बिहार में अंचल अधिकारियों की ‘सुस्ती’ पर कड़ा प्रहार: अब हर दिन सीधे हेडक्वार्टर से होगी अंचलों की लाइव क्लास; दाखिल-खारिज और ई-मापी में देरी अब पड़ेगी भारी

पटना। बिहार के प्रशासनिक गलियारों में ‘अंचल कार्यालय’ (Circle Office) को अक्सर आम जनता के लिए सबसे कठिन और जटिल बाधा माना जाता रहा है। भूमि विवाद, दाखिल-खारिज में अनावश्यक देरी और भ्रष्टाचार की शिकायतों के बीच अब राज्य सरकार ने इस व्यवस्था की चूलें हिलाने का मन बना लिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अंचल स्तर पर जारी कार्यों की शुचिता और गति को सुनिश्चित करने के लिए एक अभूतपूर्व ‘डिजिटल हंटर’ तैयार किया है। गुरुवार, 07 मई 2026 को विभाग द्वारा जारी नए फरमान के अनुसार, अब राज्य के अंचलों में होने वाले हर काम की सीधी निगरानी पटना स्थित विभागीय मुख्यालय से होगी। विभाग के सचिव जय सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि अंचल अधिकारियों (CO) की मनमानी और फाइलों को लटकाने की पुरानी संस्कृति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस नई व्यवस्था के तहत अब प्रतिदिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए अंचलों के कामकाज का ‘पोस्टमार्टम’ किया जाएगा। यह कदम बिहार में भूमि सुधारों को धरातल पर उतारने और भू-माफियाओं व भ्रष्ट कर्मियों के गठजोड़ को तोड़ने की दिशा में एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है।

प्रतिदिन आधा घंटा ‘लाइव’ जवाबदेही: सचिव खुद करेंगे डिजिटल ऑडिट

​राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जिस नई अनुश्रवण व्यवस्था (Monitoring System) को लागू किया है, उसकी सबसे बड़ी खूबी इसकी निरंतरता है। विभाग के सचिव जय सिंह या उनके द्वारा अधिकृत कोई भी वरीय पदाधिकारी अब हर दिन अपने दफ्तर से सीधे अंचल कार्यालयों से मुखातिब होंगे। इस डिजिटल ऑडिट के लिए अपराह्न 3:30 से 4:00 बजे तक का समय तय किया गया है। यह वह समय होता है जब अंचल कार्यालयों में दिन भर के कार्यों का लेखा-जोखा तैयार होता है।

​इस नई व्यवस्था के तहत प्रतिदिन राज्य के किन्हीं दो अंचलों का रैंडम आधार पर चयन किया जाएगा। उन चयनित अंचलों के अंचल अधिकारी (CO) और राजस्व अधिकारी (RO) के लिए इस वीसी में शामिल होना अनिवार्य कर दिया गया है। विभाग का मानना है कि जब अधिकारियों को पता होगा कि किसी भी दिन उनकी ‘क्लास’ लग सकती है, तो वे कार्यों को लंबित रखने का जोखिम नहीं उठाएंगे। सचिव जय सिंह ने निर्देश दिया है कि इस दौरान केवल आंकड़ों की बाजीगरी नहीं चलेगी, बल्कि लंबित मामलों के ठोस कारणों और उनके समाधान की समय-सीमा पर तथ्यात्मक चर्चा होगी।

इन 8 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर टिकी होगी विभाग की पैनी नजर

​समीक्षा बैठक के दौरान विभाग ने उन क्षेत्रों को चिन्हित किया है जहाँ सबसे अधिक भ्रष्टाचार या देरी की शिकायतें मिलती हैं। सचिव ने स्पष्ट किया है कि निम्नलिखित योजनाओं और पोर्टल की प्रगति ही किसी अंचल अधिकारी की कार्यक्षमता का पैमाना होगी:

  • ऑनलाइन दाखिल-खारिज (Mutation): जमीन की खरीद-बिक्री के बाद नामान्तरण में होने वाली देरी पर सबसे कड़ी नजर रहेगी।
  • परिमार्जन प्लस: पुराने डिजिटल रिकॉर्ड्स में सुधार की प्रक्रिया की रफ़्तार जांची जाएगी।
  • ई-मापी: जमीन की डिजिटल मापी के आवेदनों का निपटारा तय समय सीमा में हो रहा है या नहीं, इसकी पड़ताल होगी।
  • अभियान बसेरा: भूमिहीन परिवारों को जमीन उपलब्ध कराने की इस महत्वाकांक्षी योजना की जमीनी हकीकत देखी जाएगी।
  • सरकारी भूमि सत्यापन: सरकारी जमीनों के रिकॉर्ड को अपडेट करने और उन्हें सुरक्षित रखने के कार्यों की समीक्षा होगी।
  • राजस्व महा-अभियान: विभाग द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियानों के लक्ष्यों की प्राप्ति का विश्लेषण होगा।
  • लोक भूमि अतिक्रमण: सरकारी जमीनों से अवैध कब्जा हटाने के मामलों में अंचल स्तर पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट ली जाएगी।
  • लोक शिकायत: जनता द्वारा की गई शिकायतों का निवारण किस स्तर पर और कितनी गुणवत्ता के साथ हुआ है, इसकी लाइव जांच होगी।

आईटी मैनेजर का ‘मॉर्निंग अलर्ट’ और समाहर्ताओं की जवाबदेही

​इस पूरी डिजिटल निगरानी प्रणाली को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए विभाग के आईटी विभाग को भी सक्रिय किया गया है। विभागीय आईटी मैनेजर को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे रोजाना सुबह 10:00 बजे तक उन दो अंचलों का चयन कर लें जिनकी समीक्षा होनी है। चयन के तुरंत बाद संबंधित अधिकारियों को वीसी का लिंक और सूचना उपलब्ध करा दी जाएगी ताकि वे अपने रिकॉर्ड के साथ तैयार रहें।

​सचिव ने राज्य के सभी समाहर्ताओं (District Collectors) को भी कड़ा निर्देश दिया है कि वे अपने जिलों के अंचल अधिकारियों की इस वीसी में भागीदारी सुनिश्चित कराएं। यह केवल एक विभाग की बैठक नहीं, बल्कि शासन की साख से जुड़ा मामला है। यदि कोई अधिकारी बिना किसी ठोस कारण के समीक्षा बैठक से अनुपस्थित पाया जाता है या कार्यों में भारी शिथिलता पकड़ी जाती है, तो उसके विरुद्ध तत्काल विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि वीसी का आयोजन सीधे सचिव कक्ष या विभागीय वीसी कक्ष से होगा, जहाँ हर बातचीत का रिकॉर्ड संधारित किया जाएगा।

आम जनता के लिए राहत: बिचौलियों का खेल होगा खत्म

​बिहार में भूमि विवाद हिंसा और लंबे मुकदमों का सबसे बड़ा कारण रहे हैं। अंचल स्तर पर जब दाखिल-खारिज या परिमार्जन जैसे कार्यों में देरी होती है, तो इसका सीधा फायदा बिचौलियों को मिलता है। वे आम लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर पैसों की उगाही करते हैं। जय सिंह द्वारा लागू की गई यह नई मॉनिटरिंग व्यवस्था सीधे तौर पर इन बिचौलियों के ‘धंधे’ पर चोट करेगी। जब मुख्यालय स्तर से हर फाइल की ट्रैकिंग होगी, तो अंचल कर्मियों के लिए किसी फाइल को बेवजह दबाकर रखना मुश्किल हो जाएगा।

​राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का यह कदम बिहार में ‘इज ऑफ लिविंग’ (Ease of Living) को बढ़ावा देने वाला है। किसानों और आम जमीन मालिकों को अब अपने छोटे-छोटे कार्यों के लिए अंचल कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। तकनीक के इस माध्यम से विभाग ने यह संदेश दे दिया है कि प्रशासन अब जनता के द्वार तक पहुँचने के लिए ‘डिजिटल मोड’ में आ चुका है। सचिव ने सभी अपर समाहर्ताओं और भूमि सुधार उप समाहर्ताओं (DCLR) को भी इस प्रक्रिया में सहयोग करने और अपने स्तर से भी नियमित निगरानी करने को कहा है।

दिसंबर 2025 से अब तक के लंबित मामलों का होगा निपटारा

​विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस दैनिक समीक्षा का एक बड़ा उद्देश्य पुराने लंबित मामलों का बोझ कम करना है। दिसंबर 2025 के बाद से कई अंचलों में राजस्व महा-अभियान के बावजूद आवेदनों का ढेर लगा हुआ है। जय सिंह ने अधिकारियों को आगाह किया है कि वे तकनीकी कमियों का बहाना बनाकर अब बच नहीं सकते। यदि किसी अंचल में सर्वर या इंटरनेट की समस्या है, तो उसे प्राथमिकता के आधार पर ठीक कराया जाए, लेकिन काम नहीं रुकना चाहिए।

​आने वाले दिनों में इस व्यवस्था का असर बिहार के राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता के रूप में देखने को मिलेगा। “काम में कोताही बर्दाश्त नहीं” का जो स्लोगन विभाग ने दिया है, वह अब केवल एक नारा नहीं बल्कि एक प्रशासनिक हकीकत बनने जा रहा है। अब देखना यह होगा कि हर दिन होने वाली इस ‘डिजिटल पेशी’ से बिहार के अंचल अधिकारी अपनी कार्यशैली में कितना सुधार ला पाते हैं और आम आदमी को भूमि संबंधी उलझनों से कितनी जल्दी राहत मिलती है। फिलहाल, पटना से चलने वाली इस ‘डिजिटल रडार’ ने राज्य के सभी 534 अंचलों में खलबली मचा दी है।

  • ये भी पढ़े..

    पटना हाईकोर्ट सख्त: बेऊर में अतिक्रमण और जलजमाव मामले पर सरकार से मांगी रिपोर्ट, अधिकारियों की कार्यशैली पर उठाए सवाल

    Share Add as a preferred…