
खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):
- कुनबे में बढ़ोत्तरी: 30 नए प्रशिक्षित स्वानों के शामिल होने से डॉग स्क्वायड की संख्या हुई 96।
- बड़ा लक्ष्य: साल 2027 तक 150 और कुल स्वीकृत 200 पदों को भरने की तैयारी।
- सुरक्षा चक्र: पटना मेट्रो, दरभंगा और पूर्णिया एयरपोर्ट पर तैनात किए गए ‘फोर-लेग्ड’ ऑफिसर।
- ट्रेनिंग: हैदराबाद के मोइनाबाद में 1 साल की कठिन ट्रेनिंग के बाद बिहार पुलिस का हिस्सा बनेंगे 50 और नए स्वान।
पटना: बिहार पुलिस अब अपराध अनुसंधान और सुरक्षा व्यवस्था को ‘स्मार्ट’ बनाने के लिए अपने डॉग स्क्वायड (स्वान दस्ता) को हाई-टेक कर रही है। सीआईडी (CID) के अधीन काम करने वाले इस दस्ते में हाल ही में 30 विशेष रूप से प्रशिक्षित स्वानों को शामिल किया गया है, जिससे इनकी कुल संख्या बढ़कर अब 96 हो गई है। यह कदम न केवल वीआईपी सुरक्षा बल्कि पटना मेट्रो और राज्य के हवाई अड्डों की सुरक्षा को भी अभेद्य बनाएगा।
कहाँ तैनात होंगे ये नए ‘जासूस’?
सुरक्षा की गंभीरता को देखते हुए, इन प्रशिक्षित स्वानों को महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनात किया गया है:
- एयरपोर्ट: दरभंगा और पूर्णिया हवाई अड्डों पर 2-2 स्वान सुरक्षा की कमान संभालेंगे।
- पटना मेट्रो: मेट्रो स्टेशनों की सुरक्षा के लिए 2-2 स्वान तैनात किए गए हैं।
- VIP सुरक्षा: राजधानी पटना में वीआईपी चेकिंग और महत्वपूर्ण आयोजनों के लिए 8 विशेष स्वानों को रिजर्व रखा गया है।
- सीमावर्ती जिले: जिन जिलों में कैनेल (कुत्तों के रहने का स्थान) मौजूद है, वहां 1-1 स्वान की तैनाती कर दी गई है।
डॉग स्क्वायड का ‘फ्यूचर रोडमैप’
बिहार पुलिस की योजना अगले साल तक इस दस्ते को और भी बड़ा बनाने की है:
विवरण | वर्तमान स्थिति | लक्ष्य (2027) |
|---|---|---|
स्वानों की संख्या | 96 | 150 |
प्रमुख प्रजातियां | जर्मन शेफर्ड, लैबराडोर, LCC | जर्मन शेफर्ड, लैबराडोर, LCC |
ट्रेनिंग सेंटर | मोइनाबाद (हैदराबाद) | मोइनाबाद (हैदराबाद) |
”हम डॉग स्क्वायड को सुदृढ़ करने पर तेजी से काम कर रहे हैं। जून-जुलाई में 50 नए स्वानों की खरीद की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें हैदराबाद के मोइनाबाद में ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा। हमारा लक्ष्य साल 2027 तक इस संख्या को 150 तक पहुँचाना है।” — श्री पारसनाथ (एडीजी, सीआईडी, बिहार पुलिस)
VOB का नजरिया: अनुसंधान में आएगा ‘पैनापन’
अपराधियों को पकड़ने और विस्फोटक या मादक पदार्थों का पता लगाने में प्रशिक्षित कुत्तों की भूमिका निर्णायक होती है। जर्मन शेफर्ड और लैबराडोर जैसे उन्नत नस्लों के आने से बिहार पुलिस की जांच क्षमता में गुणात्मक सुधार होगा। खास बात यह है कि इन्हें पटना मेट्रो जैसे आधुनिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में लगाया जा रहा है, जो यात्रियों के बीच सुरक्षा का अहसास बढ़ाएगा।


