पटना | 26 फरवरी, 2026 बिहार जैसे भौगोलिक रूप से संवेदनशील राज्य में आपदाओं से होने वाले नुकसान को न्यूनतम करने के लिए राज्य सरकार ने अपनी रणनीति को और धार देना शुरू कर दिया है। बुधवार को बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) के तत्वावधान में पटना में एक उच्चस्तरीय ‘टेबल टॉप एक्सरसाइज’ (TTX) का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के चयनित 12 जिलों में आयोजित होने वाले ‘राज्य स्तरीय भौतिक अर्थक्वेक मॉक एक्सरसाइज’ (ME) के लिए एक फुल-प्रूफ ब्लूप्रिंट तैयार करना और सरकारी तंत्र की कमियों को समय रहते दूर करना है।
रणनीति का आधार: विशेषज्ञों ने परखीं तैयारियां
BSDMA के उपाध्यक्ष डॉ. उदय कांत मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित इस अभ्यास कार्यक्रम में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के रिटायर्ड मेजर जनरल सुधीर बहल ने मुख्य सूत्रधार की भूमिका निभाई।
- कमियों की पहचान: जनरल बहल ने स्पष्ट किया कि ‘टेबल टॉप एक्सरसाइज’ महज एक बैठक नहीं, बल्कि भौतिक अभ्यास (Field Drill) से पहले संसाधनों की समीक्षा और समन्वय तंत्र (Coordination Mechanism) में मौजूद संभावित लूपहोल्स को पहचानने का सबसे महत्वपूर्ण मंच है।
- सुधारात्मक कदम: उन्होंने मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) की समीक्षा की और आपदा के समय ‘गोल्डन ऑवर’ (शुरुआती समय) में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
प्रमुख फोकस: सर्च-रेस्क्यू से लेकर राहत शिविर तक
आपदा प्रबंधन विभाग के संयुक्त सचिव नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी ने पूर्व की बाढ़ आपदाओं के अनुभवों को जोड़ते हुए भूकंप मॉक ड्रिल से संबंधित एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण (PPT) साझा किया। इस रणनीति के तहत निम्नलिखित 7 मुख्य बिंदुओं पर सहमति बनी:
- सर्च एंड रिसर्च (खोज एवं बचाव): मलबे में दबे लोगों को तेजी से निकालने की क्षमता।
- फायर फाइटिंग: भूकंप के बाद लगने वाली आग पर नियंत्रण।
- मेडिकल रिस्पांस: घायलों के लिए तत्काल ‘ट्राईज’ और एम्बुलेंस सेवा।
- संचार व्यवस्था: नेटवर्क ठप होने की स्थिति में वैकल्पिक संचार तंत्र की बहाली।
- विधि व्यवस्था: आपदा के समय कानून-व्यवस्था बनाए रखना।
- डैमेज एसेसमेंट: नुकसान का त्वरित आकलन ताकि राहत कार्य सटीक हो सके।
- राहत शिविर: बेघर हुए लोगों के लिए सुरक्षित आश्रय और भोजन का प्रबंध।
इन 12 जिलों पर रहेगी विशेष नजर
इस एक्सरसाइज में बिहार के उन जिलों के प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारियों ने भाग लिया जो भूकंपीय जोन (Seismic Zone) के दृष्टिकोण से काफी संवेदनशील माने जाते हैं:
पटना, सुपौल, मधुबनी, सीतामढ़ी, पश्चिम चंपारण, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, सीवान, सारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर और वैशाली।
इन जिलों में जल्द ही बड़े स्तर पर जमीन पर उतरकर ‘मॉक ड्रिल’ किया जाएगा। साथ ही, राज्य स्तर पर SEOC (स्टेट इमर्जेंसी ऑपरेशंस सेंटर) और जिला स्तर पर DEOC की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया गया।
उपस्थित आला अधिकारी
बैठक में प्राधिकरण के सचिव मोहम्मद वारिस खान, संयुक्त सचिव अविनाश कुमार, विशेष कार्य पदाधिकारी संदीप कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने अपनी सहभागिता दर्ज की।
VOB का नजरिया: कागजी तैयारी और हकीकत की जंग
बिहार का एक बड़ा हिस्सा ‘जोन 4’ और ‘जोन 5’ (भूकंप के सबसे खतरनाक जोन) में आता है। ऐसे में ‘टेबल टॉप एक्सरसाइज’ प्रशासन की गंभीरता को दर्शाता है। हालांकि, असली चुनौती यह है कि क्या आपदा के समय आम नागरिक उतने ही जागरूक होंगे जितना प्रशासन कागजों पर तैयारी कर रहा है? आपदा प्रबंधन केवल अधिकारियों का काम नहीं, बल्कि जन-भागीदारी का भी विषय है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


