरानी, आम जनता से सीधा संवाद और शिकायतों के त्वरित निपटारे की दिशा में उनके प्रयासों को काफी सराहा गया है। जिले में उनकी पारदर्शी और जवाबदेह कार्यशैली के कारण लोगों के बीच प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा है। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने भी समय-समय पर उनके कार्यों की प्रशंसा की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक सेवा में केवल आदेश देना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि जनता के बीच विश्वास बनाना और योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। बिहार के इन दोनों अधिकारियों ने इसी संतुलन को सफलतापूर्वक स्थापित किया है, जिसका परिणाम राष्ट्रीय स्तर की इस रैंकिंग में दिखाई दिया।

फेम इंडिया-एशिया पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार देशभर के जिलाधिकारियों का मूल्यांकन कई चरणों में किया गया। इसमें प्रशासनिक उपलब्धियों के साथ-साथ जनता के बीच छवि, नवाचार, संकट प्रबंधन क्षमता और नेतृत्व शैली को भी शामिल किया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि वैभव श्रीवास्तव और विवेक रंजन मैत्रेय ने अपने कार्यक्षेत्र में प्रभावशाली नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया है।

बिहार के प्रशासनिक हलकों में इस उपलब्धि को बड़ी सफलता माना जा रहा है। राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने दोनों डीएम को बधाई दी है। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग दोनों अधिकारियों की प्रशंसा कर रहे हैं और इसे बिहार के लिए गर्व का क्षण बता रहे हैं।

सारण और सिवान के स्थानीय लोगों के बीच भी खुशी का माहौल है। लोगों का कहना है कि दोनों जिलाधिकारियों ने प्रशासन को जनता के करीब लाने का काम किया है। कई नागरिकों ने कहा कि अधिकारियों की सक्रियता के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक तेजी से पहुंच रहा है।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में पिछले कुछ वर्षों में कई युवा आईएएस अधिकारियों ने अपनी कार्यशैली से अलग पहचान बनाई है। विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, डिजिटल मॉनिटरिंग और जनता से सीधा संवाद जैसे प्रयासों ने प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया है।

राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों के अनुसार इस तरह की राष्ट्रीय रैंकिंग केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होती बल्कि पूरे राज्य की प्रशासनिक छवि को मजबूत करती है। बिहार लंबे समय तक प्रशासनिक चुनौतियों को लेकर चर्चा में रहा है, लेकिन अब कई जिलों में बेहतर प्रशासनिक कार्यशैली और नवाचार की मिसालें सामने आ रही हैं।

दोनों अधिकारियों की इस उपलब्धि ने बिहार के युवा प्रशासनिक अधिकारियों के लिए भी प्रेरणा का काम किया है। यह दिखाता है कि यदि ईमानदारी, पारदर्शिता और जनसेवा की भावना के साथ काम किया जाए तो राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना संभव है।

फिलहाल सारण और सिवान दोनों जिलों में लोग अपने जिलाधिकारियों की इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर बधाइयों का सिलसिला लगातार जारी है और लोग इसे बिहार के प्रशासनिक इतिहास का गौरवपूर्ण क्षण बता रहे हैं।

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