
पटना। बिहार के राजनीतिक इतिहास में एक बहुत बड़ा और अभूतपूर्व अध्याय जुड़ने जा रहा है। पिछले दो दशकों से राज्य की सत्ता की धुरी रहे नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री की कुर्सी से विदा लेने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और पहली बार राज्य में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का गठन होने जा रहा है। सोमवार, 13 अप्रैल 2026 की शाम होते-होते पटना के सियासी गलियारों में हलचल अपने चरम पर पहुँच गई है। सत्ता के हस्तांतरण यानी ‘पावर ट्रांसफर’ की पूरी रूपरेखा सार्वजनिक हो चुकी है। मंगलवार, 14 अप्रैल का दिन बिहार के लिए निर्णायक साबित होगा, जब नीतीश कुमार अपने पद से इस्तीफा देंगे और भाजपा अपने पहले मुख्यमंत्री के नाम का आधिकारिक ऐलान करेगी। इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजधानी का राजनीतिक केंद्र अब मुख्यमंत्री आवास से शिफ्ट होकर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास पर केंद्रित हो गया है। दिल्ली से लेकर पटना तक बिछी इस बिसात पर हर किसी की नजरें टिकी हैं कि आखिर भाजपा की ओर से वह कौन सा चेहरा होगा जो बिहार की कमान संभालेगा। 15 अप्रैल को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के लिए राजभवन में तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं, जहाँ बिहार की राजनीति में एक नए युग का सूत्रपात होगा।
14 अप्रैल का ‘मिनट-टू-मिनट’ शेड्यूल: इस्तीफे से लेकर नए नेता के चुनाव तक
मंगलवार का दिन बिहार की राजनीति में सबसे लंबी और ऐतिहासिक हलचल वाला दिन रहने वाला है। सुबह 11 बजे नीतीश कुमार की अध्यक्षता में कैबिनेट की आखिरी बैठक होगी। यह बैठक केवल एक औपचारिक विदाई के तौर पर देखी जा रही है, जहाँ नीतीश कुमार अपने मंत्रियों का आभार व्यक्त करेंगे। इस बैठक के बाद असली सियासी कवायद शुरू होगी। दोपहर 2 बजे नीतीश कुमार ने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) विधायक दल की बैठक मुख्यमंत्री आवास पर बुलाई है। इस बैठक में जदयू अपना नया नेता चुनेगी, क्योंकि नीतीश कुमार अब राज्यसभा सांसद बन चुके हैं और वे दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होने जा रहे हैं।
इसके ठीक बाद, दोपहर 3 बजे भाजपा विधायक दल की बैठक होगी। इस बैठक में केंद्रीय पर्यवेक्षक और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मौजूद रहेंगे। शिवराज सिंह चौहान ही भाजपा के नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा करेंगे। सबसे महत्वपूर्ण क्षण शाम 4 बजे आएगा, जब विधानमंडल के सेंट्रल हॉल में एनडीए विधायक दल की संयुक्त बैठक होगी। इस बैठक में भाजपा, जदयू, लोजपा (आर), हम और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के सभी विधायक मिलकर भाजपा के चुने हुए नेता को अपना नया मुख्यमंत्री स्वीकार करेंगे। इसी बैठक के बाद नए नेता राजभवन जाकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। नीतीश कुमार को राजभवन से इस्तीफा देने के लिए 3 बजकर 15 मिनट का समय मिला है, जिसके बाद सत्ता परिवर्तन की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
सम्राट चौधरी का आवास बना सत्ता का केंद्र: बढ़ती सरगर्मियां
बिहार में भाजपा के नेतृत्व वाली पहली सरकार के गठन की गतिविधियों का मुख्य केंद्र इस समय उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का आवास बना हुआ है। पिछले कुछ घंटों में यहाँ जिस तरह से कद्दावर नेताओं का जमावड़ा लगा है, उससे कई राजनीतिक संकेत मिल रहे हैं। जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने सम्राट चौधरी के आवास पर जाकर उनसे लगभग 40 मिनट तक गुप्त मंत्रणा की। इन नेताओं के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी भी वहां पहुँचे।
इतना ही नहीं, नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सलाहकार दीपक कुमार ने भी सम्राट चौधरी से उनके आवास पर मुलाकात की है। इन मुलाकातों को केवल शिष्टाचार नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे भाजपा विधायक दल के नेता और अगले मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी की मजबूत दावेदारी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा के भीतर फिलहाल सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा के नामों की चर्चा सबसे अधिक है, लेकिन जिस प्रकार से सहयोगी दल और प्रशासनिक अधिकारी सम्राट चौधरी के यहाँ दस्तक दे रहे हैं, उससे उनके नाम पर मुहर लगने की संभावना प्रबल होती दिख रही है।
जदयू की चुनौतियां: नीतीश की जगह कौन संभालेगा कमान?
नीतीश कुमार के सांसद बनने के बाद जदयू के सामने अपने विधायी नेतृत्व को तय करने की बड़ी चुनौती है। 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने वाले नीतीश कुमार अब बिहार विधान परिषद या विधानसभा के सदस्य नहीं रहेंगे, इसलिए जदयू को एक ऐसा नेता चुनना होगा जो वर्तमान में सदन का सदस्य हो। इस रेस में विजय कुमार चौधरी का नाम सबसे ऊपर चल रहा है, जो अपने अनुभव और नीतीश कुमार के प्रति निष्ठा के लिए जाने जाते हैं।
वहीं, नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को लेकर भी कयासों का बाजार गर्म है। हालांकि, जदयू के भीतरी सूत्रों का कहना है कि निशांत कुमार फिलहाल सरकार में कोई पद लेने के इच्छुक नहीं हैं। निशांत कुमार ने हाल ही में पार्टी में सक्रियता बढ़ाई है और वे बिहार की यात्रा के जरिए आम लोगों से जुड़ने और राजनीतिक अनुभव प्राप्त करने की योजना बना रहे हैं। कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार स्वयं भी अभी निशांत को उपमुख्यमंत्री जैसे बड़े पद पर बिठाकर ‘परिवारवाद’ के आरोपों को हवा नहीं देना चाहते। वे चाहते हैं कि निशांत पहले संगठन की बारीकियों को समझ लें, उसके बाद ही शासन-प्रशासन में उनकी भूमिका तय की जाए।
एनडीए सहयोगियों का रुख और भाजपा का पर्यवेक्षण
भाजपा ने अपने नए नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पर्यवेक्षक बनाया है। शिवराज सिंह चौहान मंगलवार की सुबह ही पटना पहुँचेंगे। वे भाजपा विधायकों की राय जानकर या केंद्रीय नेतृत्व का संदेश सुनाकर नए मुख्यमंत्री के नाम का अनुमोदन कराएंगे। भाजपा के लिए यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है क्योंकि पहली बार बिहार में उनकी पार्टी का मुख्यमंत्री होगा। इससे पहले, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी सुबह 10 बजे पटना पहुँच रहे हैं। हालांकि वे सांसद हैं, लेकिन पार्टी के इस बड़े फैसले में उनकी उपस्थिति रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
एनडीए के अन्य सहयोगियों—चिराग पासवान, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा—ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के अध्यक्ष संतोष सुमन ने अपने सभी विधायकों को 14 और 15 अप्रैल को पटना में कैंप करने का निर्देश दिया है। लोजपा (आर) और अन्य छोटे दलों के नेता भी नई कैबिनेट में अपनी हिस्सेदारी को लेकर चर्चा कर रहे हैं। भाजपा के लिए चुनौती यह होगी कि वह अपने पहले मुख्यमंत्री के कार्यकाल की शुरुआत में सभी सहयोगियों को साथ लेकर चले।
राधामोहन सिंह और भाजपा की नई विजनरी लीडरशिप
भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद राधामोहन सिंह ने इस सत्ता परिवर्तन को बिहार के विकास का एक नया अध्याय बताया है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी की जोड़ी ने जो आधारशिला रखी थी, अब भाजपा का नया मुख्यमंत्री उस पर विकास की एक नई इमारत खड़ा करेगा। राधामोहन सिंह के अनुसार, नीतीश कुमार ने एक विजनरी नेता के रूप में बिहार को एक नई पहचान दी और अब समय आ गया है कि भाजपा अपने नेतृत्व में जनता की आकांक्षाओं को नए तरीके से पूरा करे।
यह बदलाव केवल चेहरों का नहीं है, बल्कि बिहार में भाजपा की बढ़ती ताकत का भी प्रतीक है। सालों तक गठबंधन में ‘जूनियर पार्टनर’ की भूमिका निभाने वाली भाजपा अब ‘लीड रोल’ में होगी। इसका असर आगामी पंचायत चुनावों और अन्य सांगठनिक गतिविधियों पर भी पड़ेगा। भाजपा इस मौके को एक बड़े ‘पावर शो’ के रूप में देख रही है, यही वजह है कि 15 अप्रैल के शपथ ग्रहण समारोह को भव्य बनाने की तैयारी है।
शपथ ग्रहण और नई सरकार का रोडमैप
15 अप्रैल को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह बिहार में एक नई प्रशासनिक शैली की शुरुआत करेगा। बहुमत साबित करने की प्रक्रिया 14 चरणों में पूरी होगी, जिसमें राज्यपाल के पास दावा पेश करने से लेकर विधानसभा के पटल पर विश्वास मत हासिल करना शामिल है। नीतीश कुमार के 3:15 बजे इस्तीफे के साथ ही यह पूरी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। भाजपा सूत्रों का कहना है कि नई सरकार में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और विकास की गति को तेज करना मुख्य एजेंडा होगा।
प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से राजभवन के सचिव गोपाल मीणा ने तैयारियों का जायजा लिया है। शपथ ग्रहण के समय को लेकर अभी अंतिम फैसला दिल्ली के नेताओं की उपलब्धता के आधार पर लिया जाएगा। यदि प्रधानमंत्री या गृह मंत्री में से कोई शामिल होता है, तो कार्यक्रम की भव्यता और समय उसी अनुरूप तय किया जाएगा। फिलहाल, बिहार की जनता और राजनीतिक जगत की नजरें मंगलवार दोपहर 3 बजे पर टिकी हैं, जब शिवराज सिंह चौहान बिहार के नए भाग्यविधाता के नाम की घोषणा करेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भाजपा किसी पुराने अनुभवी पर भरोसा जताती है या फिर एक नए चेहरे के साथ बिहार में अपनी नई पारी का आगाज़ करती है।


