सचिवालय में ‘सुशासन’ के आखिरी हस्ताक्षर: संपन्न हुई नीतीश कुमार कैबिनेट की अंतिम बैठक, विदाई से पहले कई अहम एजेंडों पर मुहर और मंत्रियों के साथ साझा किया इस्तीफे का निर्णय

पटना। बिहार की सत्ता के गलियारों में पिछले दो दशकों से जिस रफ़्तार और धमक के साथ ‘कैबिनेट’ शब्द गूँजता था, आज उसमें एक ठहराव और विदाई की भावुकता नजर आई। मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 की दोपहर पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय का ‘मंत्रिमंडल कक्ष’ एक ऐतिहासिक घटनाक्रम का गवाह बना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में उनके वर्तमान कार्यकाल की आखिरी कैबिनेट बैठक संपन्न हो गई है। यह केवल कागजों पर दर्ज होने वाली एक प्रशासनिक बैठक नहीं थी, बल्कि यह बिहार की राजनीति के एक स्वर्णिम युग के औपचारिक समापन की आधिकारिक घोषणा थी। मेष संक्रांति और सतुआन पर्व की हलचल के बीच, जब राजधानी की सड़कों पर सत्ता के नए समीकरण आकार ले रहे थे, तब सचिवालय के भीतर नीतीश कुमार ने अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ अंतिम बार हाथ मिलाया और उन्हें अपने इस्तीफे के निर्णय से अवगत कराया। बैठक में न केवल भविष्य की कुछ महत्वपूर्ण योजनाओं को अंतिम स्वीकृति दी गई, बल्कि उस टीम को विदाई भी दी गई जिसने पिछले 145 दिनों के इस संक्षिप्त लेकिन सघन कार्यकाल में नीतीश कुमार के विजन को धरातल पर उतारा।

बैठक का माहौल: गंभीर चर्चा और उत्तराधिकार की आहट

​सुबह ठीक 11 बजे जब कैबिनेट की बैठक शुरू हुई, तो मेज के चारों ओर बिहार के वे तमाम कद्दावर चेहरे मौजूद थे जिन्होंने राज्य की नियति तय करने में भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ दोनों उपमुख्यमंत्री—सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा—विराजमान थे। इनके अलावा कैबिनेट के अन्य सभी वरिष्ठ मंत्री भी इस अंतिम विमर्श का हिस्सा बने। सचिवालय के गलियारों में आज वह गहमागहमी नहीं थी जो अक्सर नई नीतियों के एलान के समय होती है, बल्कि वहां एक सधी हुई खामोशी थी।

​सूत्रों के अनुसार, बैठक शुरू होते ही वातावरण काफी औपचारिक लेकिन गरिमापूर्ण रहा। नीतीश कुमार ने कैबिनेट की कार्यवाही शुरू करते हुए सीधे तौर पर मंत्रियों को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि वे अब मुख्यमंत्री पद का त्याग कर रहे हैं और इसकी सूचना उन्होंने राज्यपाल को देने का निर्णय लिया है। यह वह क्षण था जब कई पुराने मंत्रियों के चेहरों पर स्मृतियां तैर गईं। नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल के दौरान मिले सहयोग के लिए सभी मंत्रियों, मुख्य सचिव और प्रशासनिक अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।

एजेंडों पर मुहर: विदाई से पहले जनहित के आखिरी फैसले

​भले ही यह विदाई की बैठक थी, लेकिन नीतीश कुमार ने अपनी प्रशासनिक सतर्कता का परिचय देते हुए इसे केवल औपचारिक नहीं रहने दिया। इस आखिरी कैबिनेट में आधा दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण एजेंडों पर सरकार की मुहर लगी है। इन एजेंडों का मुख्य केंद्र विकास योजनाओं की निरंतरता बनाए रखना रहा।

  • प्रशासनिक स्वीकृति: कई ऐसी बुनियादी ढांचागत परियोजनाएं जो पाइपलाइन में थीं, उन्हें अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति दी गई ताकि नई सरकार के आने के बाद काम में कोई तकनीकी रुकावट न आए।
  • कर्मियों के हित: स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण पदों के सृजन और संविदा कर्मियों के मानदेय से संबंधित फाइलों को भी आज हरी झंडी दिखाई गई।
  • विदाई प्रस्ताव: कैबिनेट ने सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार के नेतृत्व और उनके द्वारा बिहार के विकास में दिए गए ऐतिहासिक योगदान के प्रति आभार प्रकट करने का एक औपचारिक प्रस्ताव भी पारित किया।

​यह मुहर इस बात का संकेत है कि नीतीश कुमार अपनी विरासत को ‘वर्क-इन-प्रोग्रेस’ मोड में छोड़ना चाहते हैं, न कि अधर में। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि उनके जाने के बाद भी फाइलें नहीं रुकेंगी और सचिवालय का पहिया घूमता रहेगा।

कैबिनेट में इस्तीफे की घोषणा: जब नीतीश ने कहा- ‘अब नई पारी की बारी’

​बैठक के सबसे भावुक और निर्णायक हिस्से में नीतीश कुमार ने अपने इस्तीफे की जानकारी विधिवत रूप से अपनी मंत्रिपरिषद के साथ साझा की। उन्होंने कहा कि राजनीति में समय की अपनी मांग होती है और वे अब नई भूमिका में बिहार की सेवा करेंगे। उन्होंने सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा की ओर संकेत करते हुए यह भी आभास दिया कि एनडीए का यह गठबंधन अटूट रहेगा और नई सरकार इसी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ेगी।

​मंत्रियों ने भी एक-एक कर मुख्यमंत्री के साथ अपने अनुभवों को साझा किया। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जो अब नेतृत्व की अगली कतार में खड़े हैं, उनकी मौजूदगी इस बैठक में सत्ता के सहज हस्तांतरण की गवाह बनी। बैठक के समापन पर सभी मंत्रियों ने सामूहिक रूप से एक तस्वीर भी खिंचवाई, जो अब बिहार के राजनीतिक एल्बम का एक ऐतिहासिक हिस्सा बन जाएगी। इसके साथ ही सचिवालय के मंत्रिमंडल कक्ष से नीतीश कुमार का दो दशकों का सीधा नाता आज आधिकारिक तौर पर टूट गया।

सचिवालय से राजभवन की ओर बढ़ते कदम

​कैबिनेट की बैठक खत्म होते ही मुख्यमंत्री सचिवालय के बाहर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। नीतीश कुमार अब अपने पद से इस्तीफा देने के लिए लोक भवन (राजभवन) जाने की तैयारी में हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, दोपहर बाद करीब 3 बजे वे राज्यपाल से मुलाकात करेंगे और अपना त्यागपत्र सौंपेंगे। सचिवालय से बाहर निकलते समय उनके चेहरे पर एक ऐसी संतुष्टि दिखी जो केवल उसी नेता के पास होती है जिसने अपनी शर्तों पर राजनीति की हो।

​सचिवालय की यह अंतिम बैठक यह भी तय कर गई कि अब अगली कैबिनेट की बैठक नए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होगी। सचिवालय के स्टाफ और अधिकारियों ने भी नीतीश कुमार को विदाई दी। गौर करने वाली बात यह है कि नीतीश कुमार ने जाते-जाते भी प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त रहने का निर्देश दिया है।

राजनीतिक गलियारों में हलचल: ‘VOB’ का विश्लेषण

​नीतीश कुमार का इस्तीफा केवल एक व्यक्ति का पद छोड़ना नहीं है, बल्कि यह बिहार में ‘नीतीश युग’ के सक्रिय प्रशासनिक समापन का संकेत है। अब पूरी दुनिया की नजरें दोपहर 3 बजे होने वाली भाजपा विधायक दल की बैठक और शाम 4 बजे होने वाली एनडीए की संयुक्त बैठक पर टिकी हैं। सम्राट चौधरी के नेतृत्व में भाजपा अब किस तरह बिहार की कमान संभालती है, इसकी नींव आज की इस आखिरी कैबिनेट बैठक के साथ रख दी गई है।

​लोक भवन में शपथ ग्रहण की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। जर्मन हैंगर के नीचे कल सुबह जब नया मंत्रिमंडल शपथ लेगा, तो वह आज की इसी कैबिनेट के फैसलों और फाइलों को आगे बढ़ाएगा। नीतीश कुमार ने अपने 145 दिनों के इस छोटे कार्यकाल में भी अपनी छाप छोड़ी है और आज की बैठक के एजेंडे इस बात की पुष्टि करते हैं कि वे एक ‘मैराथन मैन’ की तरह अंतिम फिनिशिंग लाइन तक काम करते रहे।

​पटना की हवा में आज सतुआन की शीतलता के साथ-साथ राजनीति की एक नई गर्माहट है। सचिवालय की सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए नीतीश कुमार ने बिहार को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा किया है, जहाँ से रास्ता अब पूरी तरह भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की ओर जाता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नए मुख्यमंत्री की पहली कैबिनेट में कौन से बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं।

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