
पटना। बिहार में नई सरकार के गठन के बाद आखिरकार मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली नई कैबिनेट में सत्ता और प्रशासन का पूरा समीकरण अब साफ हो गया है। गृह, सामान्य प्रशासन और निगरानी जैसे अहम विभाग मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने पास रखे हैं, जबकि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी को जल संसाधन और संसदीय कार्य विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं दूसरे उपमुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव को वित्त और वाणिज्य कर विभाग सौंपा गया है।
नई कैबिनेट में कई पुराने चेहरों को महत्वपूर्ण विभाग मिले हैं, जबकि कुछ नए चेहरों को भी बड़ी जिम्मेदारियां देकर सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि प्रशासन और राजनीति दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। विभागों के बंटवारे के साथ ही अब सरकार के कामकाज की दिशा और प्राथमिकताएं भी सामने आने लगी हैं।
सम्राट चौधरी ने अपने पास रखे सबसे ताकतवर विभाग
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गृह विभाग के साथ-साथ सामान्य प्रशासन, मंत्रिमंडल सचिवालय, निगरानी, निर्वाचन और सिविल विमानन विभाग भी अपने पास रखा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला प्रशासनिक नियंत्रण और कानून-व्यवस्था पर सीधी पकड़ बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है।
गृह विभाग किसी भी राज्य सरकार का सबसे प्रभावशाली विभाग माना जाता है। इसके जरिए पुलिस प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था और राज्य की कानून-व्यवस्था सीधे मुख्यमंत्री के नियंत्रण में रहती है। ऐसे में सम्राट चौधरी का यह फैसला उनके मजबूत नेतृत्व की तरफ इशारा माना जा रहा है।
विजय कुमार चौधरी और बिजेन्द्र यादव को बड़ी जिम्मेदारी
सरकार में वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी को जल संसाधन विभाग और संसदीय कार्य विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। बिहार में बाढ़ और सिंचाई व्यवस्था को देखते हुए जल संसाधन विभाग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं संसदीय कार्य विभाग सरकार और विधानसभा के बीच समन्वय का काम करता है।
दूसरे उपमुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव को वित्त और वाणिज्य कर विभाग सौंपा गया है। राज्य की आर्थिक नीतियों और बजट प्रबंधन की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर होगी। लंबे राजनीतिक अनुभव को देखते हुए उन्हें यह अहम विभाग दिया गया है।
ग्रामीण विकास से लेकर कृषि तक, कई अहम मंत्रालयों का बंटवारा
नई कैबिनेट में श्रवण कुमार को ग्रामीण विकास और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। बिहार की ग्रामीण राजनीति और पंचायत स्तर पर सरकार की योजनाओं को लागू करने में यह विभाग अहम भूमिका निभाएगा।
विजय कुमार सिन्हा को कृषि विभाग सौंपा गया है। बिहार की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है, ऐसे में कृषि विभाग सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल माना जा रहा है। किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने की चुनौती अब उनके सामने होगी।

भाजपा नेता डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की जिम्मेदारी मिली है। बिहार में जमीन विवाद और दाखिल-खारिज जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहते हैं, इसलिए यह विभाग काफी संवेदनशील माना जाता है।
स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग पर खास नजर
नई सरकार में निशांत कुमार को स्वास्थ्य विभाग दिया गया है। यह फैसला राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। अस्पतालों की व्यवस्था, डॉक्टरों की कमी और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की जिम्मेदारी अब उनके पास होगी।
वहीं शिक्षा विभाग मिथिलेश तिवारी को सौंपा गया है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार, शिक्षक नियुक्ति और स्कूलों की गुणवत्ता बढ़ाने जैसे बड़े मुद्दे इस विभाग के सामने रहेंगे।
उद्योग, रोजगार और आईटी पर सरकार का फोकस
सरकार ने रोजगार और उद्योग को लेकर भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। श्रेयसी सिंह को उद्योग एवं खेल विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। बिहार में निवेश आकर्षित करने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना इस विभाग की सबसे बड़ी चुनौती होगी।
अरुण शंकर प्रसाद को श्रम संसाधन, प्रवासी श्रमिक कल्याण, युवा एवं रोजगार विभाग सौंपा गया है। बिहार से बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं, ऐसे में यह विभाग सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नीतीश मिश्रा को नगर विकास एवं आवास विभाग के साथ सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। शहरी विकास और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में उनकी भूमिका अहम होगी।
महिलाओं और सामाजिक न्याय से जुड़े विभाग
रमा निषाद को पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं श्वेता गुप्ता को समाज कल्याण विभाग सौंपा गया है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग की जिम्मेदारी लखेन्द्र कुमार रोशन को दी गई है।
सरकार का प्रयास सामाजिक संतुलन बनाए रखने और विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का भी दिख रहा है।
ऊर्जा, परिवहन और सड़क निर्माण पर भी जोर
शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल को ऊर्जा विभाग दिया गया है। बिहार में बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी अब उनके पास होगी।
दामोदर रावत को परिवहन विभाग और कुमार शैलेन्द्र को पथ निर्माण विभाग सौंपा गया है। राज्य में सड़क और परिवहन नेटवर्क को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।
पर्यटन, पर्यावरण और संस्कृति विभाग का भी बंटवारा
केदार प्रसाद गुप्ता को पर्यटन विभाग दिया गया है। बिहार में धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। वहीं डॉ. प्रमोद कुमार को खान एवं भूतत्व और कला एवं संस्कृति विभाग सौंपा गया है।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की जिम्मेदारी डॉ. रामचंद्र प्रसाद को मिली है। जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं, ऐसे में यह विभाग भी अहम माना जा रहा है।
नई कैबिनेट से क्या संकेत?
नई सरकार के विभागीय बंटवारे को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसमें अनुभव और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने पास गृह विभाग रखकर स्पष्ट संकेत दिया है कि वे प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहते।
वहीं स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग और रोजगार जैसे विभागों में नए चेहरों को मौका देकर सरकार ने बदलाव का संदेश देने की कोशिश की है। अब सबसे बड़ी चुनौती इन विभागों के जरिए जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की होगी।
बिहार की राजनीति में यह नई कैबिनेट आने वाले दिनों में किस तरह काम करती है, इस पर पूरे राज्य की नजर टिकी हुई है।


