​बिहार में जमीन रजिस्ट्री अब होगी फेसलेस; घर बैठे होगा निबंधन; कैबिनेट ने नई नियमावली 2026 को दी मंजूरी

पटना। बिहार में सुशासन और डिजिटल क्रांति के संगम ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। राज्य में अब जमीन और अन्य संपत्तियों के दस्तावेजों का निबंधन (रजिस्ट्री) कराने के लिए न तो निबंधन कार्यालयों के चक्कर लगाने होंगे और न ही घंटों लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना होगा। बिहार सरकार ने रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया को ‘पेपरलेस’ के साथ-साथ ‘फेसलेस’ बनाने की तैयारी मुकम्मल कर ली है। सामने आई इस जानकारी के अनुसार, अब क्रेता और विक्रेता अपने घर बैठे ही निबंधन की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कर सकेंगे। मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन विभाग द्वारा प्रस्तावित ‘बिहार निबंधन नियमावली 2026’ को बिहार कैबिनेट ने बुधवार को अपनी औपचारिक मंजूरी दे दी है। यह कदम न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएगा, बल्कि आम जनता के लिए संपत्ति की खरीद-बिक्री को इतना सुलभ बना देगा जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक नामुमकिन थी। अब रजिस्ट्री के लिए भौतिक उपस्थिति की अनिवार्यता को खत्म कर डिजिटल साक्ष्यों और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को आधार बनाया गया है।

पुरानी व्यवस्था बनाम नया दौर: क्या बदलेगा?

​वर्तमान समय में बिहार में संपत्तियों के दस्तावेजों का निबंधन ‘ई-निबंधन’ सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया जाता है। हालांकि इसे ऑनलाइन कहा जाता है, लेकिन इसकी प्रक्रिया अर्ध-डिजिटल है। मौजूदा व्यवस्था में क्रेता-विक्रेता को ऑनलाइन पोर्टल पर नाम, संपत्ति का विवरण और उसका मूल्य दर्ज करना होता है। इसके बाद ऑनलाइन ही निबंधन शुल्क का भुगतान किया जाता है और एक अपॉइंटमेंट मिलता है। लेकिन, सबसे बड़ी बाधा इसके बाद आती है—तय समय पर पक्षकारों को भौतिक रूप से दस्तावेज लेकर रजिस्ट्री कार्यालय जाना पड़ता है, जहाँ उनके हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए जाते हैं।

​नई नियमावली के लागू होने के बाद यह ‘भौतिक उपस्थिति’ का झंझट पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। नई व्यवस्था में पूरी प्रक्रिया रजिस्ट्री कार्यालय से कोसों दूर, घर या किसी भी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) से पूरी की जा सकेगी। पक्षकारों को न तो निबंधन कार्यालय में दस्तावेज पेश करने होंगे और न ही सत्यापन के लिए स्वयं हाजिर होना होगा। यह बदलाव बिहार के उन लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत है जो दूसरे राज्यों या देशों में रहते हैं और केवल एक दिन की रजिस्ट्री के लिए उन्हें लंबी यात्रा कर बिहार आना पड़ता था।

फेसलेस रजिस्ट्री का तंत्र: बायोमेट्रिक और डिजिटल सिग्नेचर की ताकत

​बिहार निबंधन नियमावली 2026 का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण’ और ‘डिजिटल हस्ताक्षर’ है। फेसलेस निबंधन की प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए विभाग ने आधुनिक तकनीकी सुरक्षा चक्र तैयार किया है।

  1. ऑनलाइन बायोमेट्रिक: पक्षकारों का सत्यापन अब उनके आधार डेटा या अन्य सुरक्षित बायोमेट्रिक डिवाइस के माध्यम से ऑनलाइन ही पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए निबंधन अधिकारी के सामने खड़ा होना जरूरी नहीं होगा।
  2. ई-फाइलिंग और डिजिटल हस्ताक्षर: भौतिक रूप से पेपर तैयार करने और उन पर हाथ से दस्तखत करने की जरूरत नहीं होगी। दस्तावेज ‘ई-फाइलिंग’ के माध्यम से निबंधन हेतु पोर्टल पर रखे जाएंगे। इन पर क्रेता, विक्रेता, गवाह और अंत में निबंधन पदाधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर होंगे।
  3. दस्तावेज सृजन और वितरण: निबंधन की प्रक्रिया पूर्ण होते ही रजिस्ट्री कार्यालय में डिजिटल रूप से दस्तावेज सृजित (Generate) हो जाएगा। इसकी एक प्रति आवेदक को भौतिक रूप से लेने की सुविधा तो होगी ही, साथ ही इसके निबंधित दस्तावेज की पीडीएफ फाइल (PDF File) का लिंक सभी पक्षकारों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ई-मेल पर तत्काल भेज दिया जाएगा। इससे दस्तावेजों के खोने या फटने का डर भी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।

भ्रष्टाचार और बिचौलियों पर करारा प्रहार

​रजिस्ट्री कार्यालयों के बारे में अक्सर यह धारणा रही है कि वहां बिना बिचौलियों या अतिरिक्त ‘सुविधा शुल्क’ के काम कराना मुश्किल होता है। फेसलेस और पेपरलेस व्यवस्था इस ‘सिस्टम’ की जड़ों पर सीधा प्रहार करेगी। जब क्रेता और विक्रेता को कार्यालय जाना ही नहीं पड़ेगा, तो बिचौलियों की भूमिका अपने आप समाप्त हो जाएगी।

​निबंधन पदाधिकारी और पक्षकारों के बीच का सीधा संपर्क टूटने से पारदर्शिता बढ़ेगी। सॉफ्टवेयर के माध्यम से होने वाली एंट्री में गड़बड़ी की गुंजाइश न्यूनतम होगी क्योंकि हर कदम पर डिजिटल लॉग्स (Logs) बनेंगे, जिन्हें मिटाया नहीं जा सकेगा। यह सुशासन का वह मॉडल है जहाँ तकनीक ने मानवीय हस्तक्षेप को कम कर ईमानदारी का रास्ता सुगम कर दिया है। विभाग इस बात पर विशेष ध्यान दे रहा है कि सॉफ्टवेयर इतना सरल हो कि एक साधारण व्यक्ति भी बिना किसी विशेष तकनीकी ज्ञान के अपनी रजिस्ट्री खुद कर सके।

बिहार कैबिनेट की मंजूरी: सुशासन की नई नियमावली

​बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में ‘बिहार निबंधन नियमावली 2026’ को मंजूरी मिलना राज्य के लिए एक ‘गेम-चेंजर’ फैसला माना जा रहा है। सरकार का विजन है कि राजस्व संग्रह में वृद्धि के साथ-साथ ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ को बढ़ावा दिया जाए। कैबिनेट के इस फैसले के बाद अब मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन विभाग इसके लिए आवश्यक तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने में जुटा है।

​विभागीय अधिकारियों के अनुसार, अगले कुछ महीनों में इसके ट्रायल रन शुरू किए जा सकते हैं। इस नियमावली में सुरक्षा के कड़े प्रावधान किए गए हैं ताकि कोई फर्जीवाड़ा न हो सके। जमीन के पिछले रिकॉर्ड को भी डिजिटल मैप से जोड़ने की तैयारी है, जिससे यह पता चल सकेगा कि जिस भूमि की रजिस्ट्री हो रही है, उसका वास्तविक मालिक कौन है और उस पर कोई कानूनी विवाद तो नहीं है।

आम जनता को मिलने वाले पांच बड़े फायदे

  1. समय और पैसे की बचत: निबंधन कार्यालय जाने का किराया, समय और वहां होने वाली अनावश्यक भागदौड़ से मुक्ति मिलेगी।
  2. कहीं से भी निबंधन: अगर खरीदार पटना में है और विक्रेता दिल्ली में, तो भी दोनों अपने-अपने स्थान से डिजिटल हस्ताक्षर के जरिए रजिस्ट्री पूरी कर सकेंगे।
  3. दस्तावेजों की सुरक्षा: निबंधित कागजात अब ई-वॉलेट या ई-मेल पर हमेशा सुरक्षित रहेंगे। भौतिक प्रति गुम होने पर भी डिजिटल लिंक से उसे कभी भी डाउनलोड किया जा सकेगा।
  4. त्वरित प्रक्रिया: भौतिक फाइलों के इधर-उधर होने का इंतजार नहीं करना होगा। सॉफ्टवेयर के माध्यम से सब कुछ ‘रियल टाइम’ में होगा।
  5. पारदर्शिता: रजिस्ट्री शुल्क का भुगतान ऑनलाइन होने और फेसलेस इंटरफेस होने से भ्रष्टाचार की संभावना शून्य हो जाएगी।
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