
मनेर, 17 मई 2026। मनेर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण इलाकों में सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों के बीच उपजे एक बेहद अजीबोगरीब और हाई-वोल्टेज ड्रामे की खबर सामने आई है। बिहार के कुछ विशिष्ट अंचलों में ऐतिहासिक रूप से चर्चित रहे ‘पकड़ुआ बियाह’ (जबरन विवाह) का एक नया मामला पटना जिले के मनेर प्रक्षेत्र में धरातल पर देखा गया है। यहाँ एक युवक अपने छोटे भाई की साली के विवाह समारोह में खुशियां बांटने और उत्सव में शामिल होने गया था, लेकिन उसे क्या पता था कि वह खुद ही उस विवाह मंडप का मुख्य पात्र बना दिया जाएगा। अकीलपुर थाना क्षेत्र के रामदासचक पतलापुर गांव में मेहमान बनकर पहुंचे इस युवक को लड़की पक्ष के लोगों ने कथित रूप से बंधक बना लिया और उसकी इच्छा के विरुद्ध जबरन शादी के मंडप में बैठाकर विवाह की रस्में पूरी करा दीं। जब युवक ने इस विधा का कड़ा विरोध किया और रस्मों को पूरा करने से इनकार किया, तो उसके साथ मारपीट और सामाजिक प्रताड़ना भी की गई। इस घटना के बाद से ही दोनों गांवों के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई, जो थानों के विधिक चौखट तक पहुंच गई। हालांकि, पुलिसिया हस्तक्षेप और दोनों परिवारों के बीच पूर्व से स्थापित रिश्तों की दुहाई के बाद अंततः इस मामले का एक अप्रत्याशित और शांतिपूर्ण पटाक्षेप हो गया है।
## भाई की साली की शादी में मेहमान बनकर गया था अरुण, खुद बन गया दूल्हा
ग्रामीणों और मनेर पुलिस से मिली विस्तृत और व्यावहारिक जानकारी के अनुसार, मनेर थाना क्षेत्र के सुवर्णा गांव के रहने वाले शिवजी साव के पुत्र राकेश उर्फ अरुण साव के घर में इन दिनों पारिवारिक कड़ियों के तहत शादियों का माहौल था। अरुण साव के छोटे भाई कार्तिक साव की साली का विवाह अकीलपुर थाना क्षेत्र के रामदासचक पतलापुर गांव में तय हुआ था। इसी विवाह समारोह में शामिल होने और वर-वधू पक्ष को सहयोग देने के उद्देश्य से अरुण साव मेहमान बनकर रामदासचक पतलापुर गांव गया हुआ था। शादी वाले घर में उत्सव का माहौल था और सभी लोग रस्मों-रिवाजों में व्यस्त थे। इसी दौरान लड़की पक्ष के कतिपय लोगों और परिजनों की नजर अरुण साव पर पड़ी।
आरोप है कि लड़की पक्ष के लोगों ने पहले से ही अरुण को अपने पारिवारिक सिंडिकेट का हिस्सा बनाने यानी दांपत्य सूत्र में बांधने की एक गुप्त विधा तैयार कर रखी थी। जैसे ही विवाह की मुख्य घड़ियां नजदीक आईं, लड़की के परिजनों और उनके सहयोगियों ने अरुण को अकेले पाकर एक कमरे के भीतर विधिक या सामाजिक रूप से नजरबंद कर लिया। इसके बाद उस पर अपनी ही लड़की से शादी करने का भारी दबाव बनाया जाने लगा। अचानक सामने आई इस परिस्थिति से अरुण पूरी तरह स्तब्ध रह गया। उसने इस अनुचित प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया और साफ शब्दों में कहा कि वह इस प्रकार बिना किसी पूर्व योजना और माता-पिता की सहमति के विवाह नहीं कर सकता। लेकिन लड़की पक्ष के लोग उसकी एक भी सुनने को तैयार नहीं थे।
## इनकार करने पर युवक के साथ मारपीट, जबरन पूरी कराई गईं फेरों की रस्में
अरुण साव द्वारा शादी के प्रस्ताव को सिरे से खारिज किए जाने के बाद विवाह घर का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। लड़की पक्ष के पुरुषों और कतिपय असामाजिक तत्वों ने अरुण के साथ विधिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया। आरोप है कि जब अरुण मंडप की ओर जाने के लिए तैयार नहीं हुआ, तो उसके साथ कमरे के भीतर जमकर मारपीट की गई और उसे गंभीर परिणाम व अंजाम भुगतने की धमकियां दी गईं। शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह से लाचार और भयभीत हो जाने के बाद, अरुण को जबरन शादी के पारंपरिक जोड़ों में तैयार किया गया और मंडप के भीतर लाया गया।
वहाँ उपस्थित पंडित और मंत्रोच्चार करने वाले आचार्यों की मौजूदगी में, डरे-सहमे अरुण से सिंदूर दान और सात फेरों की रस्में शारीरिक बल के प्रयोग से पूरी कराई गईं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अरुण मूकदर्शक बना रहा और आंतरिक रूप से इस सामाजिक प्रहार का विरोध करता रहा। जैसे ही सिंदूर दान की विधा संपन्न हुई, लड़की पक्ष ने राहत की सांस ली और पारंपरिक विदाई के नियमों के तहत नवविवाहित जोड़े को विदा करने की प्रशासनिक विधा शुरू कर दी। लड़की पक्ष के लोग स्वयं गाड़ियों की व्यवस्था कर दूल्हा और दुल्हन को मनेर के सुवर्णा गांव स्थित अरुण के पैतृक आवास के लिए रवाना कर दिए, ताकि सामाजिक रूप से इस विवाह को विधिक मान्यता दिलाई जा सके।
## सुवर्णा गांव पहुंचते ही मचा कोहराम, परिजनों ने दुल्हन को घर में रखने से किया इनकार
जबरन रचाई गई इस शादी के बाद जैसे ही नवदंपती मनेर के सुवर्णा गांव स्थित अरुण साव के पैतृक घर पहुंचे, वैसे ही वहां हड़कंप मच गया। अरुण के पिता शिवजी साव और परिवार के अन्य वरिष्ठ सदस्यों को जब इस ‘पकड़ुआ बियाह’ और बेटे के साथ हुई मारपीट की भनक लगी, तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। परिवार के सदस्यों ने इस विवाह को पूरी तरह से अवैध, अमानवीय और विधिक रूप से शून्य करार दिया। पिता शिवजी साव ने कड़ा रुख अपनाते हुए नवविवाहित दुल्हन को अपने घर की चौखट के भीतर प्रवेश कराने से साफ मना कर दिया।
परिजनों का तर्क था कि जिस शादी में लड़के की कोई रजामंदी नहीं थी और जहां सरेआम गुंडागर्दी और मारपीट के बल पर सिंदूर दान कराया गया हो, वैसी लड़की को वे अपने घर की बहू के रूप में कभी भी विधिक या सामाजिक स्वीकार्यता नहीं दे सकते। घर के बाहर ही दूल्हा और दुल्हन को रोक दिया गया, जिससे सड़क पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। इस सामाजिक तिरस्कार और घर से भगाए जाने के बाद लड़की पक्ष के लोग, जो दुल्हन के साथ आए थे, वे आक्रोशित हो गए। उन्होंने इस स्थिति को अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा पर आघात माना और सीधे कानून का सहारा लेने के लिए मनेर थाने की ओर रुख किया।
## थानों में दोनों पक्षों की ओर से काउंटर केस, पुलिस अनुसंधान में जुटी
घर से भगाए जाने के बाद पीड़ित लड़की के परिजनों ने मनेर थाने पहुंचकर पुलिस अधिकारियों के समक्ष एक लिखित आवेदन समर्पित किया। इस आवेदन में आरोप लगाया गया कि सामाजिक रीति-रिवाजों से शादी संपन्न होने के बाद लड़के के परिवार वाले उनकी बेटी को प्रताड़ित कर रहे हैं और उसे घर के भीतर रखने से विधिक रूप से इनकार कर रहे हैं। मनेर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत सुवर्णा गांव में एक टीम भेजी और प्रारंभिक छानबीन शुरू की।
जैसे ही पुलिस की टीम सुवर्णा गांव पहुंची, लड़के पक्ष के पिता शिवजी साव और पीड़ित युवक अरुण साव ने भी पुलिस के समक्ष अपना विधिक पक्ष रखा। लड़के पक्ष ने लड़की के परिजनों के खिलाफ अपहरण, बंधक बनाने, सरेआम मारपीट करने और शारीरिक बल के प्रयोग से जबरन विवाह (पकड़ुआ बियाह) कराने की एक नामजद जवाबी विधिक शिकायत (काउंटर कंप्लेंट) दर्ज करा दी। मनेर पुलिस के सामने अब एक अजीब विधिक संकट खड़ा हो गया था, जहाँ एक पक्ष विवाह के अधिकारों की रक्षा की मांग कर रहा था, तो दूसरा पक्ष इस पूरे विवाह को ही आपराधिक कृत्य करार दे रहा था। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों को दर्ज करते हुए दोनों परिवारों के मुखिया और गणमान्य लोगों को मनेर थाने के विधिक कक्ष में उपस्थित होने का आधिकारिक निर्देश जारी किया।
## पूर्व की रिश्तेदारी बनी ढाल, थाने के भीतर पंचायती से हुआ विवाद का पटाक्षेप
मनेर पुलिस के अनुसार, जब दोनों पक्षों के मुख्य लोग, पारिवारिक सदस्य और गांवों के प्रबुद्ध नागरिक थाने पहुंचे, तो मामले की परतों को व्यावहारिक रूप से खंगालना शुरू किया गया। पुलिस उपाधीक्षक और थाना प्रभारी के पर्यवेक्षण में यह बात सामने आई कि दोनों परिवार अजनबी नहीं हैं, बल्कि उनके बीच पहले से ही एक मजबूत विधिक और पारिवारिक रिश्तेदारी स्थापित है। चूंकि अरुण के छोटे भाई कार्तिक की शादी पहले ही उस परिवार में हो चुकी थी, इसलिए दोनों पक्षों के बीच सामाजिक कड़ियां काफी गहरी थीं।
थाने के भीतर ही दोनों गांवों के सरपंच, मुखिया और प्रबुद्ध बुजुर्गों ने बैठकर एक लंबी पंचायती शुरू की। सामाजिक विचार-विमर्श के दौरान यह दलील दी गई कि यदि इस मामले को कानूनी मुकदमेबाजी और जेल-कचहरी के चक्करों में उलझाया गया, तो इससे न केवल अरुण और उस लड़की का भविष्य हमेशा के लिए बर्बाद हो जाएगा, बल्कि कार्तिक के वैवाहिक जीवन पर भी इसका बेहद प्रतिकूल और हिंसक असर पड़ सकता है। कानूनी मुकदमों के कारण दोनों परिवारों के बीच हमेशा के लिए दुश्मनी पैदा हो जाएगी। इन व्यावहारिक तर्कों और सामाजिक दबाव के सामने आखिरकार दोनों पक्षों का गुस्सा शांत हुआ। दोनों परिवारों ने अपनी-अपनी विधिक शिकायतों को वापस लेने पर सहमति जताई और आपस में मिल-बैठकर इस पूरे विवाद को सुलझा लिया। लड़की पक्ष ने अपनी गलती स्वीकार की और लड़के पक्ष ने भी लड़की को बहू के रूप में विधिक रूप से अपनाने की आंशिक सहमति दे दी, जिसके बाद मनेर थाने की पुलिस ने राहत की सांस ली और मामले का शांतिपूर्ण पटाक्षेप हो गया।


